ट्राइग्लिसराइड्स क्या है जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के लिए जिम्मेदार होता है? डॉक्टर से जानें इसके लक्षण और इलाज
ट्राइग्लिसराइड्स खून में पाया जाने वाला एक तरह का फैट (लिपिड) होता है. जब हम खाते हैं, तो हमारा शरीर उन कैलोरी को तुरंत ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है जिनकी उसे जरूरत नहीं होती. ट्राइग्लिसराइड्स फैट सेल्स में जमा होते हैं, जिन्हें बाद में खाने के बीच एनर्जी के लिए हार्मोन से रिलीज़ किया जाता है. मैक्स हेल्थकेयर में डाइटीशियन डॉ. रितिका समद्दर के अनुसार, अगर आप अपनी डाइट में बहुत ज़्यादा चीनी ले रहे हैं, तो हो सकता है कि आपके ट्राइग्लिसराइड का लेवल ज़्यादा हो. आपके शरीर में ज़्यादा चीनी को ट्राइग्लिसराइड्स में बदलने और फिर उन्हें फैट के रूप में स्टोर करने की आदत होती है. जानते हैं ग्वालियर के आरोग्यधाम हॉस्पिटल के डॉक्टर तोरन यादव से इसके लक्षण और बचाव.
ट्राइग्लिसराइड्स क्या हैं?
ग्वालियर आरोग्य धाम के डॉक्टर तोरन यादव बताते हैं कि ट्राइग्लिसराइड्स फैट (लिपिड) होते हैं जो शरीर में जमा फैट का 99% हिस्सा होते हैं. यह ग्लिसरॉल और तीन फैटी एसिड ग्रुप से बना एक एस्टर है. अगर हम रेगुलर तौर पर जितनी कैलोरी बर्न करते हैं, उससे ज़्यादा खाते हैं, खासकर मीठे ड्रिंक्स और हाई-फैट फूड्स तो इससे हाई ट्राइग्लिसराइड्स हो सकते हैं. इसे 'हाइपरट्राइग्लिसराइडेमिया' कहते हैं.
स्ट्रोक का खतरा
हाई ट्राइग्लिसराइड्स, हाई LDL (खराब) कोलेस्ट्रॉल या कम HDL (अच्छा) कोलेस्ट्रॉल के साथ मिलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकते हैं. कभी-कभी बहुत ज़्यादा ट्राइग्लिसराइड्स लेवल (आमतौर पर >500) गंभीर पैंक्रियाटाइटिस का कारण बन सकते हैं जो एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसमें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है.
नॉर्मल और हाई ट्राइग्लिसराइड लेवल क्या होते हैं?
हमारे खून में ट्राइग्लिसराइड्स की रेंज 150 mg/dL या इससे कम हो तो यह अच्छी होती है. अगर यह लेवल 150 से 199 mg/dL के बीच है, तो इसे हाई ट्राइग्लिसराइड्स कहते हैं. 200 mg/dL रेंज वालों को डॉक्टर की सलाह पर दवा लेनी चाहिए. 500 या उससे ज्यादा वालों को हाई लेवल होता है, जो खतरनाक होता है.
ट्राइग्लिसराइड कम करने के सबसे अच्छे तरीके क्या हैं?
इसे कम करने के लिए इंसान को खाने-पीने पर विशेष ध्यान देना चाहिए. मीठी चीज़ें नहीं खाना चाहिए. कुकीज़, पेस्ट्री, मीठे डेज़र्ट और फलों के जूस जैसी ज़्यादा शुगर वाली खाने की चीज़ों का सेवन कम करें. रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज चुनना चाहिए. सफेद चावल, ब्रेड, मैदे से बना पास्ता या कॉर्नफ्लेक्स जैसे रिफाइंड अनाज खाने से सेंसिटिव लोगों में ट्राइग्लिसराइड्स काफ़ी बढ़ सकते हैं. इसके बजाय, मल्टीग्रेन चपाती जैसे साबुत अनाज और क्विनोआ, जौ और बाजरा जैसे दूसरे अनाज चुनें.
रेड मीट की जगह मछली चुनें
रेड मीट की जगह सैल्मन, मैकेरल, ट्राउट और सार्डिन जैसी फैटी मछली खाएं. इन मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर होता है, जो ट्राइग्लिसराइड लेवल को कम करने में मदद करते हैं. कार्डियोवैस्कुलर फ़ायदे पाने के लिए हफ़्ते में कम से कम दो बार अपनी डाइट में मछली शामिल करने की कोशिश करें.
नट्स और हरी सब्ज़ियां खाएं
अपने खाने में ज़्यादा नट्स और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां शामिल करना चाहिए. बादाम, अखरोट और पिस्ता जैसे नट्स में हेल्दी फैट, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं, जो ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में मदद कर सकते हैं. इसी तरह, पालक, केल और स्विस चार्ड जैसी हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ पोषक तत्वों से भरपूर और कैलोरी में कम होती हैं, जिससे वे खाने के लिए बहुत अच्छे ऑप्शन बन जाते हैं.
ज़्यादा प्लांट फ़ूड खाएं
बीन्स, मटर, नट्स और दाल जैसे वेजिटेबल प्रोटीन आपकी हेल्थ को बेहतर बनाने के बहुत अच्छे तरीके हैं और आपके ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल को कम करने पर सीधा असर डालेंगे. ज़्यादा फाइबर वाले फ़ूड आपके ट्राइग्लिसराइड्स और LDL कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करेंगे. बीन्स, साबुत अनाज - ओट्स, क्विनोआ, ब्राउन राइस; नट्स और सीड्स, बादाम, चिया सीड्स, अलसी, फल और सब्ज़ियां खाएं.ज़्यादा फाइबर वाला पानी पिएं.
हेल्दी ऑयल खाएं
ट्राइग्लिसराइड्स लेवल कम करने के लिए MUFA वाले ऑयल का इस्तेमाल बढ़ाएं. बटर, घी, शॉर्टनिंग, लार्ड या मार्जरीन जैसे सैचुरेटेड फैट की जगह कैनोला ऑयल, राइस ब्रान और सोयाबीन ऑयल जैसे MUFA वाले ऑयल इस्तेमाल करें.
डिस्क्लेमर
यह लेख सिर्फ सूचना और सामान्य जानकारी के लिए लिख गाया है. यह मेडिकल सलाह नहीं है. किसी भी तरह की बीमारी में डॉक्टर और एक्सपर्ट्स की राय लें. इसे पढ़कर ट्रीटमेंट नहीं करें क्योंकि यह कई स्त्रोतों की जानकारी पर आधारित है. Indianews.in किसी भी तरह के तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है. परेशानी के लिए आप स्वयं जिम्मेवार होंगे.