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IITian chai seller Los Angeles: बिहार के बाढ़ जैसे छोटे से शहर से निकलकर प्रभाकर प्रसाद सात समंदर पार लॉस एंजिल्स में बिहारी चाय बेचने वाला तक का सफर कोई मामूली बात नहीं है. उनकी कहानी बहुत मुश्किल और हिम्मत से भरी हुई है, जिसमें उन्होंने हार नहीं मानी. एक समय था जब उनके पास कड़ाके की ठंड में ओढ़ने के लिए कंबल भी नहीं था, और उनका परिवार दाल की बोरियों में लिपटकर रातें बिताता था.
आज वही प्रभाकर अमेरिका की सड़कों पर ₹780 में चाय बेच रहे हैं. लेकिन यह कहानी सिर्फ पैसे की नहीं है, बल्कि उस आज़ादी की भी है जो उन्होंने मांगी थी, जिसके लिए उन्होंने एक सुरक्षित कॉर्पोरेट करियर छोड़ दिया. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें उनकी बारे में पूरी जानकारी.
वायरल वीडियो से हुए मशहूर
प्रभाकर प्रसाद, जिनका इंटरनेट निकनेम बिहारी चायवाला या चायगाइ है, जनवरी में वेब पर छा गए थे, जब लॉस एंजिल्स में $8 (लगभग Rs 780) में चाय बेचते हुए उनका एक वीडियो सामने आया. बिहार के बाढ़ में जन्मे प्रसाद ने फरवरी 2025 में नौकरी से निकाले जाने के बाद लॉस एंजिल्स में एक चाय की दुकान से शुरुआत की.
ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे से बात करते हुए, प्रसाद ने बिहार में अपनी ज़िंदगी, पैसे की तंगी और एक कॉर्पोरेट नौकरी के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि मैं बाढ़ में पैदा हुआ था, जो गंगा के पास एक छोटा सा शहर है. हम बहुत गरीब थे. परिवार की पैसे की तंगी इतनी थी कि वे कंबल भी नहीं खरीद सकते थे. सर्दियों में, हम गर्मी के लिए दाल की बोरियों के नीचे सोते थे.
पिता को बिजनेस में नहीं मिली सफलता, रातों-रात भोपाल गया पूरा परिवार
प्रसाद ने बताया कि कैसे उनके पिता ने कई बिज़नेस करने की कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. मुश्किलों के बावजूद, उनके माता-पिता ने पढ़ाई पर ज़ोर दिया. लेकिन, उनके भाई के किडनैप होने के बाद उनकी ज़िंदगी में एक बड़ा बदलाव आया. उन्होंने कहा कि रातों-रात, मेरा परिवार बिहार छोड़कर भोपाल चला गया. यह बदलाव मुश्किल था. बिहार बोर्ड स्कूल से इंग्लिश CBSE स्कूल में, मुझे बेसिक शब्द भी समझ नहीं आते थे. बच्चे मेरे एक्सेंट पर हंसते थे. लेकिन मैंने कड़ी मेहनत की, आगे बढ़ा और आखिरकार IIT स्क्रीनिंग एग्जाम पास कर लिया.
IIT जिंदगी का बना टर्निंग पॉइंट
IIT में जाना उनकी ज़िंदगी का एक टर्निंग पॉइंट था. ग्रेजुएशन के बाद, उन्हें 2008 में अपनी पहली नौकरी मिली. लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया ने उन्हें एक्साइट नहीं किया. उन्होंने कहा कि लेकिन कोडिंग ने मुझे कभी एक्साइट नहीं किया – जिम ने किया. मैंने सीरियसली ट्रेनिंग शुरू की, काम से ज़्यादा वहां समय बिताया. बॉडीबिल्डिंग मेरा पैशन बन गया. इसके बाद प्रसाद मुंबई चले गए और मॉडलिंग असाइनमेंट के लिए ऑडिशन देने लगे. असलियत ग्लैमरस नहीं थी, अंधेरी में छोटे फ्लैट, ऑडिशन के लिए लंबी लाइनें, और जो भी काम मिलता, मैं कर लेता था.
विदेश जाने का लिया फैसला
कुछ सालों बाद, उन्होंने विदेश में अपनी किस्मत आज़माने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि मेरी गर्लफ्रेंड US में थी, और हम पहले ही कई साल लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप में बिता चुके थे. मैंने वहां जाने का फैसला किया. मेरा वीज़ा दो बार रिजेक्ट हो गया, लेकिन तीसरी बार मैं आखिरकार 2014 के आसपास अपने MBA के लिए टेक्सास पहुंच गया.
चाय बेचने का ख्याल कैसे आया?
अगले दस सालों में, वह पर्सनल मुश्किलों से जूझते हुए शहरों और नौकरियों के बीच बदलते रहे. उन्होंने कहा कि मैंने कॉर्पोरेट जॉब की, एक से ज़्यादा बार नौकरी से निकाला गया, और एक दर्दनाक ब्रेकअप से गुज़रा. एक समय तो मेरी सेहत भी खराब हो गई. कई दिन ऐसे थे जब मुझे पता ही नहीं था कि ज़िंदगी किस तरफ जा रही है. एक रात, मैंने खुद से पूछा कि ऐसी कौन सी एक चीज़ है जो हमेशा एक जैसी रही है? तभी एक दोस्त ने चाय पीने का सुझाव दिया.
प्रसाद ने आगे कहा कि शहर, दिल टूटना, या नौकरी कोई भी हो मैंने हमेशा अपनी चाय खुद बनाई. यह मुझे घर की याद दिलाती थी. फरवरी 2025 में टेक लेऑफ़ के दौरान अपनी नौकरी खोने के बाद, उन्होंने चाय को बिज़नेस बनाने का फैसला किया. कम पैसे होने पर, उन्होंने लॉस एंजिल्स में इंडियन-स्टाइल चाय बेचना शुरू कर दिया. दाल की बोरियों के नीचे सोने से लेकर US में चाय बेचने तक – मैं CEO नहीं बना, मैं चाय वाला बन गया और आखिरकार मुझे सेटल महसूस हो रहा है.