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Last Hindu King: अगर पृथ्वीराज चौहान नहीं, तो कौन थे दिल्ली के अंतिम हिंदू राजा? 22 बार मुगलों को चटाई धूल

Hemchandra Vikramaditya History: जब भी दिल्ली के आखिरी हिंदू शासक की बात होती है तो जुबान पर सबसे पहला नाम आता है पृथ्वीराज चौहान का लेकिन, यह सच नहीं है. बहुत कम लोगों को ही पता है कि दिल्ली पर राज करने वाला आखिरी हिंदू शासक हेमचंद्र विक्रमादित्य थे जो की मुगलों के दो सौ साल के राज से पहले थे.  ऐसे में चलिए जानें वह भुला दिया गया सम्राट जिसने मुगलों को 22 बार हराया और दिल्ली में कुछ समय के लिए हिंदू शासन को फिर से स्थापित किया.
Last Updated: April 5, 2026 | 7:04 PM IST
The Rise of Hemu Vikramaditya - Photo Gallery
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हेमू विक्रमादित्य का उदय

हेमचंद्र विक्रमादित्य का जन्म लगभग 1501 ई. में रेवाड़ी में एक व्यापारी के बेटे के रूप में हुआ था. उसने अफ़ग़ान शासकों के अधीन 'वजन और माप' विभाग के अधीक्षक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, उसका जन्म अलवर (राजस्थान) क्षेत्र के राजगढ़ से तीन मील दूर स्थित माचेड़ी गांव में, एक धूसर ब्राह्मण (भार्गव) परिवार में हुआ था. वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि उसका जन्म एक बनिया परिवार में हुआ था.

How did Hemu become the ruler of Delhi? - Photo Gallery
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हेमू विक्रमादित्य कैसे बने दिल्ली के शासक?

हेमू विक्रमादित्य ने आदिल शाह सूरी की सेना में भर्ती होकर काम करना शुरू किया. इस दौरान उसने पंजाब, बंगाल, आगरा और बयाना जैसे क्षेत्रों में हुए विद्रोहों को दबाया और अपने विरोधियों को हराया. अक्टूबर 1556 में, हुमायूं की मृत्यु के बाद, उन्होंने दिल्ली की लड़ाई (तुगलकाबाद) में अकबर के गवर्नर तारदी बेग खान को बुरी तरह हराया. इस जीत के साथ ही हेमू ने दिल्ली की गद्दी पर कब्ज़ा कर लिया और 'विक्रमादित्य' की प्राचीन उपाधि धारण करके खुद को सम्राट घोषित कर दिया. रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 350 वर्षों तक चले अफ़ग़ान शासन के बाद, यह पहला मौका था जब किसी भारतीय राजा ने दिल्ली में प्रवेश किया और उस पर शासन किया.

Hemu Vikramaditya won approximately 22 battles. - Photo Gallery
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हेमू विक्रमादित्य ने करीब 22 लड़ाइयों में जीत हासिल की थी

हेमू विक्रमादित्य ने आदिल शाह के लिए 22 लड़ाइयां जीती थीं. कहा जाता है कि जब तक वह जीवित रहा, कोई भी उसे हरा नहीं सका. यही कारण है कि उसे अक्सर 'भारत का नेपोलियन' कहा जाता है.

Hemu Vikramaditya's brief rule over Delhi - Photo Gallery
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दिल्ली पर हेमू विक्रमादित्य संक्षिप्त शासन

दिल्ली पर हेमू विक्रमादित्य संक्षिप्त शासन
7 अक्टूबर से 5 नवंबर, 1556 तक चला उसका शासनकाल, सदियों बाद दिल्ली पर किसी हिंदू शासक का आखिरी नियंत्रण था. पुराने किले में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ राज्याभिषेक होने के बाद, हेमू ने संस्कृत और फ़ारसी भाषाओं में सिक्के जारी किए. उसने योग्यता के आधार पर सेना में सुधार किए, अधिकारियों को बदलकर भ्रष्टाचार पर लगाम कसी, व्यापार को बढ़ावा दिया, जमाखोरी पर प्रतिबंध लगाया और गौ-हत्या को पूरी तरह से वर्जित कर दिया. उसके ये सभी कदम, अपने एक महीने के शासनकाल के दौरान निष्पक्ष और सुशासन स्थापित करने के उद्देश्य से उठाए गए थे.

How did Hemu Vikramaditya meet his downfall at Panipat? - Photo Gallery
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हेमू विक्रमादित्य का पानीपत में कैसे हुआ पतन?

5 नवंबर, 1556 को, युवा अकबर और उसके संरक्षक व मुख्य सैन्य रणनीतिकार बैरम खान के नेतृत्व में मुग़ल सेना ने दिल्ली को वापस हासिल करने के लिए हमला बोल दिया. अकबर की सेना के खिलाफ आगे बढ़ते हुए, हेमू ने 5 नवंबर, 1556 को पानीपत की दूसरी लड़ाई में 50,000 सैनिकों और हाथियों का नेतृत्व किया. एक भटका हुआ तीर उसकी आंख में लगा, जिससे वह बेहोश हो गया और उसे पकड़ लिया गया; अकबर ने उसका सिर कलम करने का आदेश दिया, जिसे कथित तौर पर बैरम खान ने अंजाम दिया.

What do historians say about Hemu Vikramaditya? - Photo Gallery
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हेमू विक्रमादित्य के बारे में इतिहासकार क्या बताते हैं?

पानीपत के आधिकारिक पेज पर, इतिहासकार ए.एल. श्रीवास्तव के हेमू के बारे में कहे गए शब्द उद्धृत किए गए हैं. वह लिखते हैं, कि आधुनिक यूरोपीय लेखकों ने मध्यकालीन इतिहासकारों के साथ मिलकर हेमू में कमियां निकाली हैं. हालांकि, इतिहास का कोई भी निष्पक्ष विद्यार्थी हेमू के नेतृत्व गुणों और उस तत्परता की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकता, जिसके साथ उसने राजधानी से विदेशी शासन को उखाड़ फेंकने का अवसर लपक लिया. यदि हुमायूं जैसे विदेशी और शेर शाह के वंशज भारत की संप्रभुता पर दावा कर सकते थे, तो हेमू, जो इस धरती का असली मूल निवासी था, अपनी पैतृक भूमि पर शासन करने का उतना ही वैध, यदि उससे बेहतर नहीं, तो भी समान रूप से वैध दावा रखता था.

Hemchandra Vikramaditya was a skilled warrior. - Photo Gallery
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हेमचंद्र विक्रमादित्य एक कुशल योद्धा थें

हेमू न केवल एक असाधारण योद्धा था, बल्कि एक कुशल प्रशासक भी था. उसके मित्र और शत्रु, दोनों ही उसकी सैन्य-क्षमता को स्वीकार करते थे. इतिहासकार आर.सी. मजूमदार ने शेर शाह पर लिखी एक किताब के 'हेमू: एक भुला दिया गया नायक' शीर्षक वाले अध्याय में यह उल्लेख किया है कि पानीपत के युद्ध में घटी महज़ एक आकस्मिक घटना ने ही हेमू की जीत को हार में बदल दिया. अन्यथा, वह मुगलों के बजाय दिल्ली में एक हिंदू राजवंश की स्थापना कर चुके होते.

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