पुणे में एक टेक इंजीनियर वनेश माली का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. उन्होंने अपने हालिया एक्स (पहले ट्विटर) पोस्ट पर बताया कि उन्होंने 47 लाख रुपये सालाना का शानदार जॉब ऑफर ठुकरा दिया.
यह अपने आप में एक असामान्य फैसला माना जा रहा है, क्योंकि आज के दौर में लाखों युवा बड़ी सैलरी और बड़ी कंपनी के नाम पर नौकरी ढूंढते हैं और ऑफर आते ही तुरंत एक्सेप्ट कर लेते हैं. लेकिन इस टेकी ने अलग मार्ग चुना और सोशल मीडिया पर अपनी ईमानदारी और आत्म‑जागरूकता के कारण चर्चा का केंद्र बन गया.
ठुकराया 47 लाख रु. पैकेज का ऑफर
इस टेक प्रोफेशनल का नाम वनेश माली है और उन्हें पुणे में एक सीनियर टेक रोल के लिए 47 लाख रुपये सालाना (LPA) का ऑफर मिला था. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “कंपनी अच्छी थी, पैकेज भी शानदार था और लगता था कि जॉब बिलकुल सही फिट बैठती है. लेकिन ऑफर एक्सेप्ट करने से पहले उन्होंने खुद से सवाल पूछा कि क्या वे वाकई उस भूमिका की जिम्मेदारियों को पूरी तरह हैंडल कर सकते हैं. जब उन्हें लगा कि उस रोल के लिए जरूरी स्किल्स अभी उनके पास पूरी तरह मजबूत नहीं हैं, तो उन्होंने जान‑बूझकर ऑफर रिजेक्ट कर दिया और साफ कहा कि वे अभी उस लेवल पर डिलीवर करने के लिए तैयार नहीं हैं.”
वनेश का मानना है कि ज़्यादा सैलरी का मतलब ज़्यादा एक्सपेक्टेशन भी होता है. उन्होंने बताया कि उस रोल में परफॉर्म करने पर दबाव काफी ज़्यादा होता और अगर वे उस दबाव में अपेक्षित तरीके से डिलीवर न कर पाते, तो यह न सिर्फ उनका करियर बल्कि कंपनी के लिए भी रिस्क बन सकता था. इसलिए उन्होंने इसे एक ईमानदार और ज़िम्मेदार फैसला मानते हुए ऑफर ठुकरा दिया. बाद में जब लोगों ने इंटरनेट पर उनसे पूछा कि फिर इंटरव्यू कैसे क्लियर किया, तो उन्होंने जवाब दिया कि इंटरव्यू में बेसिक सवाल पूछे गए थे, लेकिन रोल की जिम्मेदारियों के मुकाबले गहन और अपग्रेडेड स्किल अभी उनके पास नहीं थी.
Career Update:
I recently got a fantastic job offer of Rs. 47 LPA in Pune for a senior role.The package was good and the company was great, but the position demanded skills I don’t fully possess yet.
I politely rejected the offer, explaining that I am not ready to deliver at…
— Vanesh Mali (@vaneshmali) March 20, 2026
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंटी हुई है. कुछ यूजर्स ने उस इंजीनियर की तारीफ की और उसे “आत्म‑सम्मान” और “ईमानदारी” का उदाहरण बताया, क्योंकि वह अपनी क्षमता और योग्यता को अच्छी तरह जानता था. वहीं कुछ लोगों का मानना था कि यह फैसला गलत था और उन्हें जॉब लेनी चाहिए थी, काम करते‑करते स्किल भी आ जातीं और ट्रायल पीरियड में अपने आप एडजस्ट हो जाता.