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हाथी के पेट में ऐसा क्या होता है? जो उसके गोबर से बनी कॉफी बन जाती है ‘अमृत’, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला सबसे बड़ा रहस्य!

Black Ivory Coffee: ब्लैक आइवरी कॉफी का स्वाद इतना स्मूद क्यों होता है? वैज्ञानिकों ने आखिरकार ब्लैक आइवरी रहस्य समझाय लिया. टोक्यो के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने एक बैक्टीरिया का पता लगाया है जो इसमें अहम भूमिका निभाता है?

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-01-23 18:24:44

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Why Black Ivory Coffee Tastes Smooth: ब्लैक आइवरी कॉफी (Black Ivory Coffee) का नाम किसने नहीं सुना होगा, यह दुनिया की सबसे महंगी और दुर्लभ कॉफियों में से एक है. सबसे अजीब बात तो यह है कि यह कॉफी थाईलैंड के हाथी के गोबर से बनाई जाती है. यह कॉफी साधारण कॉफी के मुकाबले ज्यादा स्मूद और कम कड़वी होती है. इसी कड़ी में टोक्यो के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने इसका खुलासा किया है कि यह कॉफी बाकी साधारण कॉफियों से इतनी भिन्न क्यों होती है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें पूरी खबर.

क्यों होती है आइवरी कॉफी इतनी स्मूद ओर कम कड़वा?

टोक्यो के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि ब्लैक आइवरी कॉफी रेगुलर कॉफी की तुलना में ज़्यादा स्मूद और कम कड़वा क्यों होता है. उनकी रिसर्च से पता चलता है कि एशियाई हाथियों के डाइजेस्टिव सिस्टम में रहने वाले बैक्टीरिया कॉफी के अनोखे स्वाद को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
ब्लैक आइवरी कॉफी थाईलैंड के एक ही हाथी अभयारण्य में बनाई जाती है. हाथियों को अरेबिका कॉफी चेरी खिलाई जाती है और बाद में बीन्स उनके गोबर से इकट्ठा करके साफ करके भुनी जाती हैं. यह कॉफी अपने हल्के, चॉकलेटी स्वाद और कम कड़वाहट के लिए जानी जाती है.

क्या कहती है स्टडी?

रिसर्चर्स ने ब्लैक आइवरी कॉफी बनाने वाले हाथियों के गोबर के सैंपल का अध्ययन किया और उनकी तुलना उसी अभयारण्य के उन हाथियों के सैंपल से की जिन्होंने कॉफी चेरी नहीं खाई थी. उन्होंने पाया कि कॉफी खाने वाले हाथियों में बड़ी संख्या में ऐसे बैक्टीरिया थे जो पेक्टिन को तोड़ते हैं, जो कॉफी बीन्स में पाया जाने वाला एक प्राकृतिक पदार्थ है.

पेक्टिन आमतौर पर भूनने के दौरान टूट जाता है और कड़वे स्वाद वाले कंपाउंड बनाता है. हालांकि, जब पेट के बैक्टीरिया भूनने से पहले पेक्टिन की मात्रा को कम कर देते हैं, तो कम कड़वे कंपाउंड बनते हैं. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि ब्लैक आइवरी कॉफी का स्वाद रेगुलर कॉफी की तुलना में ज़्यादा स्मूद क्यों होता है.

निष्कर्ष में क्या आया सामने?

एसोसिएट प्रोफेसर ताकुजी यामाडा इन रोमांचक निष्कर्षों के बारे में बताते हुए कहते हैं कि हमारे निष्कर्ष एक संभावित मॉलिक्यूलर मैकेनिज्म पर प्रकाश डाल सकते हैं जिसके द्वारा BIC हाथियों के गट माइक्रोबायोटा BIC के स्वाद में योगदान करते हैं.  वह आगे कहते हैं कि इस परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए और एक्सपेरिमेंटल वैलिडेशन की जरूरत है, जैसे कि हाथी के डाइजेस्टिव ट्रैक्ट से गुजरने से पहले और बाद में कॉफी बीन के घटकों का बायोकेमिकल एनालिसिस, वह कॉफी प्रोसेसिंग की इस तकनीक में भविष्य की रिसर्च के रास्ते बताते हुए कहते हैं.

अध्ययन में यह भी पाया गया कि इन हाथियों में गट माइक्रोब्स का ज़्यादा विविध मिश्रण था, जिसमें पेक्टिन डाइजेशन से जुड़े बैक्टीरिया भी शामिल थे. वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि कॉफी चेरी खाने से ये माइक्रोब्स हाथी के पेट के अंदर बढ़ने में मदद मिल सकती है.

रिसर्चर्स का कहना है कि ये निष्कर्ष बताते हैं कि जानवरों का डाइजेशन और गट बैक्टीरिया खाने के स्वाद को कैसे प्रभावित कर सकते हैं. यह अध्ययन इस बात पर भविष्य की रिसर्च के लिए रास्ते खोलता है कि माइक्रोब्स का इस्तेमाल नए कॉफी फ्लेवर और अन्य फर्मेंटेड फूड्स को विकसित करने के लिए कैसे किया जा सकता है. यह रिसर्च साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुई थी.

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