Mughal Harem Secret: मुगल काल की रानियों और बेगमों की जिंदगी, जितनी शानदार और आलीशान दिखती थी, उतनी ही रहस्यमयी और तनाव से भरी भी थी. दिन भर की मौज-मस्ती, संगीत और खेलों के बीच, जैसे ही शाम होती, हरम में एक अलग तरह की खामोशी और बेचैनी छा जाती थी. कहा जाता है कि सूरज ढलते ही मुगल बेगम बेचैन हो जाती थींजैसे कोई अनजान डर उन्हें जकड़ लेता हो. आइए जानते हैं उस समय उनकी बेचैनी के पीछे असली वजह क्या थी और उनका ‘समाधान’ क्या था.
शाम की खामोशी और बेगमों की बेचैनी
मुगल हरम में सैकड़ों रानियां, बेगम, नौकरानियां और रखैलें रहती थीं. उनके दिन हंसी-मजाक, स्वादिष्ट खाने और सजने-संवरने में बीतते थे. लेकिन जैसे ही सूरज ढलता, हरम में एक अलग ही माहौल हो जाता था,हर बेगम को इस बात की चिंता रहती थी कि उस रात बादशाह किसके कमरे में जाएंगे. इसी सोच से वे बेचैन रहती थीं. अगर बादशाह उनके कमरे में नहीं आते, तो उन्हें कई दिनों तक मौका नहीं मिलता-जिससे उनका असर और अहमियत दोनों कम हो जाती.
शाम का सबसे बड़ा डर
शाम को मुगल बेगमों के लिए सबसे बड़ा तनाव खुद को पूरी तरह से तैयार करके पेश करना था.उस समय बिजली नहीं थी,मशालों और दीयों की रोशनी में तैयार होना एक कला थी.सोने और चांदी के गहनों से सजे कपड़े पहनना इत्र और चंदन के लेप से महकता शरीर,केसर और इत्र से हल्के रंगे होंठ
यह सारी तैयारी इसलिए होती थी ताकि अगर बादशाह अचानक उनके कमरे में आ जाएं, तो वे उनकी नजरों में सबसे खूबसूरत दिखें. यह सजावट सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं थी, बल्कि जीने का एक जरिया थी ,क्योंकि अगर बादशाह नाराज हो जाते, तो इसके नतीजे खतरनाक हो सकते थे.
हरम का अनुशासन और डर की परछाई
इतिहासकारों के अनुसार, हरम में रहने वाली रानियों के लिए यह एक सोने का पिंजरा था ,जहां शाही शानो-शौकत तो थी, लेकिन आजादी नहीं थी.