Giza Pyramids: बिना मशीनों के कैसे बना ये विशाल अजूबा? पिरामिड निर्माण की असली कहानी आई सामने
दुनिया का सबसे पुराना अजूबा पिरामिड
प्राचीन इतिहास के क्षेत्र में, जब भी दुनिया की सबसे आश्चर्यजनक इमारतों या अजूबों की बात होती है, तो मिस्र में शान से खड़े गीज़ा के पिरामिड सबसे पहले ज़हन में आते हैं. ये पिरामिड सदियों से (4,500 साल से भी ज़्यादा पुराने) सहारा रेगिस्तान की रेतीली ज़मीन पर खड़े हैं. जो बात सचमुच हैरान करने वाली है, वह यह सवाल है कि, आधुनिक मशीनों से रहित उस ज़माने में इन विशाल पत्थरों को इस जगह तक कैसे पहुंचाया गया होगा.
क्या हैं पिरामिडों का इतिहास?
ये तीनों पिरामिड मिस्र के फराओ राजाओं की विशाल कब्रों के तौर पर काम करते हैं, इनमें से सबसे ऊंचे पिरामिड को 'ग्रेट पिरामिड' के नाम से जाना जाता है. हर पिरामिड को 20 लाख से लेकर 25 लाख (2 से 2.5 मिलियन) विशाल पत्थरों को जोड़कर बनाया गया था. आज भी, आधुनिक इतिहासकार इस बात से हैरान हैं कि उस ज़माने में, जब इंसान के पास आधुनिक दुनिया में उपलब्ध विशाल मशीनें, गाड़ियां या क्रेन जैसी कोई चीज नहीं थी, इन विशाल चूना-पत्थर के टुकड़ों को इस जगह तक पहुंचाने के लिए किन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया होगा.
2013 में सुलझा पिरामिडों का रहस्य
अपने शोध के ज़रिए, इतिहासकारों ने इन पिरामिडों के निर्माण से जुड़ी एक डायरी का पता लगाया है. एक ऐसा दस्तावेज़ जो आखिरकार इस बात के बारीक ब्योरे सामने लाता है कि इन विशाल इमारतों को कैसे बनाया गया था. इतिहासकारों को यह बड़ी सफलता 2013 में मिली, जब उन्हें मिस्र के लाल सागर के तट पर स्थित 'वादी अल-जर्फ' नामक जगह पर प्राचीन दस्तावेज़ों का एक संग्रह मिला, जिसे लाल सागर पेपाइरी (Red Sea Papyri) के नाम से जाना जाता है. इन दस्तावेज़ों ने पिरामिडों से जुड़े उस पुराने रहस्य को सफलतापूर्वक सुलझा दिया है.
पिरामिड निर्माण के जमाने की एक डायरी सामने आई
इन दस्तावेज़ों के बीच, इतिहासकारों को 'मेरर' नाम के एक अधिकारी की डायरी मिली है; वह उस समय 200 मज़दूरों की एक टीम के इंस्पेक्टर के तौर पर काम करता था. इस डायरी में, उन्होंने पिरामिडों के निर्माण की कहानी को विस्तार से बताया है, यह वर्णन करते हुए कि कैसे चूना पत्थर के विशालकाय टुकड़ों को दूर-दराज के स्थानों से लाया गया और कैसे इतने बड़े पैमाने के काम को व्यवस्थित किया गया.
पिरामिडों के निर्माण के लिए टन-भर वजनी पत्थरों को कैसे लाया गया?
यह डायरी बताती है कि, इन पिरामिडों के निर्माण के लिए, चूना पत्थर तूरा की खदानों से लिया गया था, जबकि तांबा सिनाई प्रायद्वीप से लाया गया था. इन सामग्रियों को नावों के ज़रिए गीज़ा पहुंचाया गया था. इस डायरी में पिरामिडों के निर्माण से जुड़े कामों का रोज़ाना का हिसाब-किताब दर्ज है.
पिरामिडों के निर्माण के लिए कुशल करीगर थे
यह डायरी बताती है कि इन इमारतों को बनाने वाले मजदूर गुलाम नहीं, बल्कि कुशल कारीगर थे. उन्हें रोटी, मांस, खजूर, बीयर, दाल और ऐसी ही दूसरी चीज़ों के रूप में मज़दूरी दी जाती थी, क्योंकि उस जमाने में मुद्रा का चलन नहीं था. यह प्राचीन इतिहास की सिविल इंजीनियरिंग का एक शानदार प्रमाण है.