Amritsar Panchayat Strange Rule: बदलते वक्त के साथ समाज के नियम भी बदलते हैं, लेकिन अमृतसर के अडलीवाल गांव से एक ऐसा अजीब नियम सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है. यहां की नगर पंचायत ने सामाजिक ताने-बाने को टूटने से बचाने के लिए भागकर शादी करने वालों के सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया है. जहां एक पक्ष इसे गांव के अनुशासन और घरों के झगड़े रोकने का जरिया मान रहा है, वहीं दूसरा इसे व्यक्तिगत आजादी पर प्रहार के रूप में देख रहा है. यह नियम कितना सही है और कितना गलत, यह बहस का विषय है, लेकिन इसने ग्रामीण व्यवस्था की कड़ाई को एक नई चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है.
पूरा मामला क्या है?
अमृतसर ज़िले के अडलीवाल की नगर पंचायत ने सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पंचायत और गांव की आम सभा के दौरान, सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें कहा गया है कि जो लोग भागकर से शादी करेंगे, उनका गांव में सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. पंचायत का कहना है कि संबंधित परिवारों की मर्ज़ी के बिना की गई शादियों से अक्सर गांव के घरों के बीच झगड़े और विवाद बढ़ जाते हैं, जिससे सामाजिक माहौल खराब होता है.
पंचायत यहीं नहीं रुका है, यदि कोई लड़का और लड़की आपसी सहमति से शादी करते हैं, तो उनके परिवारों का गांव में सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। भले ही माता-पिता ऐसी शादी के पक्ष में हों, फिर भी गांव वाले उनसे बातचीत करने से परहेज करेंगे. सुख-दुख के समय समुदाय से उन्हें कोई सहयोग या भागीदारी नहीं मिलेगी और न ही उन्हें किसी भी प्रकार की सामाजिक सहायता दी जाएगी.
इसके अलावा, पंचायत ने फ़ैसला किया है कि गांव का कोई भी जिसमें पंच, सरपंच, अन्य सदस्य, या लंबरदार शामिल है, ऐसे परिवारों की किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी काम में मदद नहीं करेगा और न ही उनकी ओर से किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेगा. यदि कोई लड़का या लड़की अपने परिवार की मर्ज़ी के बिना किसी दूसरे गांव के व्यक्ति से शादी करने के लिए भाग जाते हैं, तो उन्हें गाँव में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
नशे के खिलाफ भी सख्त फैसला
पंचायत ने नशे के दुरुपयोग के ख़िलाफ़ भी सख़्त रुख अपनाया है. यदि कोई व्यक्ति नशीले पदार्थ बेचते हुए पकड़ा जाता है, तो किसी भी गांव वाले को उसके बचाव में आगे आने की अनुमति नहीं है. विशेष रूप से, कोई भी उसकी जमानत के लिए जमानतदार नहीं बनेगा. यदि कोई ऐसे व्यक्ति का समर्थन करने का फ़ैसला करता है, तो उसे पंचायत और आम सभा के सामने सफ़ाई देनी होग.
इसके अतिरिक्त, गाँव के पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार, पंचायत ने महंतों (धार्मिक संरक्षकों) के लिए लान (भेंट) के रूप में 1,100 रुपए और मरासियों, भांडों तथा छुरी मारों (पारंपरिक कलाकारों/मनोरंजन करने वालों) के लिए 500 रुपए की राशि देने का फ़ैसला किया है. पंचायत का कहना है कि इन फ़ैसलों का मुख्य उद्देश्य गांव में अनुशासन बनाए रखना और सामाजिक झगड़ों को कम करना है.