5 Lakh Saving Viral Video: फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर प्रिया यादव के एक वीडियो ने इंटरनेट पर डिबेट छेड़ दिया है. प्रिया यादव ने एक वीडियो में कहा कि अगर आपके पास 5 लाख रुपये की सेविंग्स नहीं हैं, तो शॉपिंग, छुट्टियां, डेटिंग, कॉफी या नेटफ्लिक्स जैसी चीजों पर खर्च न करें.
उनकी इस सलाह ने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है. जहां कुछ लोग इसे सख्त लेकिन सही मान रहे हैं, तो वहीं कई इसे जीवन से खुशी छीनने वाला बता रहे हैं.
प्रिया यादव की सलाह
प्रिया ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो में सीधे कहा, “अगर आपके बैंक अकाउंट में अभी 5 लाख रुपये सेव नहीं हैं, तो आपको ये सब नहीं करना चाहिए: शॉपिंग नहीं, वेकेशन नहीं, डेटिंग नहीं, रोज कॉफी नहीं खरीदनी, नेटफ्लिक्स जैसी चीजें नहीं देखनी.” उनका तर्क है कि कम्फर्ट अनुशासन के बाद आता है. उन्होंने कहा कि 2026 में फ्री एजुकेशन, साइड हसल आइडियाज और ग्लोबल इनकम के जितने आसान मौके हैं, इतने आसान कभी नहीं थे, इसलिए “पैसे कैसे कमाऊं” का बहाना मत बनाओ.
वे मानती हैं कि हर किसी की स्ट्रगल्स और ट्रॉमा हैं, लेकिन हीलिंग को बहाना नहीं बनाना चाहिए. उन्होंने कहा, “फ्रीडम चाहिए तो रिस्पॉन्सिबिलिटी लो. अगर 5 लाख सेविंग्स नहीं हैं, तो लाइफ को रोमांटिसाइज मत करो. डिस्ट्रैक्शन्स काटो, स्किल्स बनाओ, इनकम बढ़ाओ, सेविंग करो और लगातार इन्वेस्ट करो.”
लोगों की प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो 22 फरवरी को पोस्ट हुआ और अब तक लाखों व्यूज पा चुका है. वीडियो को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है. आलोचकों का कहना है, “ये गलत सलाह है. ट्रिप्स पर जाओ, दोस्तों से मिलो. पैसा आता-जाता रहता है, लेकिन यूथ टाइम वापस नहीं आएगा.” एक यूजर ने जॉब मार्केट की कठिनाई बताई: “एजुकेटेड लोग एंट्री लेवल जॉब्स के लिए महीनों भटकते हैं. सैलरी से किराया भी मुश्किल से निकलता है.” वहीं दूसरे यूजर ने कहा, “कम्फर्ट वॉर्डरोब बनाओ, घर पर कॉफी बनाओ, लेकिन खुशी मत छोड़ो. कल आखिरी दिन हो सकता है.” कुछ ने तंज कसा, “5 लाख ही क्यों, 10 लाख बचाओ तो खाना भी मत खाओ?”
वहीं समर्थक इसे रियलिटी चेक मानते हैं. वीडियो के समर्थन में एक यूजर ने लिखा, “करियर की शुरुआत में मैंने ऐसा ही किया. शुरुआती बलिदान से ही सक्सेस मिलती है. सेविंग्स बढ़ने पर कॉन्फिडेंस और पीस ऑफ माइंड आता है.” दूसरे यूजर ने लिखा, “इमरजेंसी फंड न होने तक ये प्रायोरिटी होनी चाहिए.” प्रिया की सलाह डिसिप्लिन और अकाउंटेबिलिटी पर जोर देती है, जो फाइनेंशियल फ्रीडम की कुंजी है.