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इत्र व्यापारी से लेकर राजनीति तक, बदरुद्दीन अजमल कैसे बने किंगमेकर? अब क्यों नहीं चल रहा पहले जैसा जादू

Assam Assembly Elections 2026: असम विधानसभा चुनाव जल्द ही होने वाले है. ऐसे में एक नाम जहन में आता है बदरुद्दीन अजमल का, जिनका असर सिर्फ़ चुनावी आंकड़ों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि उन्होंने लंबे समय तक राज्य के वोट बैंक की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई है. एक कारोबारी से राजनेता बने अजमल ने ‘ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ (AIUDF) के जरिए खास तौर पर मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई और कई चुनावों में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाई है. हालांकि, बदलते राजनीतिक समीकरणों, BJP के उभार और वोट बैंक के भीतर ही बदलते हालात ने धीरे-धीरे उनकी स्थिति को मुश्किल बना दिया है. नतीजतन, अहम सवाल अब भी बना हुआ है: क्या अजमल अब भी असम की राजनीति में एक निर्णायक खिलाड़ी हैं, या उनका असर धीरे-धीरे कम हो रहा है?
Last Updated: March 27, 2026 | 8:19 PM IST
Who is Badruddin Ajmal? - Photo Gallery
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कौन हैं बदरुद्दीन अजमल?

बदरुद्दीन अजमल असम के एक प्रमुख मुस्लिम नेता और AIUDF के संस्थापक हैं. वे पेशे से एक इत्र व्यापारी हैं. उन्होंने अपने इत्र ब्रांड, 'अजमल परफ्यूम्स' के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की. 2005 में राजनीति में आने के बाद, वे अल्पसंख्यक समुदाय के हितों के एक मुखर समर्थक बन गए और जल्द ही असम की राजनीति में एक प्रमुख हस्ती के रूप में उभरे. उन्होंने धुबरी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए, संसद सदस्य (MP) के तौर पर कई कार्यकाल पूरे किए हैं.

How did Badruddin Ajmal's political journey begin? - Photo Gallery
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बदरुद्दीन अजमल की राजनीतिक यात्रा कैसे शुरू हुई?

बदरुद्दीन अजमल असम की राजनीति में एक कद्दावर हस्ती हैं, जिनकी यात्रा किसी फ़िल्मी कहानी जैसी लगती है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इत्र के कारोबार से की, और धीरे-धीरे अजमल परफ़्यूम्स ब्रांड को देश-विदेश में घर-घर में पहचाना जाने वाला नाम बना दिया. हालांकि, 2000 के दशक में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जल्द ही अल्पसंख्यक समुदाय की एक प्रमुख आवाज बनकर उभरे.

How did Badruddin Ajmal build a strong vote bank through the AIUDF? - Photo Gallery
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बदरुद्दीन अजमल ने AIUDF के जरिए एक मज़बूत वोट बैंक कैसे बनाया?

2005 में, उन्होंने 'ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट' (AIUDF) की स्थापना की. पार्टी का मुख्य ध्यान असम के मुसलमानों, खास तौर पर बंगाली बोलने वाले मुस्लिम आबादी से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था. महज़ कुछ ही सालों में, AIUDF असम में दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी ताक़त बनकर उभरी. अजमल का असर धुबरी, बारपेटा और करीमगंज जैसे इलाकों में खास तौर पर मज़बूत रहा है, जहां उनका वोट बैंक चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाता है.

Is Badruddin Ajmal still a 'kingmaker' in Assam politics? - Photo Gallery
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क्या बदरुद्दीन अजमल अब भी असम की राजनीति में 'किंगमेकर' हैं?

एक समय ऐसा था जब असम में बदरुद्दीन अजमल के समर्थन के बिना सरकार बनाना लगभग नामुमकिन माना जाता था. हालांकि, हाल के चुनावों में उनकी पार्टी का प्रदर्शन फीका रहा है. असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उभार, और साथ ही ध्रुवीकरण की राजनीति ने AIUDF के असर को कम कर दिया है. अजमल की भूमिका अब 'किंगमेकर' से हटकर एक ऐसे नेता की ओर बढ़ती दिख रही है, जिसका प्रभाव भले ही क्षेत्रीय दायरे में हो, फिर भी बहुत महत्वपूर्ण बना हुआ है.

Was Badruddin Ajmal's alliance with the Congress beneficial or detrimental? - Photo Gallery
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क्या बदरुद्दीन अजमल का कांग्रेस के साथ गठबंधन फायदेमंद रहा या नुकसानदेह?

कांग्रेस पार्टी के साथ अजमल का गठबंधन लंबे समय से तीखी बहस और चर्चा का विषय रहा है. 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस और AIUDF के बीच एक गठबंधन हुआ था; हालांकि, इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस गठबंधन ने हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण को और बढ़ा दिया, एक ऐसी घटना जिसका सीधा फायदा BJP को मिला. यही वजह है कि कांग्रेस भी अब अजमल से रणनीतिक दूरी बनाए हुए है.

Has a rift emerged in Badruddin Ajmal's Muslim vote bank? - Photo Gallery
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क्या बदरुद्दीन अजमल के मुस्लिम वोट बैंक में दरार आ गई है?

ऐतिहासिक रूप से, अजमल की सबसे बड़ी ताकत उनका मुस्लिम वोट बैंक रहा है. हालांकि, इस जनसांख्यिकी के भीतर बदलाव के संकेत अब साफ दिखाई दे रहे हैं. युवा मतदाता और शिक्षित वर्ग अब पहचान की राजनीति से आगे देख रहे हैं, और इसके बजाय विकास और रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं. नतीजतन, AIUDF का पारंपरिक वोट बैंक अब बिखरता हुआ प्रतीत हो रहा है.

What role could Badruddin Ajmal play in the 2026 elections? - Photo Gallery
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2026 के चुनावों में बदरुद्दीन अजमल क्या भूमिका निभा सकते हैं?

2026 का चुनाव बदरुद्दीन अजमल के लिए करो या मरो की स्थिति साबित हो सकता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि यदि AIUDF इस चुनाव में अपने मुख्य वोट बैंक को फिर से एकजुट करने में सफल हो जाता है, तो अजमल एक बार फिर एक निर्णायक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर सकते हैं. इसके विपरीत, यदि वोट और भी अधिक खंडित हो जाते हैं, तो उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता और कम हो सकती है.

Is Badruddin Ajmal's political influence waning? - Photo Gallery
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क्या बदरुद्दीन अजमल का राजनीतिक प्रभाव कम हो रहा है?

इस मोड़ पर ऐसा दावा करना जल्दबाजी होगी. अजमल अभी भी असम के कई जिलों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, और उनका मुख्य वोट बैंक पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है. फिर भी, बदलते राजनीतिक परिदृश्य, नए मुद्दों का उभरना और विरोधी ताकतों की जबरदस्त उपस्थिति ने निस्संदेह उनके सामने महत्वपूर्ण चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं.

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