पंचायत सदस्य से शुरू किया राजनीतिक सफर, अब बनाई खुद की पार्टी; क्या टीएमसी को होगा नुकसान?
Humayun Kabir Profile: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी सनिष्कासित कर दिया है. जिसके बाद उन्होंने खुद की पार्टी बना ली है. ऐसे में आइए जानते हैं कि अब तक उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है? आखिर उन्होंने अपनी पार्टी क्यों बनाई. क्या हुमायूं कबीर की पार्टी को मुस्लिमों को वोट मिलेगा? ये तो चुनाव नतीजों के बाद ही पता चलता है.
हुमायूं कबीर ने बनाई खुद की पार्टी
तृणमूल कांग्रेस से निकाले जाने के बाद हुमायूं कबीर ने खुद की पार्टी बना ली है और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से गठबंधन कर लिया है.
हुमायूं कबीर की पार्टी का क्या नाम है?
हुमायूं कबीर की पार्टी का नाम आम जनता उन्नयन पार्टी है. हुमायूं कबीर की पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
पंचायत सदस्य से शुरू किया राजनीतिक सफर
हुमायूं कबीर ने अपनी राजनीतिक यात्रा एक पंचायत सदस्य के तौर पर शुरू की थी और बाद में वे विधायक बन गए. आज कई पार्टियों को बदलने वाले अपने रंगीन राजनीतिक करियर के बाद वे अपनी खुद की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हैं.
हुमायूं कबीर किन-किन पार्टियों में रहे?
हुमायूं कबीर किसी न किसी समय राज्य की सभी प्रमुख पार्टियों कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के साथ जुड़े रहे हैं. अब वे अपनी खुद की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हैं और मुर्शिदाबाद की नौदा और रेजीनगर सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं.
हुमायूं कबीर की संपत्ति
चुनावी हलफनामे के अनुसार, हुमायूं कबीर की वार्षिक आय ₹13.26 लाख है, जो वे मुख्य रूप से अपने व्यवसाय से कमाते हैं. उन्होंने अपने पास नकद राशि के रूप में ₹4.52 लाख घोषित किए हैं.
हुमायूं कबीर की शिक्षा
हुमायूं कबीर ने 2017 में हिमालयन यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था. उनके हलफनामे में उनके खिलाफ 4 आपराधिक मामलों का भी ज़िक्र है, जिनमें से एक मामला कथित तौर पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने से जुड़ा है.
कब डाला जाएगा वोट
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर दो चरणों में वोट डाले जाएंगे. जिसको लेकर 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे और नतीजे 4 मई को आएंगे.
टीएमसी को होगा नुकसान
हुमायूं कबीर की पार्टी से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को नुकसान हो सकता है. अब तक मुस्लिमों का पूरा वोट टीएमसी को जाता था. लेकिन इस पार हुमायूं कबीर की पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से गठबंधन करने से मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सकता है.