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भारत का ऐसा अनोखा मेला, जहां पुरुषों की एंट्री है बैन! जानें  इस अजब-गजब उत्सव के बारे में

Jharkahnd Unique Carnival: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले की यहां एक ऐसी जगह है, जहां मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को एक अजब- गजब मेला लगता है, जहां सिर्फ महिलाएं हिस्सा लेती है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-01-17 23:03:13

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Only women Fair in Jharkhand: भारत में विभिन्न प्रकार की संस्कृतियां हैं, जहां हर जगह कुछ अजीबो-गरीब परंपराएं होती रहती है, इसी कड़ी में आज हम बात करने वाले है झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले की यहां एक ऐसी जगह है, जहां मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को एक अजब- गजब मेला लगता है, जहां सिर्फ महिलाएं हिस्सा लेती है. जी हां, सही सुना आपने पुरुष प्रधान के बीच यहां एक ऐसा मेला लगता है, जहां सिर्फ महिलाएं होती है और पुरुषों का इस मेले में आना सख्त मना है. इस मेले में न सिर्फ़ झारखंड बल्कि ओडिशा की महिलाएं भी हिस्सा लेती हैं. यह जगह सरायकेला-खरसावां में खरकाई नदी के बीच में स्थित मिर्गी चिगरा है, जहां पिछले शनिवार को महिलाओं का मेला लगा था.

अलग-अलग जगहों से महिलाएं मेले में लेती है हिस्सा

सरायकेला, खरसावां, राजनगर, जमशेदपुर, सिनी और यहां तक कि पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी महिलाएं इस मेले में आती है. महिलाएं पारंपरिक पिकनिक का आनंद लेती है. वे खरकाई नदी के बीच चट्टानों पर बैठकर अपने पसंदीदा पकवानों का मज़ा लिया. महिलाएं अलग-अलग ग्रुप में आई थीं. कई महिलाएं सुंदर माहौल के बीच खाना बनाते और खाते हुए दिखीं, जबकि कुछ घर का बना खाना लाई थीं.

मेले में बनता है शाकाहारी खाना

मेले में सिर्फ़ शाकाहारी खाना खाया जाता है. यहां मांसाहारी खाना मना है. मेले में ज़्यादातर दुकानदार भी महिलाएं ही होती है. शनिवार को सुबह से शाम तक मिर्गी चिगरा में महिलाएं और बच्चे आते-जाते रहते है. हर साल मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को खरकाई नदी के बीच स्थित मिर्गी चिगरा में महिलाओं का मेला लगता है. महिलाएं अपने बच्चों के साथ पिकनिक के लिए वहां जाती हैं, पूरे दिन मज़े करती हैं और शाम को घर लौट आती हैं.

बाबा गर्भेश्वर की पूजा

शनिवार को मिर्गी चिगरा में बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा-अर्चना की जाती है और अपने परिवारों की खुशी, समृद्धि और भलाई के लिए प्रार्थना करते है. वहाँ आईं महिलाएं सबसे पहले नदी के बीच स्थित बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा करती है. फिर वह मेले का दौरा करती है और पारंपरिक भोजन का आनंद लेती है. बड़ी संख्या में बच्चे भी खरकाई नदी के साफ़ पानी में नहाते है. ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से पूजा करता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

क्या है पौराणिक कथा?

स्थानीय किंवदंती के अनुसार, महाभारत महाकाव्य के पांडव भाई अपने वनवास के दौरान यहां आए थे और आराम किया था. उनके पैरों के निशान आज भी पत्थरों पर दिखाई देते हैं. मेले में पुरुषों का आना मना है. इलाके के बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि इस महिलाओं के मेले में पुरुषों का आना हमेशा से मना रहा है. हालांकि, हाल के दिनों में इस मेले में कुछ पुरुष भी देखे गए हैं. इस बार भी कुछ पुरुष मौजूद थे. फिर भी, महिलाओं की संख्या काफी ज़्यादा थी.

