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ADHD आलस नहीं है! डॉक्टर सिद्धांत भार्गव ने बताया फोकस की कमी का असली सच

आजकल फोकस की कमी को अक्सर आलस या डिसिप्लिन की कमी मान लिया जाता है, लेकिन डॉक्टर सिद्धांत भार्गव ने अपनी लेटेस्ट ADHD रील में इस सोच को गलत बताया है. उनके मुताबिक ADHD कोई आदत या बहाना नहीं, बल्कि दिमाग के काम करने का अलग तरीका है.डॉ. भार्गव ने यह भी बताया कि कैसे छोटे-छोटे लाइफस्टाइल बदलाव फोकस, इमोशनल बैलेंस और क्रिएटिविटी को बेहतर बना सकते हैं. उन्होंने आलिया भट्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यस्त शेड्यूल के बावजूद सही आदतें अपनाकर संतुलन बनाए रखा जा सकता है.

  

Last Updated: December 31, 2025 | 3:49 PM IST
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ADHD  कैसा महसूस होता है?

डॉ. सिद्धांत के अनुसार ADHD सिर्फ ध्यान भटकने तक सीमित नहीं है. इसमें दिमाग लगातार दौड़ता रहता है, मोटिवेशन कभी ज्यादा तो कभी कम हो जाता है और रोजमर्रा की रूटीन संभालना मुश्किल लगता है. ADHD कोई पसंद या गलती नहीं है, बल्कि दिमाग की अलग वायरिंग है.

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लाइफस्टाइल क्यों है इतना जरूरी?

ADHD वाले दिमाग को रूटीन की जरूरत होती है. नींद, पानी पीने की आदत और सही समय पर खाना सीधे फोकस और एनर्जी को प्रभावित करते हैं. अचानक बदलाव और बिखरी दिनचर्या बेचैनी बढ़ा सकती है. परफेक्शन नहीं, बल्कि आसान और दोहराई जा सकने वाली आदतें ज़्यादा फायदेमंद होती हैं.

how  diet  affects  adhd - Photo Gallery
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डाइट का ADHD पर असर

डॉ. भार्गव बताते हैं कि ADHD में ब्लड शुगर का संतुलन बहुत अहम होता है. अनियमित खाना या ज्यादा मीठा खाने से बेचैनी बढ़ सकती है. प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट वाला संतुलित भोजन मूड और फोकस को स्थिर रखने में मदद करता है. डाइट इलाज नहीं है, लेकिन रोजमर्रा की लाइफ जरूर आसान बनाती है.

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मूवमेंट से सुधरता है फोकस

ADHD में शरीर का मूवमेंट दिमाग पर सीधा असर डालता है. हल्की एक्सरसाइज, वॉक या स्ट्रेचिंग से फोकस बढ़ाने वाले केमिकल्स एक्टिव होते हैं, बेचैनी कम होती है और मूड बेहतर रहता है. नियमित मूवमेंट ADHD दिमाग के लिए नेचुरल रीसेट जैसा काम करता है.

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रूटीन क्यों है ADHD के लिए जरूरी

एक तय दिनचर्या ADHD की चुनौतियों को संभालने योग्य बनाती है. सोने-जागने का समय, तय मील टाइम और छोटी टू-डू लिस्ट दिमाग पर बोझ कम करती है. इससे एंग्जायटी घटती है और कंट्रोल का एहसास बढ़ता है.

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सीधा मैसेज

डॉ. सिद्धांत भार्गव का साफ कहना है कि ADHD कोई कमजोरी नहीं है. सही आदतें, लगातार लाइफस्टाइल सुधार और प्रोफेशनल सपोर्ट से बड़ा बदलाव संभव है. खुद को दोष देना छोड़कर, अपने दिमाग की ज़रूरतों को समझना ही असली समाधान है.

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ADHD आलस नहीं है! डॉक्टर सिद्धांत भार्गव ने बताया फोकस की कमी का असली सच

आजकल फोकस की कमी को अक्सर आलस या डिसिप्लिन की कमी मान लिया जाता है, लेकिन डॉक्टर सिद्धांत भार्गव ने अपनी लेटेस्ट ADHD रील में इस सोच को गलत बताया है. उनके मुताबिक ADHD कोई आदत या बहाना नहीं, बल्कि दिमाग के काम करने का अलग तरीका है.डॉ. भार्गव ने यह भी बताया कि कैसे छोटे-छोटे लाइफस्टाइल बदलाव फोकस, इमोशनल बैलेंस और क्रिएटिविटी को बेहतर बना सकते हैं. उन्होंने आलिया भट्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यस्त शेड्यूल के बावजूद सही आदतें अपनाकर संतुलन बनाए रखा जा सकता है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: December 31, 2025 15:49:42 IST

आजकल फोकस की कमी को अक्सर आलस या डिसिप्लिन की कमी मान लिया जाता है, लेकिन डॉक्टर सिद्धांत भार्गव ने अपनी लेटेस्ट ADHD रील में इस सोच को गलत बताया है. उनके मुताबिक ADHD कोई आदत या बहाना नहीं, बल्कि दिमाग के काम करने का अलग तरीका है.डॉ. भार्गव ने यह भी बताया कि कैसे छोटे-छोटे लाइफस्टाइल बदलाव फोकस, इमोशनल बैलेंस और क्रिएटिविटी को बेहतर बना सकते हैं. उन्होंने आलिया भट्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यस्त शेड्यूल के बावजूद सही आदतें अपनाकर संतुलन बनाए रखा जा सकता है.

  

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