Supreme Court on Freebies: फ्रीबीज को लेकर इन दिनों एक बार फिर से चर्चा तेज है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फ्रीबीज को लेकर एक सुनवाई के दौरान टिप्पणी की है. दरअसल, जजों के वेतन और पेंशन के मुद्दे की सुनाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर और विचार करने वाला मुद्दा है. चुनाव आने के समय आमतौर पर राजनीतिक दल लोगों को फ्रीबीज यानि मुफ्त की योजनाओं और सहायता का लालच देते हैं.
इस मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा की फ्रीबीज की जांच होना जरूरी है. कोर्ट का कहना है कि नीति और संविधानिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है.
क्या है फ्रीबीज?
फ्रीबीज को लेकर अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं, जबकि फ्रीबीज चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा लोगों को देने वाली एक मुफ्त योजना है. इन योजनाओं के तहत जनता को कुछ मुफ्त सुविधाएं जैसे लैपटॉप, कैश और मुफ्त बिजली पानी आदि देना है. चुनाव के समय फ्रीबीज देकर राजनीतिक दलों का मकसद केवल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना है.
कोर्ट न फ्रीबीज से जोड़ा जजों की वेतन का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने जजों की पेंशन और वेतन के मुद्ददे को फ्रीबीज के साथ जोड़ा है. इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को घेरे में लेते हुए कहा कि राज्यों के पास फ्रीबीज के नाम पर उन लोगों को देने के लिए पैसा है, जो लोग काम नहीं करते हैं, लेकिन जजों की पेंशन और वेतन देने के लिए उनके पास वित्त यानि पर्याप्त पैसा नहीं है. इसी के साथ-साथ चुनाव आयोग ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए चुनाव के दौरान फ्रीबीज को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है ताकि चुनाव के दौरान फ्री में बांटी जाने वाली रेवड़ियों की ओर विचार किया जा सके.
फ्रीबीज को अरविंद केजरीवाल से जोड़ रहे हैं लोग
फ्रीबीज को लेकर लोग दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल से जोड़ रहे हैं. लोगों का कहना है कि चुनाव के समय फ्रीबीज देने का केजरीवाल सबसे बड़ा उदाहरण है. चूंकि, चनाव से पहले केजरीवाल द्वारा भी दिल्ली की जनता को मुफ्त पानी, बिजली और फ्री बसों की सुविधाएं दी गई थी।