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भारत का ऐसा अनोखा मेला, जहां पुरुषों की एंट्री है बैन! जानें  इस अजब-गजब उत्सव के बारे में

Jharkahnd Unique Carnival: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले की यहां एक ऐसी जगह है, जहां मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को एक अजब- गजब मेला लगता है, जहां सिर्फ महिलाएं हिस्सा लेती है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-01-17 23:03:13

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Only women Fair in Jharkhand: भारत में विभिन्न प्रकार की संस्कृतियां हैं, जहां हर जगह कुछ अजीबो-गरीब परंपराएं होती रहती है, इसी कड़ी में आज हम बात करने वाले है झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले की यहां एक ऐसी जगह है, जहां मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को एक अजब- गजब मेला लगता है, जहां सिर्फ महिलाएं हिस्सा लेती है. जी हां, सही सुना आपने पुरुष प्रधान के बीच यहां एक ऐसा मेला लगता है, जहां सिर्फ महिलाएं होती है और पुरुषों का इस मेले में आना सख्त मना है. इस मेले में न सिर्फ़ झारखंड बल्कि ओडिशा की महिलाएं भी हिस्सा लेती हैं. यह जगह सरायकेला-खरसावां में खरकाई नदी के बीच में स्थित मिर्गी चिगरा है, जहां पिछले शनिवार को महिलाओं का मेला लगा था.

अलग-अलग जगहों से महिलाएं मेले में लेती है हिस्सा

सरायकेला, खरसावां, राजनगर, जमशेदपुर, सिनी और यहां तक कि पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी महिलाएं इस मेले में आती है. महिलाएं पारंपरिक पिकनिक का आनंद लेती है. वे खरकाई नदी के बीच चट्टानों पर बैठकर अपने पसंदीदा पकवानों का मज़ा लिया. महिलाएं अलग-अलग ग्रुप में आई थीं. कई महिलाएं सुंदर माहौल के बीच खाना बनाते और खाते हुए दिखीं, जबकि कुछ घर का बना खाना लाई थीं.

मेले में बनता है शाकाहारी खाना

मेले में सिर्फ़ शाकाहारी खाना खाया जाता है. यहां मांसाहारी खाना मना है. मेले में ज़्यादातर दुकानदार भी महिलाएं ही होती है. शनिवार को सुबह से शाम तक मिर्गी चिगरा में महिलाएं और बच्चे आते-जाते रहते है. हर साल मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को खरकाई नदी के बीच स्थित मिर्गी चिगरा में महिलाओं का मेला लगता है. महिलाएं अपने बच्चों के साथ पिकनिक के लिए वहां जाती हैं, पूरे दिन मज़े करती हैं और शाम को घर लौट आती हैं.

बाबा गर्भेश्वर की पूजा

शनिवार को मिर्गी चिगरा में बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा-अर्चना की जाती है और अपने परिवारों की खुशी, समृद्धि और भलाई के लिए प्रार्थना करते है. वहाँ आईं महिलाएं सबसे पहले नदी के बीच स्थित बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा करती है. फिर वह मेले का दौरा करती है और पारंपरिक भोजन का आनंद लेती है. बड़ी संख्या में बच्चे भी खरकाई नदी के साफ़ पानी में नहाते है. ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से पूजा करता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

क्या है पौराणिक कथा?

स्थानीय किंवदंती के अनुसार, महाभारत महाकाव्य के पांडव भाई अपने वनवास के दौरान यहां आए थे और आराम किया था. उनके पैरों के निशान आज भी पत्थरों पर दिखाई देते हैं. मेले में पुरुषों का आना मना है. इलाके के बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि इस महिलाओं के मेले में पुरुषों का आना हमेशा से मना रहा है. हालांकि, हाल के दिनों में इस मेले में कुछ पुरुष भी देखे गए हैं. इस बार भी कुछ पुरुष मौजूद थे. फिर भी, महिलाओं की संख्या काफी ज़्यादा थी.

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