Gypsy Tribe: मरने पर जश्न और बच्चा होने पर श्राप! महिआएं करती हैं जिस्म का धंधा, इस जनजाति में अनोखी रस्म
Gypsy Tribe: भारत में अलग अलग जनजाति और समुदाय के लोग रहते हैं. जिसकी वजह से सब की ही रस्मे और रिवाज अलग अलग होते हैं. भारत में अनगिनत जातियों, धर्मों, संस्कृतियों, भाषाओं, रीति-रिवाजों और परंपराओं को मानने वाले लोग रहते हैं. लेकिन, आज हम भारत की एक ऐसी खास जनजाति और उनकी एक ऐसी परंपरा के बारे में बताने वाले हैं जिसे जानकर आपको यकीन नहीं होगा. असल में, इस समुदाय के लोग जीवन जीने का एक ऐसा तरीका अपनाते हैं जो जीवन के सामान्य तौर-तरीकों से बिल्कुल ही अलग है. आमतौर पर, जब किसी परिवार में बच्चे का जन्म होता है तो ये लोग खुशी मनाते हैं और जब किसी की मृत्यु होती है तो शोक व्यक्त करते हैं. चलिए जान लेते हैं ऐसा क्यों किया जाता है.
सदियों से निभा रहे ये परंपरा
ये जनजातियाँ आज भी अपने सदियों पुराने रीति-रिवाजों और परंपराओं को निभा रही हैं; लेकिन इस प्रथा के पीछे क्या वजह है? यह समुदाय ऐसी परंपरा का पालन क्यों करता है जो समाज के सामान्य नियमों से बिल्कुल ही विपरीत है?
कौन सा समुदाय निभाता है ये परंपरा
जी हाँ, हम राजस्थान में रहने वाले जिप्सी समुदाय की ही बात कर रहे हैं. लगभग 24 परिवार समूहों से मिलकर बना यह समुदाय एक ऐसी प्रथा से पहचाना जाता है जो उन्हें सचमुच अद्वितीय बनाती है: नवजात शिशु के आगमन पर शोक मनाना, जबकि किसी व्यक्ति की मृत्यु पर खुशी मनाना.
मरने पर बांटते हैं मिठाई
मूल रूप से, इस समुदाय के लोग सामान्य चलन के बिल्कुल विपरीत व्यवहार करते हैं. जब इस जनजाति का कोई सदस्य मर जाता है, तो हर कोई नए कपड़े पहनता है, एक-दूसरे के साथ मिठाइयाँ बाँटता है और इस अवसर का जश्न मनाता है.
जिप्सी जनजाति मृत्यु का उत्सव क्यों मनाती है?
वास्तव में, जिप्सी जनजाति के लोग मृत्यु को एक बहुत अहम अवसर मानते हैं, क्योंकि यह आत्मा की उसके शरीर से मुक्ति का प्रतीक है. इस जनजाति का मानना है कि जीवन एक अभिशाप है, एक ऐसा दंड जो ईश्वर ने हमें दिया है.
नाचने से लेकर बजाते हैं ढोल
इसी विश्वास के चलते, जब कोई व्यक्ति गुज़र जाता है तो वे जश्न मनाते हैं. जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसके शव को ढोल की थाप पर गाते-नाचते हुए एक जुलूस के रूप में ले जाया जाता है. वे तब तक नाचते रहते हैं जब तक कि मृतक का शरीर पूरी तरह से राख में न बदल जाए.
बच्चे के जन्म पर देते हैं श्राप
जिप्सी जनजाति में, जब भी किसी घर में बच्चे का जन्म होता है, तो परिवार शोक मनाता है. इसके अलावा, इस अवसर पर नवजात शिशु को कोसा जाता है, और उस दिन घर में कोई भोजन नहीं पकाया जाता.
सेक्स वर्कर होती हैं महिलाएं
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस समुदाय की महिलाएँ यौन कार्य (sex work) के माध्यम से अपनी आजीविका कमाती हैं और अपने परिवारों का भरण-पोषण करती हैं.