सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ ट्रैवल‑रील्स में दावा किया जा रहा है कि मालदीव के रिसॉर्ट्स लगभग 90% खाली पड़े हैं और इसका कारण ईरान–इज़राइल युद्ध के बीच उड़ानों में कमी और अंतरराष्ट्रीय तनाव माना जा रहा है.
ये रील्स खाली पूल, रेत के सुनसान बीच और खाली रिसॉर्ट के फुटेज दिखा रही हैं. लेकिन क्या सच में युद्ध की वजह से मालदीव के पर्यटन पर असर पड़ा है? आइये जानते हैं मालदीव में पर्यटन की वर्तमान वास्तविक स्थिति क्या है?
क्या कहते हैं वायरल वीडियो
वायरल वीडियो अक्सर सिर्फ एक ही परिदृश्य दिखाते हैं; जैसे सुबह या दोपहर को कम होने वाला भीड़‑मुक्त पूल या रेत पर खाली बेड, लेकिन रात के समय ये जगहें फिर से भर जाती हैं, जिनके बारे में नहीं दिखाया जाता है. बात यह भी है कि मालदीव ने हाल ही में इज़राइली टूरिस्ट्स पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे उस मार्केट की डिमांड अस्थायी रूप से कम हुई है, लेकिन एशिया, यूरोप और अन्य रीजन के ट्रैवलर्स ने इस खालीपन को पूरी तरह जोड़कर संतुलित कर दिया है.
मालदीव पहुंचने का रास्ता हुआ बाधित
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह संकट मालदीव के असुरक्षित होने से नहीं, बल्कि वहां पहुंचने के तरीके से जुड़ा है. ज़्यादातर यूरोपीय यात्री मालदीव पहुंचने के लिए दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे प्रमुख हवाई अड्डों का उपयोग करते हैं. ईरान-इज़राइल संघर्ष के कारण इन हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द हो गईं और सुरक्षा का माहौल बिगड़ गया, जिससे यूरोपीय बाज़ार को भारी नुकसान हुआ है. सूत्रों के अनुसार मार्च महीने में यूरोप से मालदीव जाने वाली लगभग 500 उड़ानें रद्द हो गईं थीं.
क्या कहते हैं आधिकारिक आंकड़े
मालदीव पर्यटन उद्योग के आधिकारिक आंकड़े और रिसॉर्ट ऑपरेटरों के अनुसार, यह 90% खाली होने का दावा अतिशयोक्ति और भ्रामक है. हालांकि ईरान–इज़राइल युद्ध से अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात और माल‑यात्रा पर असर ज़रूर पड़ा है, लेकिन मालदीव के अधिकांश प्राइवेट आइलैंड रिसॉर्ट्स अभी भी अधिकांशतः भरे हुए हैं; खासकर अंतराष्ट्रीय मार्केटिंग एजेंसियों के अनुसार उच्च स्तरीय लक्ज़री सेगमेंट एडवांस बुकिंग के साथ फुल चल रहा है. कई रिसॉर्ट ने व्हाइट‑ग्लव ट्रैवलर्स के लिए लिमिटेड‑कैपसिटी और प्राइवेट‑जेट स्टिक को भी बढ़ा दिया है. लेकिन इसका एक दूसरा पक्ष भी है.
एक यूरोपीय डीएमसी ने 4,000 बुकिंग में से 2,000 बुकिंग रद्द होने के कारण 11 मिलियन यूरो का नुकसान होने की सूचना दी है. वहीं उद्योग के एक अधिकारी ने टीटीजी एशिया को बताया, “भले ही युद्ध कल समाप्त हो जाए, मध्य पूर्व को एक केंद्र के रूप में फिर से स्थापित करने में कई महीने लगेंगे.”