एक पढ़े-लिखे युवक की कहानी ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. गणित में ग्रेजुएशन, एमएससी और बीएड जैसी उच्च डिग्रियां होने के बावजूद वह सरकारी नौकरी न मिलने पर गुजारा चलाने के लिए रैपिडो बाइक चलाने को मजबूर है.
एक्स (पूर्व ट्विटर) यूजर साक्षी ने इस घटना को शेयर किया, जिसने भारत में रोजगार बाजार की कड़वी सच्चाई पर बहस छेड़ दी. नौकरी न मिलने के कारण बहुत सारे युवा गिग वर्कर बनने को मजबूर हैं.
क्या है पूरा मामला?
साक्षी ने अपने एक्स पोस्ट पर बताया कि उन्होंने ऑफिस से घर लौटते समय रैपिडो बुक किया. राइडर ने बातचीत शुरू की और उनसे पूछा कि क्या वो उन्हें किसी नौकरी के लिए रेफर कर सकती हैं. जब उन्होंने रैपिडो वाले से उनकी शिक्षा के बारे में पूछा तो साक्षी हैरान रह गईं. रैपिडो ड्राइवर ने बताया कि उसके पास मैथमेटिक्स में बैचलर, मास्टर डिग्री और बीएड की भी डिग्री है. उसने 5-6 साल सरकारी टीचिंग एग्जाम की तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली. अब वह रोजी-रोटी के लिए रैपिडो चलाते हैं. साक्षी ने लिखा, “सब कुछ सही करने के बाद भी स्टेबल जॉब न मिलना क्या दर्शाता है?”
Few days ago, I booked rapido after getting back from work. Out of nowhere, he asked what I do for work. When I told him that I have a job, he said he was looking for any kind of work just to meet his daily needs. He asked if I could refer to him somewhere. For this purpose, I… pic.twitter.com/oN4EWVH3rS
— Sakshi (@333maheshwariii) February 19, 2026
सोशल मीडिया पर लोगों का रिएक्शन
यह वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हो गई. कई यूजर्स ने इस पर बेरोजगारी से जुड़े अपने-अपने अनुभव शेयर किए, जहां पीजी और प्रतियोगी परीक्षाओं के बाद भी कमाने के लिए गिग इकॉनमी (रैपिडो, उबर जैसी) पर निर्भर होना पड़ रहा है. एक यूजर ने लिखा, “लाइफ अनफेयर है.” इस पोस्ट पर हजारों लाइक्स-रिट्वीट्स आए. लोग ने कमेंट में और रीट्वीट कैप्शन में कई सवाल उठाये; जैसे, क्या डिग्री ही काफी है? स्किल डेवलपमेंट और वोकेशनल ट्रेनिंग क्यों नजरअंदाज हो रही है? सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए?