Bhupen Borah: करोड़ों की संपत्ति और बिहपुरिया के बेताज बादशाह; जानें कौन हैं कांग्रेस से इस्तीफा देकर पलटने वाले भूपेन बोरा?
Who Is Bhupen Borah: असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर मची रार ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है. कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के अचानक आए एक फैसले ने हाईकमान की नींद उड़ा दी. आखिर पार्टी के ‘संकटमोचक’ रहे बोरा क्यों हुए बागी? उनकी कांग्रेस में पद और उनकी नेट वर्थ, पढ़ें यहां पूरी कहानी…
इस्तीफे की घोषणा और राजनीतिक हलचल
असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने अपने पद से इस्तीफा देकर राज्य की राजनीति में सनसनी फैला दी. हालांकि, बाद में उनके कदम पीछे खींचने से पार्टी ने राहत की सांस ली, लेकिन इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए.
'नजरअंदाज' किए जाने का आरोप
बोरा ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को ईमेल के जरिए भेजा. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी आलाकमान उन्हें नजरअंदाज कर रहा है और राज्य इकाई में उन्हें वह सम्मान या जगह नहीं दी जा रही है जिसके वे हकदार हैं. 2021 से 2025 तक अध्यक्ष रहने के बाद, पिछले साल गौरव गोगोई को यह जिम्मेदारी मिलना भी असंतोष का एक कारण माना गया.
अन्य दलों की सक्रियता और मुख्यमंत्री का बयान
इस्तीफे की खबर मिलते ही अन्य दलों के नेताओं ने बोरा से संपर्क साधा. अखिल गोगोई और लुरिन गोगोई (असम जातीय परिषद) ने उनके लिए अपने दरवाजे खुले होने की बात कही. वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चुटकी लेते हुए बोरा को असम कांग्रेस का 'आखिरी हिंदू नेता' बताया और उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की.
कौन हैं भूपेन कुमार बोरा?
भूपेन कुमार बोरा असम के लखीमपुर जिले के रहने वाले हैं. उनकी शिक्षा नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी से हुई. वे असम कांग्रेस के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं जिन्होंने संगठन में जमीन से जुड़कर काम किया है.
छात्र जीवन से सक्रिय राजनीति तक का सफर
उनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ. नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन के उपाध्यक्ष और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी के जनरल सेक्रेटरी रहे. वे असम प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. उन्होंने 2006 और 2011 में लगातार दो बार बिहपुरिया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया.
सरकार और संगठन में महत्वपूर्ण पद
बोरा ने कांग्रेस शासन के दौरान कई अहम भूमिकाएं निभाईं, तरुण गोगोई सरकार में वे सरकार के प्रवक्ता और संसदीय सचिव रहे. 2013 में उन्हें AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) का सचिव नियुक्त किया गया. 2021 में उन्हें असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) का अध्यक्ष बनाया गया था.
चुनाव और पार्टी के मनोबल पर प्रभाव
चूंकि असम में चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में बोरा जैसे कद्दावर नेता की नाराजगी कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती थी. ऊपरी असम, विशेषकर बिहपुरिया में उनकी मजबूत पकड़ है. उनके जाने से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता था और विपक्ष को 'कांग्रेस की अंदरूनी कलह' को मुद्दा बनाने का मौका मिल जाता.
भूपेन बोरा की नेट वर्थ
चुनावी हलफनामों के अनुसार, भूपेन कुमार बोरा की कुल संपत्ति लगभग ₹5.24 करोड़ घोषित की गई है। उनकी इस संपत्ति में चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्तियां शामिल हैं, जो उनके राजनीतिक रसूख और जमीनी पकड़ को दर्शाती हैं. उनके पास गुवाहाटी और लखीमपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई संपत्तियां मौजूद हैं.