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Dharm Gyaan: हनुमान जी को हराना क्यों था नामुमकिन? प्रेमानंद महाराज ने बताया, क्या है इसकी असली वजह

Hanuman Ji Story: भारतीय संस्कृति के आधार पर, भगवान हनुमान शक्ति, भक्ति और साहस के प्रतीक है. रामायण और अन्य धर्मग्रंथों में ऐसे अनेक प्रसंग आपको मिल जाएंगे, जहां हनुमान जी असंभव को संभव कर दिखायए हैं और कभी पराजित नहीं हुए हैं. आइए जानते हैं, आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज क्या कहते हैं.

Last Updated: April 11, 2026 | 11:11 AM IST
Why no one able to defeat Hanuman Ji? - Photo Gallery
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हनुमान जी को कोई क्यों नहीं हरा सका?

भगवान हनुमान को चारों युगों में सबसे शक्तिशाली और विजयी योद्धा के रूप में पूजा जाता है. तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा में उनकी महिमा का विशेष रूप से गुणगान किया गया है, जिसमें कहा गया है, आपका पराक्रम चारों युगों तक फैला हुआ है. भगवान राम के एक समर्पित सेवक के रूप में, हनुमान को स्वयं भगवान राम की विशेष कृपा प्राप्त थी, और उन्हें भगवान शिव का अत्यंत प्रिय भी माना जाता है.

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हनुमान जी को कोई क्यों नहीं हरा सका?

भगवान हनुमान को साहस, शौर्य और शक्ति के देवता के रूप में पूजा जाता है. अनेक लोग विशेष रूप से इन्हीं गुणों को प्राप्त करने के लिए उनकी आराधना करते हैं. अपने कई प्रवचनों में, आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज ने भगवान हनुमान की महिमा का अत्यंत सुंदर वर्णन किया है. ऐसे ही एक प्रवचन में, उन्होंने समझाया कि भगवान हनुमान को पराजित करना असंभव है.

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हनुमान जी को कोई क्यों नहीं हरा सका?

प्रेमानंद जी कहते हैं कि हनुमान जी के भीतर अहंकार का लेभमात्र भी नहीं था. वे एक परम भक्त थे और सदैव राम-नाम में लीन रहते थे. उनका आशय यह था कि जिस व्यक्ति को अपने अस्तित्व पर जरा भी अभिमान न हो, उसे पराजित करना असंभव है.

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हनुमान जी को कोई क्यों नहीं हरा सका?

हनुमान जी राम नाम के साक्षात स्वरूप हैं. उन्होंने जो कुछ भी किया, वह सब राम के नाम पर और उनकी आज्ञा से ही किया. प्रेमानंद जी कहते हैं, उसे कौन पराजित कर सकता है, जिसने राम नाम की शक्ति से लंका को भस्म कर दिया था? इन शब्दों के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि आज भी, ऐसी कोई शक्ति नहीं है जो उस व्यक्ति को पराजित कर सके, जिसने स्वयं को पूरी तरह से राम नाम में विलीन कर दिया हो.

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हनुमान जी को कोई क्यों नहीं हरा सका?

भगवान हनुमान में असाधारण शक्ति, तीक्ष्ण बुद्धि और असीम भक्ति का एक अनूठा संगम था. प्रेमानंद जी समझाते हैं कि केवल शक्तिशाली होना ही पर्याप्त नहीं है; बुद्धि और भक्ति के बिना, ऐसी शक्ति विनाशकारी सिद्ध हो सकती है. भगवान हनुमान में ये तीनों गुण पूर्ण सामंजस्य के साथ विद्यमान थे. परिणामस्वरूप, कोई भी उन्हें कभी पराजित नहीं कर सका.

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हनुमान जी को कोई क्यों नहीं हरा सका?

भगवान हनुमान ने अपना संपूर्ण जीवन अपना तन, मन, बुद्धि और कर्म भगवान श्री राम को समर्पित कर दिया. प्रेमानंद महाराज कहते हैं, "जो पूर्ण आत्म-समर्पण में स्थित है, उसे इस भौतिक जगत का कोई भी भ्रम या शक्ति पराजित नहीं कर सकती."

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हनुमान जी को कोई क्यों नहीं हरा सका?

भगवान हनुमान के शरीर को दिव्य, कालजयी और अमर माना जाता है. वे हर प्रकार की बाधाओं से परे हैं चाहे वे काल हों, ग्रहों का प्रभाव हो, यम हों, भूत-प्रेत हों या ऐसी ही कोई अन्य शक्ति. जैसा कि प्रेमानंद जी कहते हैं, जिसकी कांति को स्वयं अग्नि भी सहन नहीं कर सकती, उसकी पराजय भला कैसे संभव है?

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