Republic Day 2026 Special: मदर इंडिया से लेकर हक़ तक: भारतीय सिनेमा की वो 7 फिल्में जिन्होंने औरतों को दबना नहीं, लड़ना सिखाया!
Women centric Bollywood movies: भारतीय सिनेमा में जब महिलाओं ने चुप रहने से इनकार किया, तब कहानियाँ इतिहास बन गईं. कभी एक मां ताक़त बनी, कभी एक लड़की बनी आवाज़, कभी एक पत्नी ने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी. इन फिल्मों ने हक़, सम्मान और साहस की नई परिभाषा गढ़ी. आइए जानें ऐसी 7 दमदार फिल्मों के बारे में.
मदर इंडिया (1957) – नरगिस
यह फिल्म एक मां के संघर्ष और आत्मसम्मान की मिसाल है जो हर हाल में झुकती नहीं. वह अन्याय के सामने डटकर खड़ी होकर सही रास्ता चुनती है.
दामिनी (1993) – मीनाक्षी शेषाद्रि
दामिनी सच और न्याय के लिए अकेली पूरी व्यवस्था से टकराती है. उसकी हिम्मत लाखों महिलाओं को आवाज़ उठाने की ताकत देती है.
पिंक (2016) – तापसी पन्नू
यह फिल्म महिला की सहमति और सम्मान के अधिकार को मजबूती से दिखाती है. यह सिखाती है कि “ना” कहना भी एक हक़ है.
थप्पड़ (2020) – तापसी पन्नू
एक छोटी सी हिंसा महिला के आत्मसम्मान की बड़ी लड़ाई बन जाती है. यह फिल्म बराबरी और इज़्ज़त का महत्व समझाती है.
क्वीन (2014) – कंगना रनौत
यह एक लड़की की आत्मनिर्भर बनने की यात्रा है जहाँ वह खुद को प्राथमिकता देती है. फिल्म महिला की आज़ादी और आत्मसम्मान को खूबसूरती से दिखाती है.
छपाक (2020) – दीपिका पादुकोण
यह एसिड अटैक सर्वाइवर की हिम्मत और न्याय की लड़ाई की कहानी है. यह समाज को संवेदनशीलता और साहस का संदेश देती है.
हक़ (Haq)
यह कहानी एक औरत के अपने अधिकार और पहचान के लिए संघर्ष को दर्शाती है. यह बताती है कि चुप रहना नहीं, लड़ना ही बदलाव लाता है.