आमतौर पर बच्चे फिजिक्स को कम पसंद करते हैं. लेकिन जब कोई इसे इंट्रेस्टिंग तरीके से पढ़ाये तो ये बेहद मजेदार विषय बन जाता है. ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसकी तारीफ आनंद महिंद्रा ने भी की है.
इस वीडियो में एक व्यक्ति बेहद मजेदार और आसान तरीके से क्लास को बरनौली का सिद्धांत समझाते हैं.
बर्नौली के सिद्धांत पर आधारित यह वीडियो , जिसे कई लोग एक नीरस पाठ्यपुस्तक अवधारणा मानते हैं, को आश्चर्यजनक रूप से मजेदार और तुरंत देखने योग्य बना देता है.
वायरल वीडियो की कहानी
वायरल हो रहे इस वीडियो में एक व्यक्ति अविश्वसनीय रूप से लंबी पीली प्लास्टिक की थैली को हवा से भरने की कोशिश कर रहा है. वह दर्शकों से एक सरल प्रश्न पूछकर शुरुआत करता है: क्या इसे केवल एक सांस से भरा जा सकता है? बरनौली के सिद्धांत को समझाने के लिए, वह पहले पारंपरिक विधि आजमाता है. वह थैली के खुले सिरे को एक संकरे छेद में समेटता है, अपना मुंह सीधे उस पर रखता है और फूंक मारता है. इसका परिणाम निराशाजनक होता है. कई बार प्रयास के बावजूद, थैली एक सांस में नहीं भरती. फिर आता है ट्विस्ट.
बर्नौली के सिद्धांत का उपयोग करके प्लास्टिक बैग को फुलाना वह थैली की हवा पूरी तरह से निकाल देते हैं और बोलते हैं कि अब वह बर्नौली के सिद्धांत का प्रयोग करेंगे. इस बार, थैली के छेद पर मुंह बंद करने के बजाय, वह उसे थैली से थोड़ा दूर रखते हैं और उसकी ओर हवा फूंकते हैं. जैसा कि वह समझाता है, छेद के ऊपर से हवा फूंकने से थैली के अंदर कम दबाव वाला क्षेत्र बन जाता है. आसपास की हवा उसकी सांस से निकलने वाली हवा के साथ अंदर खींच ली जाती है. सिर्फ एक सांस में, चपटी पीली प्लास्टिक की थैली तेजी से फूल जाती है और उम्मीद से कहीं ज्यादा हवा अंदर खींच लेती है.
आनंद महिंद्रा की प्रतिक्रिया
I wish my school Physics teacher had been as animated & creative…
Bernoulli’s principle would have been far more exciting, & not just one more principle to ‘mug’.
Even in an age of AI, creative teaching will always have a space…pic.twitter.com/T6enoedCx5
— anand mahindra (@anandmahindra) February 20, 2026
इस वीडियो से आनंद महिंद्रा भी काफी प्रभावित हुए. वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए, आनंद महिंद्रा ने X पर लिखा कि काश उनके स्कूल के फिजिक्स टीचर भी वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की तरह ही जीवंत और रचनात्मक होते. उन्होंने कहा कि बर्नौली का सिद्धांत याद करने के लिए मात्र एक और अवधारणा बनने के बजाय कहीं अधिक रोचक होता. उन्होंने यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भी रचनात्मक शिक्षण का हमेशा महत्व रहेगा.