Viral Video: ट्रैवल व्लॉगर दीपक सामल के एक वायरल वीडियो ने भारत में नागरिक ज़िम्मेदारी और पेरेंटिंग पर बातचीत शुरू कर दी है. उन्होंने ट्रेन में अपने बेटे के चिप्स गिराने की एक छोटी सी घटना को एक सीख के तौर पर इस्तेमाल किया. खुद गंदगी साफ करने या ट्रेन स्टाफ़ पर निर्भर रहने के बजाय, सामल ने अपने बच्चे को चिप्स उठाने के लिए गाइड किया. इस बात पर जोर देते हुए कि नागरिक भावना रोज़ाना के कामों और पब्लिक जगहों के लिए मिलकर ज़िम्मेदारी उठाने से बनती है.
यह घटना तब हुई जब सामल अपने दो साल के बेटे के साथ ट्रेन से सफर कर रहे थे. खेल-खेल में बच्चे ने फर्श पर चिप्स बिखेर दिए. उसे पता नहीं था कि ऐसी गंदगी पीछे नहीं छोड़नी चाहिए. सामल ने साथ वाले वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा क एक पल के लिए मेरे पास एक आसान ऑप्शन था कि मैं चुपचाप इसे खुद साफ कर सकता था. इसमें बस कुछ सेकंड लगते और कोई ध्यान नहीं, कोई परेशानी नहीं. लेकिन मैं रुक गया क्योंकि कभी-कभी सुविधा सबक चुरा लेती है.
बच्चे को दी सीख
उन्होंने अपने बेटे से पूछा कि फर्श पर फेंकी गई चीजों को कौन साफ करेगा. छोटे बेटे की तरफ से शक भरी नजर मिलने के बाद सामल ने धीरे से बच्चे को सिखाया कि ऐसी स्थिति में कैसे रिएक्ट करना है. मैंने समझाया कि यह हमारा घर नहीं है, लेकिन यह हमारी जगह है. यह ट्रेन सबकी है. जब हम गंदगी करते हैं, तो किसी और को इसे साफ करना पड़ता है. वहां सन्नाटा छा गया और फिर धीरे-धीरे वह नीचे झुका और चिप्स उठा लिए. अब वायरल हो रही क्लिप में सामल का बेटा धीरे-धीरे चिप्स उठाकर ट्रे पर ढेर लगाता हुआ दिख रहा है, जबकि वह बच्चे को गाइड कर रहा है.
प्यार से दिया सबक
सामल ने कहा कि कोई डांट नहीं, कोई गुस्सा नहीं. बस समझने का एक पल और उस छोटे से काम में एक बड़ा सबक मिला. सफाई इंस्ट्रक्शन से नहीं सिखाई जाती. सिविक सेंस नारों से नहीं बनता. यह रोजमर्रा के पलों में बनता है. इंडियन रेलवे से रोज लाखों लोग सफर करते हैं. ट्रेनों को साफ रखना सिर्फ़ स्टाफ़ का फर्ज नहीं है, यह सबकी ज़िम्मेदारी है. पिछले अपडेट तक, वीडियो को 1.5 मिलियन से ज़्यादा व्यूज़ और हज़ारों कमेंट्स मिल चुके थे क्योंकि सोशल मीडिया यूज़र्स ने सामल के अपने बेटे में सिविक सेंस डालने के लिए मज़बूत पेरेंटिंग स्टाइल की तारीफ़ की थी.
यूजर्स ने की सराहना
बहुत बढ़िया काम! एक यूज़र ने कहा कि आपके लिए यह दर्दनाक होगा, लेकिन इसी तरह आप भविष्य बनाते हैं. जबकि दूसरे ने कहा कि इस तरह की पेरेंटिंग पर गर्व है. सभी को इससे कुछ सीखना चाहिए. तीसरे ने कमेंट किया कि किसी व्यक्ति को यह सिखाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आपका कचरा, आपकी ज़िम्मेदारी है. ज्यादातर भारतीयों में यह बेसिक समझ नहीं है. एक पेरेंट के तौर पर अच्छा काम कर रहे हैं. चौथे ने कहा कि हमें इसी तरह की पेरेंटिंग की जरूरत है. सच में आपने अपने बच्चे को यह सिखाने का बहुत अच्छा काम किया कि उनकी गड़बड़ी के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है.