दीया मिर्जा ने खोला बॉलीवुड का राज, बोलीं- ‘महिला कलाकारों को कमोडिफाई किया जाता है’
Dia Mirza: बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा ने बॉलीवुड में होने वाले रोजाना सेक्सिज्म और लैंगिक असमानता पर खुलकर बात की थी. उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान सेट पर लैंगिक आधार पर भेदभाव की बात कही. उन्होंने बताया कि औरतों के साथ हमेशा बहुत प्यार से पेश आया जाता है. वे सेट पर बहुत स्पेशल होती हैं लेकिन उनके समय की कोई इज्जत नहीं होती है. कई चीजों की कोई इज्जत नहीं है जिनके लिए मर्दों की ज्यादा इज्जत होती है और ये बस नाम रखने जैसा है.
विधु विनोद चोपड़ा के सेट पर नहीं मिली इज्जत
विधु विनोद चोपड़ा के सेट पर नहीं मिली इज्जत VVC(विधु विनोद चोपड़ा) के लिए काम कर रही थीं, तब उन्हें महसूस हुआ कि फिल्म के सेट पर इज्जत और अहमियत महसूस नहीं दी जाती. उन्होंने कहा कि वो सेट पर स्पेशल थीं लेकिन उनके वक्त की कोई इज्जत नहीं थी.महिलाएं सेट पर खास होती हैं लेकिन
महिलाएं सेट पर खास होती हैं लेकिन...
उन्होंने कहा कि इससे पहले उन्होंने कई बड़े प्रोड्यूसर्स और कुछ सबसे बड़ी एक्टिंग टीमों, एक्टर्स, सबके साथ काम किया था. सेट पर महिलाओं के साथ हमेशा बहुत प्यार से पेश आया जाता है और वे सेट पर बहुत खास होती हैं, लेकिन उनके समय की कोई इज्जत नहीं होती. कई चीजों की कोई इज्जत नहीं होती जिनके लिए पुरुषों की ज्यादा इज्जत होती है.
पब्लिकली नहीं की बात
दीया की ईमानदारी एक ऐसी सच्चाई को सामने लाती है जिसके बारे में इंडस्ट्री में कई महिलाओं ने फुसफुसाकर कहा है लेकिन पब्लिकली बहुत कम महिलाओं ने इस बारे में बात की. एक्ट्रेस ने बताया था कि कैसे विधु विनोद चोपड़ा के बैनर और फिल्ममेकर राजकुमार हिरानी के साथ लगे रहो मुन्ना भाई में काम करने से उन्हें आखिरकार एक हेल्दी, ज्यादा इज्जतदार वर्क कल्चर की झलक मिली.
मुन्ना भाई फिल्म से मिला प्यार
उन्होंने बताया कि उन्होंने मुन्ना भाई फिल्म में साथ राजकुमार हिरानी के साथ काम किया. वहां मुझे काम करके बहुत अच्छा लगा. मुझे इतनी खुशी और इतना प्यार पहले कभी महसूस नहीं हुआ.
दत्तक पिता की मौत के बाद हुआ एहसास
इसके बाद उनके दत्तक पिता (अडोप्टिव फादर) की डेथ हो गई. इसने दीया को फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह को फिर से देखने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि इसके बाद मुझे बहुत दुख महसूस हुआ. मुझे लगा कि जो काम मुझे खुशी देता है, उसके लिए मुझे बस कमोडिटी और सेक्शुअलाइज किया जा रहा है. मुझे एहसास हुआ कि मैं किस जाल में फंसी हुई हूं. दीया की इन बातों से बॉलीवुड के ग्लैमर के पीछे महिलाओं के लिए और पहले से सफल महिलाओं को होने वाली मुश्किलों को बताया.
क्या बोलीं काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट सृष्टि वत्स
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट सृष्टि वत्स ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि इस तरह से नीचा दिखाना अक्सर सवाल नहीं होता. वो वे असल में पावर मूव्स होते हैं. खासकर मजाक या बेपरवाह बातों के रूप में. इसे माइक्रोएग्रेशन कहा जाता है. ये हल्की, अक्सर अनजाने में की गई बातें जो बायस या अनादर दिखाती हैं. इससे आप छोटा और नजरअंदाज किया हुआ महसूस करते हैं, या बस ऐसा लगता है कि कुछ तो पक्का गलत है.
ऐसा महसूस हो तो क्या करें?
उन्होंने कहा कि जब ऐसा करने वाला इंसान ज्यादा पावरफुल होता है. उदाहरण के रूप में देखा जाए, तो आपका बॉस या परिवार का कोई बड़ा हो, तो उन्हें जवाब देना मुश्किल हो जाता है. इसमें अच्छा ऑप्शन है कि आप इसे हंसकर टाल दें और कोई सीन न बनाएं.