कौन है आसिया अंद्राबी? होम साइंस की छात्रा से अलगाववादी नेता बनने और अब उम्रकैद तक का पूरा सफर
Asiya Andrabi: घाटी में कभी अपनी कट्टरपंथी विचारधारा से युवाओं को गुमराह करने वाली आसिया अंद्राबी के सफर का अंत अब सलाखों के पीछे होगा. दिल्ली की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाकर साफ कर दिया कि कलम और कानून, नफरत फैलाने वाली हर साजिश से बड़े हैं. यह फैसला न्याय की जीत है. आइए आपको बताते हैं कि आसिया अंद्राबी कौन है और पूरा माजरा क्या है?
न्याय का कड़ा संदेश
दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कश्मीरी अलगाववादी और 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' की प्रमुख आसिया अंद्राबी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अतिरिक्त सेशन्स जज चंद्र जीत सिंह के इस फैसले ने साफ कर दिया कि राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता से समझौता करने वालों के लिए कानून में कोई रियायत नहीं है.
सहयोगियों पर भी कानून का शिकंजा
इस मामले में केवल अंद्राबी ही नहीं, बल्कि उनकी परछाई बनकर साथ चलने वाली दो सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी दोषी पाया गया. अदालत ने उनकी संलिप्तता की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 30-30 साल की लंबी जेल की सजा सुनाई है.
संगीन धाराओं का घेरा
सजा का आधार UAPA की वे धाराएं बनीं, जो आतंकवादी संगठन की सदस्यता और उसे समर्थन देने से जुड़ी हैं. इसके साथ ही, IPC की धाराओं के तहत राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचाने, आपराधिक साजिश रचने और राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे गंभीर आरोपों ने सजा के इस आधार को और मजबूत किया.
NIA की दलील और देश की सुरक्षा
जांच एजेंसी NIA ने अदालत में अंद्राबी के लिए कठोरतम सजा की मांग की थी. एजेंसी का तर्क बेहद स्पष्ट था. भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाली ताकतों को ऐसा सबक मिलना चाहिए जो भविष्य के लिए एक उदाहरण बने. यह सजा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उस विचारधारा को है जो देश के खिलाफ साजिश रचती है.
कौन है आसिया अंद्राबी?
64 साल की आसिया अंद्राबी कभी होम साइंस की छात्रा थी, जिसका सपना कश्मीर से बाहर जाकर पढ़ाई करना था. लेकिन समय के साथ उसकी विचारधारा बदलती गई और वह इस्लामी साहित्य व चरमपंथ की ओर मुड़ गई. 'जमात-ए-इस्लामी' से शुरू हुआ उसका सफर अंततः एक कट्टरपंथी राह पर जाकर खत्म हुआ.
'दुख्तरान-ए-मिल्लत' का उभार और पाबंदी
1985 में अंद्राबी ने महिलाओं पर केंद्रित संगठन 'दुख्तरान-ए-मिल्लत' की नींव रखी. शुरुआत में इसे सामाजिक सुधार का मुखौटा पहनाया गया, लेकिन जल्द ही इसकी असलियत सामने आ गई. 2018 में केंद्र सरकार ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित कर दिया था.
घाटी में कट्टरपंथ का दौर
90 के दशक में अंद्राबी और उसके संगठन ने कश्मीर घाटी में कट्टरपंथी नियमों को थोपने के लिए अभियान चलाए. बुर्का अनिवार्य करने से लेकर सामाजिक पाबंदियों तक, इस संगठन ने युवाओं और महिलाओं के बीच एक खास तरह की अलगाववादी सोच को बीज की तरह बोने का काम किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने हमेशा देश के लिए खतरा माना.
निजी जीवन और लंबा आपराधिक इतिहास
आसिया का निजी जीवन भी विवादों और जेल की सलाखों के बीच बीता है. उसने दोषी उग्रवादी कमांडर आशिक हुसैन फकतू से शादी की, जो खुद उम्रकैद की सजा काट रहा है. 1993 में पहली बार गिरफ्तार होने के बाद से अंद्राबी दर्जनों बार जेल गई, लेकिन उसकी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में कोई कमी नहीं आई, जिसका अंत आज इस अंतिम फैसले के रूप में हुआ.