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आज से शुरू हुआ चैती छठ का पावन पर्व! नोट करें खरना से उषा अर्घ्य तक का पूरा शेड्यूल

Chaiti Chhath 2026: चैती छठ का पावन पर्व आज से आरंभ हो चुका है, जिसे पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ चार दिनों तक मनाया जाता है. यह व्रत सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है, जिसमें भक्त परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए कठोर नियमों का पालन करते हैं. आइए जानते हैं इस व्रत के सभी चरण, तिथियां और जरूरी नियम.

Last Updated: March 22, 2026 | 7:59 PM IST
Importance of Chhath Vrat Explained - Photo Gallery
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छठ व्रत का महत्व क्या है?

छठ पूजा भारतीय परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें प्रकृति और सूर्य की आराधना की जाती है. यह व्रत न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना का भी प्रतीक माना जाता है.

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नहाय-खाय से होती है शुरुआत (22 मार्च 2026)

व्रत का पहला दिन ‘नहाय-खाय’ कहलाता है. इस दिन व्रती सुबह स्नान कर घर की अच्छी तरह सफाई करते हैं और शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं. आमतौर पर कद्दू-भात और चने की दाल इस दिन का प्रमुख प्रसाद होता है, जिससे व्रत की शुरुआत होती है.

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खरना का विशेष महत्व (23 मार्च 2026)

दूसरे दिन को ‘खरना’ कहा जाता है. इस दिन व्रती पूरे दिन बिना पानी के व्रत रखते हैं और शाम को पूजा के बाद गुड़ की खीर और रोटी बनाते हैं. पहले यह प्रसाद भगवान को अर्पित किया जाता है, फिर परिवार के साथ ग्रहण किया जाता है.

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36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत

खरना के बाद व्रती 36 घंटे तक निर्जला उपवास करते हैं. इस दौरान न खाना खाया जाता है और न ही पानी पिया जाता है. यही इस व्रत को सबसे कठिन और अनुशासन वाला बनाता है.

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तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य का महत्व (24 मार्च 2026)

तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसे ‘संध्या अर्घ्य’ कहा जाता है. व्रती नदी, तालाब या घर में बनाए गए जल पात्र में खड़े होकर सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं और ठेकुआ, फल आदि चढ़ाते हैं.

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चौथा दिन: उषा अर्घ्य से होता है समापन (25 मार्च 2026)

छठ पूजा का अंतिम दिन ‘उषा अर्घ्य’ का होता है. इस दिन सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है. इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलते हैं.

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छठ व्रत के जरूरी नियम

इस व्रत में स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है. व्रती केवल सात्विक भोजन करते हैं और लहसुन-प्याज या मांसाहार से पूरी तरह दूर रहते हैं. पूजा स्थल को साफ रखना और नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक माना जाता है.

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