कितने भारतीयों को मिला था निशान-ए-पाकिस्तान? कौन थें वो शख्स जिसे दोनों देशों के सम्मान से नवाजा गया
कितने भारतीयों को मिला है 'निशान-ए-पाकिस्तान'?
पाकिस्तान का सर्वोच्च पुरस्कार अब तक चार भारतीयों को प्रदान किया गया है. इन प्राप्तकर्ताओं में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई (1990), अभिनेता दिलीप कुमार (1998), सैयद अली शाह गिलानी (2020), और हाल ही में, दाऊदी बोहरा समुदाय के प्रमुख सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन (2023) शामिल हैं.
भारत रत्न की स्थापना कब हुई थी?
भारत का सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' है, जिसकी स्थापना 1954 में हुई थी. यह पुरस्कार कला, साहित्य, विज्ञान, जनसेवा और खेल जैसे क्षेत्रों में असाधारण सेवा या सर्वोच्च स्तर के प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है.
भारत रत्न प्राप्त करने वाले एकमात्र पाकिस्तानी नागरिक
खान अब्दुल गफ्फार खान, जिन्हें लोकप्रिय रूप से सीमांत गांधी (Frontier Gandhi) के नाम से जाना जाता है, एकमात्र ऐसे पाकिस्तानी नागरिक हैं जिन्हें भारत रत्न (1987 में) से सम्मानित किया गया है.
खान अब्दुल गफ्फार खान महात्मा गांधी के एक करीबी अनुयायी थे
गफ्फार खान महात्मा गांधी के एक करीबी अनुयायी थे और उन्होंने खुदाई खिदमतगार नामक अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया था. उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना, भारत की ओर से उनके बलिदानों और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनकी भूमिका के प्रति एक गहरा सम्मान माना गया.
दोनों देशों के सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने वाले एकमात्र व्यक्ति
पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई दुनिया के उन चुनिंदा व्यक्तियों में से एक हैं, जिन्हें भारत का 'भारत रत्न' (1991) और पाकिस्तान का 'निशान-ए-पाकिस्तान' (1990) दोनों सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुए हैं.
निशान-ए-पाकिस्तान किस कारण से भारतीयों को प्रदान किया गया था?
मोरारजी देसाई को भारत-पाकिस्तान संबंधों को बेहतर बनाने के प्रयासों की मान्यता स्वरूप 'निशान-ए-पाकिस्तान' से सम्मानित किया गया था. वहीं, दिलीप कुमार का चयन उनकी सांस्कृतिक सेवाओं के लिए किया गया था.