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एक पांव पर खड़ी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, निर्माण में लगे एक साल; किन धातुओं का हुआ इस्तेमाल?

Delhi Akshardham Temple: दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विरासत के प्रतीक के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध है. 26 मार्च को यह एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने जा रहा है. वैश्विक BAPS संगठन के आध्यात्मिक प्रमुख महंत स्वामी महाराज तपोमूर्ति श्री नीलकंठ वर्णी (भगवान स्वामीनारायण) की 108 फुट ऊंची विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया जाएगा.

Last Updated: March 25, 2026 | 4:54 PM IST
Features of Statue - Photo Gallery
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मूर्ति की खासियत

पंचधातु से निर्मित यह प्रतिमा दुनिया में अपनी तरह की पहली प्रतिमा है. जोकि एक पैर पर खड़ी है. जिसके बारे में बताया जाता है कि यह भगवान की कठोर तपस्या का प्रतीक है.

Preparations are in full swing - Photo Gallery
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तैयारी जोरों पर

इस कार्यक्रम के लिए भव्य तैयारियां की जा रही है. बताया जा रहा है कि ब्रह्मस्वरूप महंत स्वामी महाराज 19 मार्च को दिल्ली पहुंचे. उनके स्वागत के लिए 21 मार्च को एक विशेष स्वागत सभा का आयोजन किया गया था.

Who is Tapomurthy Srineelkanthvarni Bhagwan - Photo Gallery
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कौन है तपोमूर्ति श्रीनीलकंठवर्णी भगवान?

भगवान श्री स्वामीनारायण ने मात्र 11 वर्ष की कोमल आयु में अपना घर त्याग दिया और मानवता के कल्याण के लिए पूरे भारत की लंबाई और चौड़ाई में सात साल की यात्रा पर निकल पड़े.

spiritual journey was more than 12,000 kilometers long - Photo Gallery
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12 हजार किलीमीटर से अधिक लंबी थी आध्यात्मिक यात्रा

इस कठिन आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने 12,000 किलोमीटर से अधिक लंबी दूरी तय की थी. उन्होंने अपने चरणों की धूल से कई पवित्र तीर्थ स्थलों को पावन किया.

What is the distinctive feature of the Tapomurti - Photo Gallery
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क्या है तपोमूर्ति की विशेषता?

तपोमूर्ति एक चरण पर अडिग खड़ी रहने वाली यह विश्वभर में संभवत: एकमात्र सबसे विशाल (108 फीट) प्रतिमा है. 8 फीट ऊंचे पृष्ठतल पर इसे स्थापित किया गया है.

How many years did the construction take - Photo Gallery
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निर्माण में कितने वर्ष लगे?

इसके निर्माण में तकरीबन एक वर्ष का समय लगा और इसका निर्माण पंचधातु से हुआ है, जिसमें मुख्य रूप से कांस्य धातु का उपयोग हुआ है.

When will the festival be held - Photo Gallery
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कब होगा महोत्सव का आयोजन?

इस महोत्सव का शुभारंभ 25 मार्च की सुबह ‘श्रीनीलकंठवर्णी विश्व शांति महायज्ञ’ के साथ हुआ. दिल्ली अक्षरधाम के विशाल प्रांगण में षोडशोपचार पूजन विधि द्वारा यह वैदिक अनुष्ठान संपन्न किया गया.

Saints from which countries were present - Photo Gallery
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किन देशों के संत रहे मौजूद?

इस दौरान यूके, फ्रांस, अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से संस्था के 300 से अधिक संत पधारे.

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