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3 फीट थी हाइट, 5 लाख में सर्कस वाले खरीदने को थे तैयार, भावुक कर देगी डॉ. गणेश बरैया की कहानी!

मात्र 3 फीट लंबाई और 72% लोकोमोटर डिसेबिलिटी के बावजूद डॉ. गणेश बरैया ने एमबीबीएस पूरा कर चिकित्सा अधिकारी बनने का सपना साकार किया. आज डॉ. गणेश बरैया चिकित्सा जगत के जाने-माने नाम हैं और लोगों का इलाज कर जनसेवा कर रहे हैं.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: 2026-03-17 16:26:48

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अगर मन में जज्बा हो और कुछ बड़ा करने की इच्छाशक्ति हो तो कोई भी बाधा इतनी बड़ी नहीं, जिसे पार न किया जा सके. ऐसी ही कुछ कहानी है डॉ. गणेश बरैया की.

मात्र 3 फीट लंबाई और 72% लोकोमोटर डिसेबिलिटी के बावजूद उन्होंने एमबीबीएस पूरा कर चिकित्सा अधिकारी बनने का सपना साकार किया. आज डॉ. गणेश बरैया चिकित्सा जगत के जाने-माने नाम हैं और लोगों का इलाज कर जनसेवा कर रहे हैं. 

संघर्ष भरी शुरुआत

भावनगर जिले के गोरखी गांव के रहने वाले गणेश बरैया का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ. बचपन से उनकी कम हाइट (3 फीट) और कम वजन (लगभग 20 किलो) ने कई चुनौतियां खड़ी कीं. सर्कस मालिकों ने उन्हें 5 लाख रुपये में ‘खरीदने’ की कोशिश की, लेकिन परिवार ने इनकार कर दिया. गांव के स्कूल से पढ़ाई शुरू की और 2018 में NEET UG परीक्षा पास की.

कानूनी जंग और सुप्रीम कोर्ट की जीत

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए MBBS एडमिशन से इनकार कर दिया, दावा किया कि वो इमरजेंसी केस नहीं संभाल पाएंगे. गणेश ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हार गए. हार न मानते हुए वो सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां 2019 में उन्हें न्याय मिला और भावनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला.

पढ़ाई और इंटर्नशिप की चुनौतियां

2019 से 2024 तक उन्होंने MBBS पूरा किया. प्रैक्टिकल्स, लैब वर्क और मरीजों की जांच सामान्य कद के लिए डिजाइन होने से उन्हें शुरुआत में थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन सहपाठियों और शिक्षकों ने उनका साथ दिया. सरकारी मेडिकल कॉलेज में उन्होंने इंटर्नशिप की. शुरू में कुछ मरीजों ने इलाज से इनकार किया, लेकिन बाद में लोगों को उन पर भरोसा होने लगा. नवंबर 2025 में भावनगर के सर तख्तासिंह जी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मेडिकल ऑफिसर के रूप में पहली पोस्टिंग मिली. 25 साल की उम्र में वे लोगों को चिकित्सा सेवा दे रहे हैं. डॉ. गणेश कहते हैं, “आत्मविश्वास रखें, लक्ष्य पर डटें. मेरे शिक्षक भगवान कृष्ण जैसे थे, जिन्होंने रास्ता दिखाया.”

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Last Updated: 2026-03-17 16:26:48

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अगर मन में जज्बा हो और कुछ बड़ा करने की इच्छाशक्ति हो तो कोई भी बाधा इतनी बड़ी नहीं, जिसे पार न किया जा सके. ऐसी ही कुछ कहानी है डॉ. गणेश बरैया की.

मात्र 3 फीट लंबाई और 72% लोकोमोटर डिसेबिलिटी के बावजूद उन्होंने एमबीबीएस पूरा कर चिकित्सा अधिकारी बनने का सपना साकार किया. आज डॉ. गणेश बरैया चिकित्सा जगत के जाने-माने नाम हैं और लोगों का इलाज कर जनसेवा कर रहे हैं. 

संघर्ष भरी शुरुआत

भावनगर जिले के गोरखी गांव के रहने वाले गणेश बरैया का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ. बचपन से उनकी कम हाइट (3 फीट) और कम वजन (लगभग 20 किलो) ने कई चुनौतियां खड़ी कीं. सर्कस मालिकों ने उन्हें 5 लाख रुपये में ‘खरीदने’ की कोशिश की, लेकिन परिवार ने इनकार कर दिया. गांव के स्कूल से पढ़ाई शुरू की और 2018 में NEET UG परीक्षा पास की.

कानूनी जंग और सुप्रीम कोर्ट की जीत

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए MBBS एडमिशन से इनकार कर दिया, दावा किया कि वो इमरजेंसी केस नहीं संभाल पाएंगे. गणेश ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हार गए. हार न मानते हुए वो सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां 2019 में उन्हें न्याय मिला और भावनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला.

पढ़ाई और इंटर्नशिप की चुनौतियां

2019 से 2024 तक उन्होंने MBBS पूरा किया. प्रैक्टिकल्स, लैब वर्क और मरीजों की जांच सामान्य कद के लिए डिजाइन होने से उन्हें शुरुआत में थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन सहपाठियों और शिक्षकों ने उनका साथ दिया. सरकारी मेडिकल कॉलेज में उन्होंने इंटर्नशिप की. शुरू में कुछ मरीजों ने इलाज से इनकार किया, लेकिन बाद में लोगों को उन पर भरोसा होने लगा. नवंबर 2025 में भावनगर के सर तख्तासिंह जी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मेडिकल ऑफिसर के रूप में पहली पोस्टिंग मिली. 25 साल की उम्र में वे लोगों को चिकित्सा सेवा दे रहे हैं. डॉ. गणेश कहते हैं, “आत्मविश्वास रखें, लक्ष्य पर डटें. मेरे शिक्षक भगवान कृष्ण जैसे थे, जिन्होंने रास्ता दिखाया.”

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