इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं अर्जुन कपूर, ट्रोलिंग से लेकर डिप्रेशन तक, आसान नहीं था सफर
हाल ही में अर्जुन कपूर ने राज शमणि के पॉडकास्ट में अपनी जिंदगी के संघर्षों पर खुलकर बात की. बॉलीवुड के नेपो किड के रूप में पहचाने जाने वाले अर्जुन ने मां की मौत, असफलताओं और बीमारी से जूझने की कहानी साझा की.
मां की मौत
अर्जुन कपूर की मां मोना शौरी कपूर का निधन 2012 में आई फिल्म इशकजादे रिलीज से ठीक पहले हुआ था. पिता बोनी कपूर के तलाक के बाद मोना ही अर्जुन का इमोशनल सपोर्ट थीं. मात्र 10 साल की उम्र में अर्जुन ने अपनी छोटी बहन अंशुला की जिम्मेदारी ली और अपनी भावनाओं को दबाते हुए मां और बहन को अपना सपोर्ट देते रहे.
बचपन की चुनौतियां
बोनी कपूर और श्रीदेवी के विवाह के बाद अर्जुन और उनकी मां अकेले हो गए थे. माता-पिता के अलग होने का जो भावनात्मक असर बच्चों पर पड़ता है, वो अर्जुन पर भी पड़ा. अर्जुन की पढ़ाई डिस्टर्ब हो गयी. उन्होंने बताया कि पांचवीं क्लास तक वो बहुत अच्छे स्टूडेंट थे, लेकिन पैरेंट्स स्प्लिट के बाद उन्होंने पढ़ाई में विद्रोह किया. वो ट्यूशन बंक करने लगे और स्कूल से नफरत हो गई.
डेब्यू की सफलता
27 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म इशकजादे से डेब्यू किया, जो हिट रही. लेकिन मां की मौत के सदमे ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया. अर्जुन ने बताया कि इस दौरान उनका काम ही सहारा बना. गुंडे, 2 स्टेट्स जैसी फिल्मों ने अर्जुन को स्टारडम दिया.
असफलताओं का दौर
सफलता के बाद अर्जुन की असफलताओं का दौर भी लंबा था. नमस्ते इंग्लैंड, पानीपत, संदीप और पिंकी फरार, भूत पुलिस, एक विलेन रिटर्न्स, द लेडी किलर जैसी कई फिल्में उनकी फ्लॉप रहीं. उनकी ट्रोलिंग बढ़ने लगी, सेल्फ-डाउट आने लगा. उन्होंने बताया एक समय ऐसा भी आया जब वो बेड से उठ ही नहीं पाते थे.
ऑटोइम्यून बीमारी
30 साल की उम्र में अर्जुन को हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस डायग्नोज हुआ. इसमें एंटीबॉडीज बॉडी के खिलाफ लड़ती हैं, स्ट्रेस से वजन बढ़ता है. शांत रहने से बेहतर महसूस करते हैं.
मेंटल हेल्थ स्ट्रगल
अर्जुन डिप्रेशन के भी शिकार थे. उन्होंने बताया कि बीच में माइल्ड डिप्रेशन का सामना किया. अर्जुन ने इसके लिए कुछ दिन थेरेपी भी ली थी.