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शादी को लेकर युवती ने दिया बोल्ड स्टेटमेंट, कहा, ‘50% कॉर्पोरेट कर्मचारी अवैध…’, वीडियो वायरल

एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस लड़की ने शादी को लेकर एक बोल्ड स्टेटमेंट दिया है, जिसमें उसने शादी और रिश्तों पर सवाल उठाते हुए बहस छेड़ दी है.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: April 4, 2026 11:14:03 IST

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युवा पीढ़ी में शादी को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं, जैसे कुछ लोगों का इस संस्था से विश्वास उठ गया है, तो कुछ लोगों को भारत में ‘अरेंज मैरिज’ के कॉन्सेप्ट में झोल नजर आता है. इसी बीच एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

इस लड़की ने शादी को लेकर एक बोल्ड स्टेटमेंट दिया है, जिसमें उसने शादी और रिश्तों पर सवाल उठाते हुए बहस छेड़ दी है. कॉर्पोरेट जगत के 50% कर्मचारियों के अवैध संबंधों (एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर्स) में होने का दावा करते हुए, उसने शादी के पारंपरिक कारणों को ही चुनौती दे दी.

वायरल वीडियो की पूरी कहानी 

इस वीडियो में लड़की भारत में शादी के कांसेप्ट पर बात करती है कि भारत में लोग या तो इसलिए शादी करते हैं क्योंकि उन्हें अपने मां-बाप का ध्यान रखने के लिए कोई चाहिए होती है या फिर इसलिए क्योंकि पीढ़ी को आगे बढ़ाना होता है. उसने कहा अगर बच्चे ही मकसद हैं,


तो एडॉप्शन एक बेहतर विकल्प है. वहीं माता-पिता की सेवा के लिए प्रोफेशनल केयरटेकर्स उपलब्ध हैं. “तो शादी का क्या मतलब?” – यह सवाल पूछकर उसने समाज के रूढ़िगत मानदंडों पर करारा प्रहार किया.

लड़की का कहना है कि शादी दो लोगों के बीच कंपेनियनशिप के लिए होनी चाहिए न कि किसी और कारण से. उसने भारत में असफल शादी के बारे में बात करते हुए बताया कि कॉर्पोरेट कंपनियों में आधे लोग एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर में हैं, वहीं बिजनेस वाले लोग भी इसमें पीछे नहीं हैं. 

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया   

सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं. कुछ लोग लड़की के विचार के समर्थन में हैं और इसे प्रगतिशील सोच मान रहे हैं. उनका कहना है कि शादी अब मजबूरी नहीं रह गई. आर्थिक स्वतंत्रता और तकनीक ने व्यक्तिगत आजादी को बढ़ावा दिया है. वहीं कुछ लोग इस विचार के विरोध में हैं. विरोध करने वाले लोग इसे परिवार व्यवस्था पर हमला बता रहे हैं. उनका तर्क है कि शादी केवल बच्चों या माता-पिता के लिए नहीं, बल्कि साथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव, विश्वास और सामाजिक स्थिरता के लिए भी होती है.

एडॉप्शन और केयरटेकर्स जैसे विकल्प निश्चित रूप से व्यावहारिक हैं, लेकिन क्या वे शादी के भावनात्मक आयाम को बदल सकते हैं? भारत जैसे समाज में जहां संयुक्त परिवार और विवाह की पवित्रता गहरी जड़ें रखते हैं, यह बहस नई पीढ़ी के मूल्यों को परख रही है। आंकड़े बताते हैं कि तलाक की दरें बढ़ रही हैं, खासकर शहरी क्षेत्रों में।

यह बयान समाज को सोचने पर मजबूर कर रहा है – क्या शादी अब पुरानी परंपरा बन चुकी है, या इसके मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं? बहस जारी है, और यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम सामाजिक बंधन की लड़ाई बनती जा रही है।

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Last Updated: April 4, 2026 11:14:03 IST

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युवा पीढ़ी में शादी को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं, जैसे कुछ लोगों का इस संस्था से विश्वास उठ गया है, तो कुछ लोगों को भारत में ‘अरेंज मैरिज’ के कॉन्सेप्ट में झोल नजर आता है. इसी बीच एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

इस लड़की ने शादी को लेकर एक बोल्ड स्टेटमेंट दिया है, जिसमें उसने शादी और रिश्तों पर सवाल उठाते हुए बहस छेड़ दी है. कॉर्पोरेट जगत के 50% कर्मचारियों के अवैध संबंधों (एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर्स) में होने का दावा करते हुए, उसने शादी के पारंपरिक कारणों को ही चुनौती दे दी.

वायरल वीडियो की पूरी कहानी 

इस वीडियो में लड़की भारत में शादी के कांसेप्ट पर बात करती है कि भारत में लोग या तो इसलिए शादी करते हैं क्योंकि उन्हें अपने मां-बाप का ध्यान रखने के लिए कोई चाहिए होती है या फिर इसलिए क्योंकि पीढ़ी को आगे बढ़ाना होता है. उसने कहा अगर बच्चे ही मकसद हैं,


तो एडॉप्शन एक बेहतर विकल्प है. वहीं माता-पिता की सेवा के लिए प्रोफेशनल केयरटेकर्स उपलब्ध हैं. “तो शादी का क्या मतलब?” – यह सवाल पूछकर उसने समाज के रूढ़िगत मानदंडों पर करारा प्रहार किया.

लड़की का कहना है कि शादी दो लोगों के बीच कंपेनियनशिप के लिए होनी चाहिए न कि किसी और कारण से. उसने भारत में असफल शादी के बारे में बात करते हुए बताया कि कॉर्पोरेट कंपनियों में आधे लोग एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर में हैं, वहीं बिजनेस वाले लोग भी इसमें पीछे नहीं हैं. 

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया   

सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं. कुछ लोग लड़की के विचार के समर्थन में हैं और इसे प्रगतिशील सोच मान रहे हैं. उनका कहना है कि शादी अब मजबूरी नहीं रह गई. आर्थिक स्वतंत्रता और तकनीक ने व्यक्तिगत आजादी को बढ़ावा दिया है. वहीं कुछ लोग इस विचार के विरोध में हैं. विरोध करने वाले लोग इसे परिवार व्यवस्था पर हमला बता रहे हैं. उनका तर्क है कि शादी केवल बच्चों या माता-पिता के लिए नहीं, बल्कि साथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव, विश्वास और सामाजिक स्थिरता के लिए भी होती है.

एडॉप्शन और केयरटेकर्स जैसे विकल्प निश्चित रूप से व्यावहारिक हैं, लेकिन क्या वे शादी के भावनात्मक आयाम को बदल सकते हैं? भारत जैसे समाज में जहां संयुक्त परिवार और विवाह की पवित्रता गहरी जड़ें रखते हैं, यह बहस नई पीढ़ी के मूल्यों को परख रही है। आंकड़े बताते हैं कि तलाक की दरें बढ़ रही हैं, खासकर शहरी क्षेत्रों में।

यह बयान समाज को सोचने पर मजबूर कर रहा है – क्या शादी अब पुरानी परंपरा बन चुकी है, या इसके मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं? बहस जारी है, और यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम सामाजिक बंधन की लड़ाई बनती जा रही है।

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