GOLD VS Mutual Fund: बच्चों के भविष्य के लिए गोल्ड और म्युचुअल फंड में से कौन सा विकल्प है सही, यहां देखें कंपेरिजन?
GOLD VS Mutual Fund: भारत में सोना सिर्फ़ एक इन्वेस्टमेंट नहीं है बल्कि, यह सुरक्षा, परंपरा और आपके बच्चे से एक चुपचाप किया गया वादा है जो कि जरूरत पड़ने पर कुछ कीमती हमेशा आपके पास रहेगा. कई परिवारों के लिए हर साल सोना खरीदना, खासकर बच्चों के लिए म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट को ऊपर-नीचे होते देखने से ज़्यादा सुकून देने वाला लगता है. जब लक्ष्य विदेश में पढ़ाई या 10 से 15 साल बाद होने वाली शादी जैसा बड़ा होता है, तो सोना अक्सर पहली पसंद बन जाता है. लेकिन पसंद और फाइनेंशियल लॉजिक हमेशा एक जैसे नहीं होते. ऐसे में सवाल है कि सोना या SIP में से किसमें इंवेस्ट करना ठीक रहेगा?
लंबे टाइम के लिए बचाव है सोना
सोने का एक बड़ा फ़ायदा यह है कि यह किसी एक कंपनी, एक इकॉनमी या एक करेंसी पर निर्भर नहीं करता है. लंबे समय से संकट के समय सोना एक बचाव का काम करता रहा है. जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता है, तो सोना अक्सर टिका रहता है या बढ़ भी जाता है. अगर आपको जल्दी फंड चाहिए, तो आप ज्वेलरी, सोने के सिक्के बेच सकते हैं या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड रिडीम कर सकते हैं. यह जानकर सुकून मिलता है कि यह एसेट टैंजिबल है और दुनिया भर में पहचाना जाता है. शादी के मकसद के लिए सोने की एक एक्स्ट्रा इमोशनल और कल्चरल वैल्यू होती है. ज्वेलरी सिर्फ़ एक इन्वेस्टमेंट नहीं है. यह खुद सेरेमनी का हिस्सा बन जाती है. इस मायने में सोना सेविंग्स और सोशल एसेट दोनों के तौर पर काम आ सकता है.
नुकसान जिन्हें ज्यादातर लोग नजरअंदाज करते हैं
सोने से इनकम नहीं होती और यह इंटरेस्ट, डिविडेंड या रेंट नहीं देता. यह बस वहीं पड़ा रहता है. बहुत लंबे समय में इक्विटी और यहां तक कि कुछ फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स ने हिस्टोरिकल तौर पर सोने से बेहतर इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न दिया है. अगर आपका बच्चा आज 5 साल का है और आप 18 साल की उम्र में यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के लिए सेविंग कर रहे हैं, तो आपके पास 13 साल का रनवे है. उस दौरान, पढ़ाई का खर्च तेज़ी से बढ़ने की संभावना है. सोना कैपिटल को प्रोटेक्ट कर सकता है, लेकिन यह उसे उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ा सकता.
गोल्ड में इंवेस्ट स्मार्ट तरीका
ज़्यादातर समय के लिए ग्रोथ एसेट्स में इन्वेस्ट करना और इवेंट के करीब एक हिस्सा गोल्ड में बदलना ज़्यादा स्मार्ट हो सकता है. बजाय इसके कि सारी सेविंग्स को 10 से 15 साल के लिए गोल्ड में लॉक कर दिया जाए. गोल्ड को आपके बच्चे के फाइनेंशियल फ्यूचर में स्टार परफॉर्मर के बजाय सपोर्ट के तौर पर सबसे अच्छा माना जाता है. पहले पेरेंट्स बच्चों के भविष्य को देखकर गोल्ड खरीदकर रख लेते थे. लेकिन, कुछ सालों में सोने की कीमतों ने लोगों को अन्य विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है. अधिकतर लोग Gold ETF और डिजिटल गोल्ड जैसे ऑप्शनों की तरफ भी आकर्षित हो रहे हैं.
गोल्ड के नुकसान
सोने खरीदने के कुछ नुकसान भी हैं. इन पर मेकिंग चार्ज और GST की वजह से इसकी लागत बढ़ जाती है. सोना लंबे वक्त में उतना रिटर्न नहीं देता जितना SIP बगैरह से मिलता है. फिजिकल गोल्ड की सेफ्टी भी एक मुद्दा बना रहती है. SGB इस कमी को थोड़ा पूरा करता है क्योंकि उसमें ब्याज मिलता है. ऑनलाइन गोल्ड में इंवेस्ट करना एक तरह से सोना लेना ही है.
SIP भी बेहतर विकल्प
वहीं अगर SIP की बात की जाए तो इक्विटी SIP ने लंबे टाइम में 12–15% तक का औसत रिटर्न प्रदान किया है. कई फंड इससे भी अधिक रिटर्न दे चुके हैं. यदि आप 10–15 साल तक लगातार SIP करते रहते हैं तो कंपाउंडिंग आपके निवेश को कई गुना बढ़ा देती है. यदि किसी इंसान के पास महज 250–500 भी हैं तो भी यह स्टार्ट की जा सकती है. मार्केट डाउन होने पर भी SIP में फायदा होता है. क्योंकि, उस वक्त अधिक यूनिट मिलती हैं, जो आगे चलकर बेहतर रिटर्न प्रदान करती हैं.
SIP की चुनौतियां
हालांकि, SIP में भी कुछ जोखिम और चुनौतियां है. मार्केट उतार-चढ़ाव के कारण शॉर्ट टर्म में नुकसान देखने को मिल सकता है. इसके अलावा अगर कोई इसे बीच में रोक देता है, तो फंड कम हो सकता है. इसलिए SIP में लंबी अवधि और नियमितता बेहद अहम है.
डिसिप्लिन जरूरी
अगर आप बीच में SIP रोक देते हैं, तो फ्यूचर फंड कम बन सकता है. इसलिए एसआईपी में डिसिप्लिन जरूरी है. एक निश्चित रकम को करीब 15 साल तक चलते रहने से आपको अच्छा रिटर्न मिल सकता है. इसके अलावा गलत कैटेगरी के फंड चुनने से भी रिटर्न की उम्मीद कम हो जाती है.
बच्चों के लिए कौन बेहतर?
एक तरह से देखा जाए तो बच्चों के लिए शिक्षा, शादी जैसे लॉन्ग टर्म गोल्स के लिहाज से SIP बेहतर माना जात है. साथ ही यह लोगों की पसंद भी रहा है. छोटा सा निवेश कंपाउंडिंग की वजह से बड़ा फंड बन सकता है. हालांकि, आप गोल्ड को भी पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं. लोगों को 80:20 Rule के हिसाब से Best Strategy बनाना चाहिए. मतलब 80% निवेश SIP में और 20% निवेश Gold में करना चाहिए. SIP हाई ग्रोथ देगा तो वहीं गोल्ड सुरक्षा देगा. दोनों मिलकर एक मजबूत और सेफ पोर्टफोलियो बनाते हैं.
डिस्क्लेमर
इडिंया न्यूज डॉट इन किसी भी स्टॉक या म्यूचुअल फंड या IPO में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां केवल जानकारी दी गई है. किसी भी निवेश से पहले सेबी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से जरूर सलाह लें. यह जानकारी विभिन्न स्त्रोतों से ली गई है.