लोग वजन घटाने और परफेक्ट फिगर पाने के लिए क्या-क्या नहीं करते. चीन में वजन घटाने के लिए एक ऐसा ही चलन सामने आया है. चीन में युवाओं के बीच ‘प्लास्टिक ईटिंग डाइट’ या ‘क्लिंग रैप डाइट’ नाम का खतरनाक ट्रेंड वायरल हो रहा है. इसमें लोग प्लास्टिक रैपर या क्लिंग फिल्म मुंह में रखकर खाना चबाते हैं और फिर थूक देते हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टिकटॉक पर इसके वीडियो तेजी से शेयर हो रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे स्वास्थ्य के लिए घातक बता रहे हैं. यह ट्रेंड वजन घटाने के नाम पर भ्रामक है.
प्लास्टिक खाने का कॉन्सेप्ट
दरअसल इस ट्रेंड का कॉन्सेप्ट ब्रेन को चकमा देने का है. लोग प्लास्टिक के बीच खाना रखकर चबाते हैं उसके बाद थूक देते हैं. चबाने से स्वाद और बनावट का अहसास होता है, जिससे पेट भरा लगता है, लेकिन पेट में कैलोरी नहीं जाती. जानकारों के अनुसार यह क्रेविंग्स को कंट्रोल करने का दावा करता है, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपलोड एक वीडियो में दिखाया गया कि युवा प्लास्टिक बैग मुंह पर लगाकर खाना चबा रहे हैं.
En China se puso de moda ponerse un plástico en la boca a la hora de comer…
¿Sabés por qué?
Mirá el vídeo …
¿Creés que esté método es efectivo? pic.twitter.com/NLTqhPylbG— La China (@ChinaNipona) February 17, 2026
प्लास्टिक चबाने के शारीरिक नुकसान
नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ की स्टडी के मुताबिक, माइक्रोप्लास्टिक्स शरीर में कई समस्याएं पैदा करते हैं, जैसे:
- पाचन तंत्र को नुकसान: प्लास्टिक कण पेट को इरिटेट करते हैं, जिससे सूजन, दर्द, ब्लोटिंग या उल्टी हो सकती है.
- श्वसन समस्याएं: मुंह के पास प्लास्टिक लाने से सांस लेते समय प्लास्टिक के कण अंदर घुस सकते हैं, जिससे खांसी, सांस फूलने या थकान की समस्या पैदा हो सकती है.
- हार्मोनल असंतुलन: प्लास्टिक में मौजूद BPA जैसे केमिकल्स मेटाबॉलिज्म बिगाड़ते हैं, बांझपन और विकास संबंधी दिक्कतें ला सकते हैं.
- इम्यून सिस्टम पर प्रभाव: लंबे समय तक प्लास्टिक का खाने में इस्तेमाल करने से इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है.
भले ही खाना थूक दिया जाए, छोटे प्लास्टिक कण मुंह से शरीर में पहुंच सकते हैं. एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सोशल मीडिया चैलेंज ट्राई करने से पहले सोचें. हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज और डॉक्टर की सलाह ही सच्चा वजन घटाने का रास्ता है. यह ट्रेंड युवाओं को गुमराह कर रहा है, लेकिन जागरूकता से ही इसे रोका जा सकता है.