Holi and Migraine Prevention: त्योहार की मस्ती के बीच सिरदर्द से बचने का यहां जानें एक्सपर्ट गाइड, धूमधाम से मना सकेंगे होली
Holi and Migraines Explained: होली का त्योहार कई बार माइग्रेन के मरीजों के लिए भारी पड़ सकता है. दरअसल, इस दौरान वातावरण में अचानक कई बदलाव देखने को मिलते हैं. जहां, तेज संगीत और रसायनों की गंध सीधे तौर पर दिमाग के ट्राइजेमिनल नर्व (Trigeminal Nerve) को तेज कर देती है, जिससे गंभीर सिरदर्द शुरू हो सकता है.
तो वहीं, दूसरी तरफ विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहार की भागदौड़ में लोग ज्यादातर पानी पीना और समय पर खाना भूल जाते हैं, जिससे रक्त शर्करा (Blood Sugar) गिर जाती है. इसके साथ ही यह स्थिति माइग्रेन अटैक के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है, इसलिए बचाव के लिए अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखना बेहद ही जरूरी हो जाता है.
सिंथेटिक रंगों से बचने की करें कोशिश
सिंथेटिक रंगों में मौजूद लेड और मरकरी जैसे रसायन और उनकी तेज गंध माइग्रेन के न्यूरोलॉजिकल ट्रिगर्स को और भी ज्यादा बढ़ाने का काम करती है.
डीजे और ढोल-नगाड़ों के पास न जांए
इसके अलावा डीजे और ढोल-नगाड़ों का तेज शोर 'ऑडिटरी ओवरलोड' पैदा करता है, जिससे दिमा की रक्त वाहिकाओं में खिंचाव के साथ-साथ दर्द होता है.
धूप में देर तक खेलने से हो सकती है समस्या
तो वहीं, दूसरी तरफ धूप में देर तक खेलने और कम पानी पीने से होने वाला निर्जलीकरण मस्तिष्क के ऊतकों (Tissues) को पूरी तरह से सिकोड़ता है, जो माइग्रेन की सबसे बड़ी वजह है.
रात तक जागने से नींद पर पड़ता है असर
देर रात तक जागने और सुबह जल्दी उठने से नींद का चक्र सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, जिससे तनाव हार्मोन (Cortisol) और भी ज्यादा बढ़ जाता है.
ज्यादा चीनी से सिर में हो सकता है दर्द
इन सब के अलावा होली के खास पकवानों में मौजूद ज्यादा चीनी और तेल रक्तचाप में अचानक उतार-चढ़ाव पैदा कर सिरदर्द पैदा कर सकता है.
माइग्रेन के मरीजों को गुलाल का करना चाहिए इस्तेमाल
डॉक्टरों के मुताबिक, माइग्रेन के मरीजों को तेज गंध वाले पक्के रंगों के बजाय प्राकृतिक और ऑर्गेनिक गुलाल का ही इस्तेमाल करना चाहिए.
शोर से बचने के लिए ईयरप्लग का करें इस्तेमाल
शोर से बचने के लिए ईयरप्लग का इस्तेमाल करने की कोशिश करें और धूप में निकलते समय सनग्लासेस पहनें ताकि आंखों पर पड़ने वाला तनाव कम हो सके.
शांत जगह जाकर करें आराम
तो वहीं, अटैक से बचने के लिए हर एक घंटे में पानी या फिर नींबू पानी पिएं और बीच-बीच में शांत जगह पर जाकर थोड़ा आराम कर लें.