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ना हाथ, ना पैर, फिर भी अचूक निशाना…, ओडिशा की पायल नाग बनी विश्व की पहली अर्मलेस-लेगलेस आर्चर

Odisha Para Archer Payal Nag: आज हम एक ऐसी लड़की की साहस और सफलता की कहानी की बात करने वाले है, जिसके पास दोनों हाथ -पैर न होते हुए भी उसने तीरंदाजी में महारथ हासिल की.

Written By: Shristi S
Last Updated: January 2, 2026 15:36:39 IST

Payal Nag World First Armless and Legless Archer: ओडिशा की बेटी पायल नाग ने मात्र 17 साल की आयु में बिना हाथ-पैर वाली तीरंदाजी में इतिहास रच दिया. बलांगीर की इस लड़की ने खेल में एक ऐसी सफलता की कहानी लिखी है, जिससे पायल दुनिया की पहली लड़की बन गई जिसने बिना हाथ-पैर के तीरंदाजी के तौर पर अपना नाम दर्ज करवाया. उसकी हालिया उपलब्धि में नेशनल पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल शामिल हैं, जिससे उसने ओडिशा का नाम रोशन किया है और खुद को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है. वह हर बार जो निशाना लगाती है, वह प्रतीकात्मक रूप से किस्मत को चुनौती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था. लेकिन पायल नाग जन्म से ही बिना हाथ-पैर की नहीं थी. ऐसे में चलिए जानें कि उनके साथ ऐसा क्या हुआ था जिससे उनकी हालत ऐसी हो गई, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. 

पायल के हाथ-पैर कैसे छीन गए?

यह 6 अप्रैल, 2015 का दिन था जब पायल की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई. खेलते समय 11,000-वोल्ट की बिजली की लाइन के संपर्क में आने से, पांच साल की बच्ची को ऐसा झटका लगा जिसने उसके दोनों हाथ और पैर छीन लिए. बचपन में, उसकी देखभाल उसकी दादी यमुना बहल बलांगीर ज़िले के मुरीबहाल ब्लॉक के एक गांव में करती थीं, क्योंकि गरीबी के कारण उसके माता-पिता, जो पेशे से बढ़ई थे, छत्तीसगढ़ के रायपुर में रोज़ी-रोटी कमाने चले गए थे. लेकिन जब यमुना का निधन हो गया, तो पायल बिल्कुल अकेली रह गई. जब उसे अकेला छोड़ने का डर सताने लगा, तो बलांगीर प्रशासन ने दखल दिया.

जिला प्रशासन ने पायल को बचाया

ज़िला प्रशासन ने पायल को बचाया, उसकी शिक्षा और पार्वती गिरि आश्रम में रहने का इंतज़ाम किया. वहां, वह फिर से स्कूल जाने लगी और धीरे-धीरे खुद को भी समझने लगी. शेल्टर के शिक्षकों और अधिकारियों ने उसमें एक दुर्लभ, बेचैन रचनात्मकता देखी. क्योंकि उसके हाथ-पैर नहीं थे, इसलिए वह रंगीन पेंसिल से मुंह से जटिल चित्र बनाती थी, जिससे उसके आस-पास के सभी लोग हैरान रह जाते थे.

कला शिक्षक दिलीप सिंह देव के मार्गदर्शन में, पायल ने अपने कौशल को निखारा और तत्कालीन जल संसाधन सचिव और अब ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग का एक बेदाग चित्र बनाया. राज्य सरकार ने उसके काम की तारीफ़ की, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उसे रोबोटिक हाथ दिलाने में मदद के लिए 9 लाख रुपये का अनुदान मंज़ूर किया. हालांकि, यह कोशिश सफल नहीं हुई. लेकिन पायल ने हार नहीं मानी, उसकी क्षमताओं को देखते हुए, 2022 में, प्रशासन ने उसे सीधे प्रशासनिक देखरेख में पेशेवर तीरंदाजी प्रशिक्षण के लिए जम्मू भेजने का फैसला किया. वहीं पर पायल को अपनी मंज़िल मिली. तीरंदाजी, जिसमें बैलेंस, फोकस और कोर स्ट्रेंथ की ज़रूरत होती है, उसकी ज़िंदगी बन गई और वह आज़ादी पाने के लिए इस खेल में बेहतरीन प्रदर्शन करना चाहती थी.

पायल ने कहां से ट्रेनिंग ली?

आज, पायल कटरा में SMVDSB स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के अंदर स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) तीरंदाजी अकादमी में ट्रेनिंग ले रही है, और उसे देश के कुछ सबसे अनुभवी तीरंदाज कोचिंग दे रहे हैं. वह रोज़ाना लगभग 11 घंटे प्रैक्टिस करती है, अपने शरीर और दिमाग को आम सीमाओं से कहीं आगे ले जाती है. उसने हाल ही में जयपुर में हुई 6वीं नेशनल पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में बिना हाथों के पेरिस 2024 पैरालंपिक में भारत का पहला मेडल जीतने वाली शीतल देवी को हराकर खिताब जीता.

पायल मुस्कुराते हुए कहती है कि क्योंकि मेरे हाथ-पैर नहीं हैं, इसलिए मैंने जो कुछ भी किया वह एक चुनौती थी. लेकिन मैं यह साबित करना चाहती थी कि मेरी विकलांगता मुझे हिम्मत देती है. मैंने इसे अपनी ताकत बनाने का फैसला किया. वह अपनी सफलता का श्रेय कोच कुलदीप वेदवान को देती है, जो पिछले दो सालों से एक खास डिवाइस की मदद से उसे ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिसे उन्होंने पायल के लिए कस्टम-मेड बनवाया है.

वह फोन पर कहते हैं कि उसका प्रदर्शन हर दिन बेहतर हो रहा है. वह पहले ही नेशनल लेवल के टॉप खिलाड़ियों को पीछे छोड़ चुकी है. हाल ही में, दुबई में यूथ एशियन गेम्स में उसका प्रदर्शन शानदार था. उसमें पैरालंपिक और एशियन गेम्स में भारत के लिए मेडल जीतने की क्षमता है.

बलांगीर जिला खेल अधिकारी पराशर बाग ने पैरा तीरंदाज की खूब तारीफ की. बाग कहते हैं कि मुंह से तस्वीरें बनाने से लेकर नेशनल गोल्ड मेडल जीतने तक, पायल का सफर असाधारण रहा है. जिला प्रशासन, राज्य सरकार और सीनियर अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के मिशन में साथ दिया कि उसे ट्रेनिंग और सपोर्ट मिले. आज, वह इस बात का प्रतीक है कि समावेशी खेल विकास क्या हासिल कर सकता है.

पायल के लिए आगे का लक्ष्य साफ है. पायल कहती है कि मेरा लक्ष्य एशियन गेम्स और पैरालंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है, जैसा कि वह तीर चलाने का तरीका दिखाती है. अगर इरादा पक्का हो तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है. मुझे पता है कि मैं कामयाब होऊंगी, पायल कहती है, जो फिलहाल थाईलैंड में वर्ल्ड रैंकिंग टूर्नामेंट की तैयारी कर रही है. उसका लक्ष्य 2026 टोक्यो पैरा एशियन गेम्स और 2028 पैरालंपिक है.

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