वो मुख्यमंत्री जिसने इंदिरा गांधी को दी थी चुनौती, छात्र आंदोलन ने बदल दी किस्मत, चिमनभाई पटेल की अनसुनी कहानी
Chimanbhai Patel: साल 1974 का वो दौर था, जब गुजरात की सड़कों पर गूंजते नारों ने सत्ता की नींव हिला दी थी. उस समय बढ़ते भ्रष्टाचार, महंगाई और नाराजगी के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल की कुर्सी तक चली गई थी. जब दिल्ली की गद्दी पर इंदिरा गांधी थीं, तो उस दौर में चिमनभाई पटेल एक सख्त और प्रभावशाली नेता हुआ करते थे. वे उस दौरान मुख्यमंत्री थे. हालांकि कहते हैं न कि किसी की किस्मत बदलने में देर नहीं लगती. उस दौरान समय का पहिया ऐसा पलटा कि छात्रों के गुस्से ने आंदोलन का रूप ले लिया और वो ‘नवनिर्माण आंदोलन’ बन गया. ये आंदोलन सत्ता के खिलाफ एक जन सैलाब बन गया और इस सैलाब ने मुख्यमंत्री तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल की कुर्सी तक छीन ली.
1973 में मुख्यमंत्री बने चिमनभाई पटेल
चिमनभाई पटेल को कांग्रेस का मजबूत संगठनकर्ता माना जाता था. 1973 में वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने. देश में इंदिरा गांधी की सरकार थी और गुजरात में भी कांग्रेस का शासन. उस समय गरीबी हटाओ के नारे ने जोर पकड़ा.
हॉस्टल में खाने की कीमत बढ़ने से आंदोलन
1973-74 में देश आर्थिक संकट से गुजर रहा था. तेल संकट था, जिसके कारण महंगाई बढ़ती जा रही थी. अहमदाबाद के एलडी इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में भी खाने की कीमत बढ़ाई गई, जिसके कारण छात्रों ने इसका विरोध करते हुए आंदोलन छेड़ दिया.
कैंटीन बिल का मुद्दा बना आवाज
ये आंदोलन शुरुआत में तो केवल एक कैंटीन बिल का मुद्दा था लेकिन जल्द ही वो राज्यव्यापी असंतोष में बदल गया. छात्रों ने भ्रष्टाचार और सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई.
'नवनिर्माण आंदोलन' मिला नाम
छात्रों ने इस आंदोलन को नवनिर्माण आंदोलन का नाम दिया और इसे व्यवस्था बदलने के तहत देखा. इस आंदोलन के तहत, सड़कों पर प्रदर्शन और झड़प देखने को मिलीं. विपक्षी दलों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया.
1974 में दिया इस्तीफा
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नजरें भी इस आंदोलन पर थीं. शुरुआत में चिमनभाई ने हालात संभालने की कोशिश की लेकिन हालात बिगड़ते देख फरवरी 1974 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया. गुजरात विधानसभा भंग हो गई और राष्ट्र्रपति शासन लागू हो गया.
इंदिरा गांधी और चिमनभाई में टकराव
1973-74 के दौरान इंदिरा गांधी और चिमनभाई पटेल में टकराव देखने को मिला. नवनिर्माण आंदोलन के दौरान जब हालात बिगड़ने लगे, तो चिमनभाई ने इस्तीफा देने से इनकार किया था. दिल्ली से इंदिरा गांधी ने कहा था कि या तो हालात सुधारे जाएं या फिर पद छोड़ दें.
1990 में दोबारा बने मुख्यमंत्री
वहीं चिमनभाई का कहना था कि वे जनादेश के आधार पर ही पद से हटेंगे. उस दौरान इंदिरा गांधी की बात न मानकर खुलकर उनके सामने न झुकने की बात को राजनीतिक चुनौती माना गया. इसके बाद चिमनभाई पटेल 1990 के दशक में फिर से गुजरात के मुख्यमंत्री बने.