Railways New Rules: अब TTE नहीं करेगा आपका इंतज़ार! ट्रेन में देरी से पहुंचे तो रद्द हो जाएगा टिकट, इन यात्रियों को होगा बड़ा फायदा
Indian Railways New Rules: सावधान रेल यात्री! भारतीय रेलवे अब अपनी पटरियों के साथ-साथ नियमों की रफ़्तार भी बदलने जा रहा है. स्टेशन पर देरी से पहुँचना अब आपकी जेब और सफर दोनों पर भारी पड़ सकता है. क्या है रेलवे का नया ‘डिजिटल वारंट’ जिसने यात्रियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं? आइए जानते हैं इस बड़े बदलाव के मुख्य बिंदु.
समय की पाबंदी अनिवार्य
अब ट्रेन छूटने या स्टेशन से चलने के बाद TTE यात्री का इंतज़ार नहीं करेगा. यात्रियों को अपनी आवंटित सीट पर समय से उपस्थित होना होगा, वरना सीट हाथ से जा सकती है.
डिजिटल उपस्थिति और EFT का उपयोग
TTE अब अपने EFT (Electronic Filling Tablet) का उपयोग रीयल-टाइम चेकिंग के लिए करेगा. जैसे ही कोई यात्री अपनी सीट पर अनुपस्थित पाया जाएगा, TTE उसे तुरंत सॉफ्टवेयर में अपडेट कर देगा.
दूसरे स्टेशन तक इंतज़ार का खत्म
पुराने नियम के अनुसार, TTE अगले एक या दो स्टेशनों तक यात्री के आने का इंतज़ार करते थे. अब रेलवे सॉफ्टवेयर में बदलाव के बाद, यात्री के न मिलने पर उसे तुरंत 'अनुपस्थित' घोषित कर दिया जाएगा.
CRIS और सॉफ्टवेयर अपडेट
रेल मंत्रालय ने CRIS (रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र) को अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव करने के निर्देश दिए है. यह तकनीक सुनिश्चित करेगी कि सीट खाली होते ही वह तुरंत सिस्टम में दिखने लगे.
SMS के जरिए तत्काल सूचना
जैसे ही आपकी सीट किसी अन्य को आवंटित होगी या आपका टिकट रद्द माना जाएगा, इसकी सूचना सीधे आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS के जरिए भेज दी जाएगी. पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है.
वेटिंग और RAC यात्रियों को बड़ा फायदा
इस बदलाव का सबसे सकारात्मक पक्ष उन यात्रियों के लिए है जो Waiting या RAC टिकट पर यात्रा कर रहे हैं. खाली हुई सीटें अब बिना किसी देरी के प्राथमिकता के आधार पर उन्हें आवंटित कर दी जाएंगी.
सीटों का पूर्ण उपयोग
रेलवे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रा के दौरान कोई भी सीट खाली न रहे. अक्सर यात्री बोर्ड नहीं करते और सीट खाली रह जाती थी, जबकि अन्य लोग परेशान होते थे. अब हर खाली सीट का उपयोग हो सकेगा.
डिजिटलीकरण और पारदर्शिता
यह कदम भारतीय रेलवे के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है. इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और भ्रष्टाचार या मैन्युअल सीट आवंटन में होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी.