Country With No Internet: इस देश में अभी तक नहीं पहुंचा इंटरनेट, गूगल और सोशल मीडिया के बगैर कैसे होते हैं सारे काम?
Country With No Internet: आज के टेक्नीकल युग में जहां लोग इंटरनेट के इतने आदी हो गए हैं कि इसके बिना जीवन अब जैसे कुछ भी नहीं है. वहीं दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जो इंटरनेट से पूरी तरह कटा हुआ है. क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि WhatsApp, Google या ऑनलाइन बैंकिंग के बिना पूरा देश कैसे काम करेगा? जी हां, एक देश ऐसा भी है जहां ना तो इंटरनेट है और ना ही सोशल मीडिया. तो सोचिए कि इस देश का काम कैसे होता होगा? इसकी आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा तो यह भी नहीं जानता कि ‘इंटरनेट’ असल में कैसा दिखता है या यह कैसे काम करता है? चलिए इसके बारे में जानते हैं.
इंटरनेट के बिना एक देश
आज के ज़माने में जहां इंटरनेट ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर शिक्षा और रोज़गार तक हर चीज की रीढ़ बन गया है. दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां ज्यादातर लोग ऑनलाइन दुनिया से कटे हुए हैं. यहां रहने वाले लोगों के लिए इंटरनेट रोजमर्रा की जरूरत नहीं, बल्कि एक दुर्लभ विलासिता है.
यह कौन सा देश है?
यह देश है इरिट्रिया. पूर्वी अफ्रीका का एक छोटा सा देश इरिट्रिया डिजिटल युग की दौड़ में अभी भी मीलों पीछे है. इरिट्रिया दुनिया के सबसे कम कनेक्टेड देशों में गिना जाता है. यहां इंटरनेट की पहुंच बहुत सीमित है और आबादी का बहुत छोटा सा हिस्सा ही इसका इस्तेमाल कर पाता है. बड़े शहरों के बाहर डिजिटल कनेक्टिविटी लगभग न के बराबर है.
सरकार का कड़ा नियंत्रण
इस देश में इंटरनेट पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में है. ज्यादातर नेटवर्क सरकारी संस्थानों के जरिए चलाए जाते हैं और उनके इस्तेमाल पर कड़ी निगरानी रखी जाती है. आम नागरिकों के लिए इंटरनेट का आजादी से इस्तेमाल करना आसान नहीं है क्योंकि हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जाती है.
खराब इंफ्रास्ट्रक्चर एक बड़ा कारण
यहां इंटरनेट की पहुंच न होने का एक बड़ा कारण देश का कमजोर तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर है. ब्रॉडबैंड सेवाएं सीमित हैं और मोबाइल इंटरनेट कवरेज भी काफी कम है. जहां इंटरनेट उपलब्ध भी है, वहां भी इसकी धीमी गति और ज्यादा कीमत लोगों को इसका ज्यादा इस्तेमाल करने से रोकती है.
आम नागरिक की पहुंच से बाहर इंटरनेट
हालांकि कुछ इंटरनेट कैफ़े मौजूद हैं, लेकिन वे संख्या में बहुत कम हैं और उन पर कड़े नियम लागू होते हैं. ज्यादातर लोगों के पास न तो पर्सनल कंप्यूटर हैं और न ही ऐसे स्मार्टफोन जिनसे इंटरनेट चलाया जा सके. नतीजतन, इस देश में डिजिटल दुनिया और रोजमर्रा की ज़िंदगी के बीच एक बड़ा फासला बना हुआ है.
शिक्षा और व्यापार पर असर
इंटरनेट की पहुंच न होने का शिक्षा, व्यापार और संचार पर सीधा असर पड़ता है. छात्रों को ऑनलाइन सीखने के संसाधनों तक पहुंच नहीं मिल पाती और उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. बाकी दुनिया के मुकाबले यहां सूचनाओं का आदान-प्रदान भी काफी धीमा है.
दुनिया से पीछे रह गया एक देश
जहां पूरी दुनिया तेजी से डिजिटलीकरण को अपना रही है, वहीं इरिट्रिया इस दौड़ में काफी पीछे रह गया है. आज भी यह देश वैश्विक डिजिटल खाई का एक जीता-जागता उदाहरण है. एक ऐसी जगह जहां इंटरनेट आम आदमी की पहुंच से बाहर है.
पुराने संसाधनों के भरोसे
यहां के लोग आज भी ताजा सूचनाओं के लिए रेडियो और सरकारी समाचार पत्रों के भरोसे हैं. यह देश 2026 में भी यह कड़वा सच बयां कर रहा है कि 'डिजिटल डिवाइड' समाज में कितनी गहरी खाई पैदा कर सकता है.