Cannon Firing License: मध्य प्रदेश के रायसेन से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां कलेक्टर कार्यालय ने रमज़ान के दौरान किले के अंदर पारंपरिक रूप से तोप चलाने की अनुमति दी है. बताया जा रहा है कि रोजा खोलने और सहरी के समय संकेत देने के लिए यह इजाजत दी गई है. स्वतंत्र भारत में तोप जैसे भारी हथियार के इस्तेमाल की अनुमति मिलना बेहद दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि आम नागरिकों को बंदूक का लाइसेंस लेना भी काफी मुश्किल होता है. ऐसे में रायसेन प्रशासन का यह आदेश चर्चा का विषय बन गया है.
राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो ने एक्स पर किया पोस्ट
राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इसकी जानकारी दी. NCIB ने एक्स पर लिखा कि ‘स्वतंत्र भारत में पहली बार, जारी हुआ तोप चलाने का लाइसेंस. कुछ दिन पहले ईरान के समर्थन में दागी गई तोप को मध्यप्रदेश के रायसेन कलेक्टर कार्यालय द्वारा आदेश जारी करके रमज़ान के अवसर पर किले के अंदर चलाने की अनुमति दी गई है. इस आदेश के अनुसार रोजा खोलने और सहरी के समय संकेत देने के लिए पारंपरिक रूप से तोप चलाने की इजाज़त दी गई है. विदित हो कि भारत में आम नागरिकों को बंदूक का लाइसेंस ही बड़ी मुश्किल से मिलता है लेकिन तोप जैसे भारी हथियार का लाइसेंस लगभग असंभव माना जाता है. इसलिए यह आदेश एक बेहद दुर्लभ और अनोखा उदाहरण बन गया है.’
स्वतंत्र भारत में पहली बार,
जारी हुआ तोप चलाने का लाइसेंस।कुछ दिन पहले ईरान के समर्थन में दागी गई तोप को मध्यप्रदेश के रायसेन कलेक्टर कार्यालय द्वारा आदेश जारी करके रमज़ान के अवसर पर किले के अंदर चलाने की अनुमति दी गई है। इस आदेश के अनुसार रोज़ा खोलने और सहरी के समय संकेत देने… pic.twitter.com/xkOtVQHmXJ
— NCIB Headquarters (@NCIBHQ) March 12, 2026
तोप चलाने पर मचा बवाल
कुछ दिन पहले ही रायसेन में ऐतिहासिक किले की प्राचीर से रमजान के दौरान पारंपरिक तोप दागे जाने पर विवाद हो गया. तोप दागे जाने के दौरान कुछ मुस्लिम युवकों ने ईरान के समर्थन में नारे लगाए. तोप दागे जाने का एक वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ, जिससे हिंदू संगठनों में हंगामा मच गया. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस घटना पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की.