SEBI new rule: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने शेयर मार्केट के इंटरमीडियरीज यानि ब्रोकर्स को बड़ी राहत दी है. सेबी ने फिट एंड प्रॉपर मानदंडों में काफी राहत दी है. अब नए प्रस्ताव के मुताबिक अब केवल FIR या क्रिमिनल शिकायत के आधार पर ब्रोकर्स को ऑटोमेटिक डिस्क्वालिफिकेशन नहीं मानी जाएगी. अब केवल FIR होने पर ही यह नहीं माना जाएगा कि ब्रोकर दोषी है. दोषी पाए जाने पर ही अब नॉट फिट माना और घोषित किया जाएगा. जिसके बाद सुनवाई का मौका दिया जाएगा. मिली जानकारी के मुताबिक अब 5 साल की डिफॉल्ट बाउंडिंग को भी हटाया जा सकता है.
Fit and Proper नियमों में बड़ी राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Fit and Proper नियमों में बड़ी राहत मिली है. जिसके बाद अब फाइनेंशियल क्राइम और सिक्योरिटीज लॉ वॉयलेशन में दोषी पाए जाने पर ही ब्रोकर्स की आयोग्यता सुनिश्चित होगी. देखा जाए तो यह ब्रोकर्स के लिए एक बड़ा फायदा हो सकता है. अब फाइनेंशियल क्राइम प्रूफ हो जाने के बाद ही कार्रवाही की जाएगी.
क्या है Fit and Proper?
Fit and Proper एक प्रकार का रेगुलेटरी स्टैंडर्ड है, जो फाइनेंशियल क्षेत्रों के काम को रेगुलेट करता है. Fit and Proper के तहत फाइनेंशियल क्राइम को मैनेज करने के साथ ही यह देखा जाता है कि ब्रोकर्स कितनी ईमानदारी के साथ काम कर रहे हैं. इसके अलावा किसी प्रकार का मिसमैनेजमेंट और बैंक्रप्टी आदि को भी इस Fit and Proper के तहत मैनेज किया जाता है. यह ठीक उसी तरह है जैसे SEBI बैंक में आने वाले सभी सेक्टर्स को रेगुलेट करता है.
राहत में क्या-क्या हो सकते हैं फायदे
सेबी द्वारा ब्रोकर्स को दी जाने वाली राहत उनके लिए काफी फायदेमंद हो सकती है. इसके तहत सुनवाई का मौका मिलने के साथ ही वोटिंंग राइट्स पर पाबंदी होगी, जिसके तहत आयोग्य होने वाले लोगों को अपनी हिस्सेदारी को भी जबरन बेचने की जरूरत नहीं होगी. ऐसे में केवल वोटिंग राइट्स पर प्रतिबंध लगेगा. इसके साथ ही साथ अगर किसी को अयोग्य घोषित किया जाता है तो उसे बदलने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा.