Optical Illusion: पहली नजर में देखने पर आपको लग सकता है कि ऊपर दी गई तस्वीर में बनी दोनों लाइनें अलग-अलग लंबाई की हैं. लेकिन असल में यही इस ऑप्टिकल इल्यूजन की सबसे बड़ी खासियत है कि दोनों लाइनें बराबर लंबाई की होती हैं, फिर भी हमारा दिमाग हमें धोखा दे देता है.
क्या है म्यूलर-लायर इल्यूजन?
म्यूलर-लायर इल्यूजन एक मशहूर ऑप्टिकल इल्यूजन है, जिसमें एक जैसी लंबाई की दो लाइनें अलग-अलग दिखाई देती हैं.इस इल्यूजन को साल 1889 में जर्मन साइकोलॉजिस्ट फ्रांज कार्ल म्यूलर-लायर ने बनाया था.
इसमें लाइन के सिरों पर तीर जैसे निशान बने होते हैं
एक लाइन में तीर बाहर की तरफ होते हैं दूसरी लाइन में तीर अंदर की तरफ,यही छोटे-से बदलाव दिमाग को कन्फ्यूज कर देते हैं.
कौन-सी लाइन ज्यादा लंबी लगती है?
ज्यादातर लोगों को वो लाइन ज्यादा लंबी लगती है,जिसके सिरों पर तीर ‘बाहर की ओर’ बने होते हैं.वहीं, तीर अंदर की तरफ वाली लाइन छोटी लगती है.लेकिन सच यह है कि ‘दोनों लाइनें बिल्कुल बराबर होती हैं’. नीचे वाली तस्वीर में यह साफ दिख जाता है.
ऐसा क्यों होता है? दिमाग कैसे धोखा खा जाता है?
ऑप्टिकल इल्यूजन सिर्फ आंखों का खेल नहीं होते, बल्कि ये बताते हैं कि हमारा दिमाग चीजों को कैसे समझता है.
1. गहराई (Depth) का असर
हमारा दिमाग 2D तस्वीरों को भी 3D की तरह समझने की कोशिश करता है.
अंदर की तरफ तीर वाली लाइन हमें ऐसी लगती है जैसे वह दूर जा रही हो,बाहर की तरफ तीर वाली लाइन पास आती हुई लगती है.इसी वजह से एक लाइन छोटी और दूसरी लंबी महसूस होती है.
2. Size Constancy का सिद्धांत
साइकोलॉजिस्ट रिचर्ड ग्रेगरी के मुताबिक, हमारा दिमाग दूरी को ध्यान में रखकर साइज का अंदाजा लगाता है.लेकिन जब यही नियम फ्लैट तस्वीरों पर लागू होता है, तो गलती हो जाती है.
3. कन्फ्लिक्टिंग संकेत
कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लाइन की असली लंबाई और पूरे डिजाइन की लंबाई -दोनों के बीच टकराव होता है.इससे दिमाग गलत फैसला कर लेता है.