Live
Search
  • Home>
  • Photos»
  • न जहर, न दांत सिर्फ ताकत! ऐसे पलभर में शिकार खत्म करता है रॉक पाइथन, जानें इस खतरनाक जीव के बारे में

न जहर, न दांत सिर्फ ताकत! ऐसे पलभर में शिकार खत्म करता है रॉक पाइथन, जानें इस खतरनाक जीव के बारे में

Indian Rock Python: हिमाचल प्रदेश के ऊना ज़िले के ढलवारी गांव के पास स्थित अमलाईहर जंगल में तब दहशत फैल गई, जब वहां से गुजर रहे कुछ स्थानीय युवकों का सामना दो अजगरों से हो गया. इन विशालकाय जीवों को देखते ही वहां से गुजर रहे लोग पूरी तरह से डर गए और उनकी बोलती बंद हो गई. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि यह विशालकाय अजगर कौन से प्रजाती के होते है, जिसकी लंबाई लगभग 10 से 15 फीट के बीच आंकी जा रही है.
Last Updated: March 23, 2026 | 8:22 PM IST
The Indian Rock Python is considered to be India's largest snake. - Photo Gallery
1/7

इंडियन रॉक पाइथन भारत का सबसे बड़ा सांप माना जाता है

इंडियन रॉक पाइथन' (भारतीय रॉक अजगर) भारत के जंगलों का मूल निवासी, यह विशाल अजगर अपनी त्वचा पर बने भूरे रंग के विशिष्ट निशानों से पहचाना जाता है और इसकी लंबाई 25 फीट तक हो सकती है. इसका शरीर असाधारण रूप से मोटा, मज़बूत और शक्तिशाली होता है. यह भारत का सबसे बड़ा बिना जहर वाला सांप माना जाता है.

How do Indian Rock Pythons hunt without venom? - Photo Gallery
2/7

बिना जहर के इंडियन रॉक पाइथन कैसे करते है शिकार?

बिहार सरकार के वन और वन्यजीव विभाग के अनुसार, इंडियन रॉक पाइथन ज़हरीला नहीं होता; हालांकि, इसमें ज़बरदस्त शारीरिक शक्ति होती है. एक बार जब यह अपने शिकार को अपने शरीर के घेरे में कस लेता है, तो शिकार का दम घुटने से मरना तय हो जाता है. अजगरों की आंखों के पास विशेष संवेदी गड्ढे (sensory pits) होते हैं. ये गड्ढे सांप को अपने शिकार के शरीर से निकलने वाली गर्मी का पता लगाने में मदद करते हैं, जिससे वह घने अंधेरे में भी अपने शिकार को आसानी से ढूंढ़ लेता है. इसका मुख्य भोजन छोटे स्तनधारी जीव होते हैं.

The Indian Rock Python is found in various parts of India. - Photo Gallery
3/7

इंडियन रॉक पाइथन भारत के विभिन्न हिस्सों में पाया जाता है

यह सांप भारत के कई क्षेत्रों में पाया जाता है. उत्तर से लेकर दक्षिण तक, जिसमें पश्चिमी घाट, बंगाल, ओडिशा, झारखंड और असम जैसे पूर्वी राज्य, साथ ही मध्य भारत, गुजरात के जंगल और यहां तक कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भी शामिल हैं. अजगर आमतौर पर दलदलों, नदी के किनारों, झीलों के तटों, मैंग्रोव जंगलों और घने जंगलों में रहते हैं. गौरतलब है कि एक बेहतरीन तैराक होने के कारण, यह अजगर अपना काफी समय जल स्रोतों के आसपास बिताना पसंद करता है. यह पेड़ों पर चढ़ने में भी सक्षम है. इसकी सबसे खास विशेषता इसके शिकार करने का तरीका है. यह छोटे से मध्यम आकार के स्तनधारियों, पक्षियों और छिपकलियों से लेकर हिरण जैसे बड़े जीवों तक का शिकार करता है, और फिर उन्हें पूरा का पूरा निगल जाता है.

The Indian Rock Python swallows its prey whole. - Photo Gallery
4/7

इंडियन रॉक पाइथन अपने शिकार को पूरा निगल जाता है

गुजरात वन विभाग के अनुसार, जैसे ही कोई अजगर अपने शिकार को देखता है, वह तुरंत हमला करता है और अपने लंबे शरीर को शिकार के चारों ओर कई बार लपेट लेता है. यह शिकार पर दबाव डालता है ताकि उसकी सांस रुक जाए, जिससे उसकी धड़कन बंद हो जाती है. इसके बाद, अपने जबड़ों को असाधारण रूप से चौड़ा करके, अजगर अपने शिकार को एक ही बार में पूरा निगल जाता है. एक इंडियन रॉक पाइथन की औसत लंबाई 8 से 12 फीट तक होती है, हालांकि कुछ अजगर 15 से 25 फीट तक लंबे हो सकते हैं. इसके अलावा, इनका वज़न 52 किलोग्राम तक हो सकता है.

The pattern of the Indian Rock Python serves as camouflage. - Photo Gallery
5/7

इंडियन रॉक पाइथन के पैटर्न के कारण छलावरण का काम करता है

इंडियन रॉक पाइथन के शरीर पर भूरे, सलेटी, पीले और काले रंग के पैटर्न बने होते हैं, जो छलावरण (camouflage) का काम करते हैं, जिससे यह जंगल के माहौल में आसानी से घुल-मिल जाता है. अजगर को इस समय कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है, और इसकी आबादी लगातार घट रही है. इसी वजह से, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने इसे संकट के करीब (Near Threatened) श्रेणी में रखा है. वनों की कटाई, कृषि का विस्तार, शहरी फैलाव, अवैध शिकार, सड़क दुर्घटनाएं और मानव-वन्यजीव संघर्ष इसकी घटती आबादी के मुख्य कारणों में से हैं.

How do Indian Rock Pythons help maintain the balance of the forest? - Photo Gallery
6/7

इंडियन रॉक पाइथन जंगल का संतुलन बनाने में कैसे करते है मदद?

एक अध्ययन से पता चला है कि जिन अजगरों को पकड़कर दूसरी जगह ले जाया जाता है, भले ही उन्हें 13 किलोमीटर दूर ही क्यों न छोड़ा गया हो, वे अपने मूल आवास तक वापस लौटने में सक्षम होते हैं; उनमें दिशा का असाधारण बोध होता है! सर्दियों के महीनों में, वे ज़्यादातर सुस्त रहते हैं, जबकि गर्मियों में, वे सुबह के शुरुआती घंटों और देर शाम के समय सबसे ज़्यादा सक्रिय रहते हैं. इंडियन रॉक पाइथन न केवल जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र का एक हिस्सा है; बल्कि यह चूहों और खरगोशों जैसी प्रजातियों की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करके पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

Why are Indian Rock Pythons dangerous? - Photo Gallery
7/7

इंडियन रॉक पाइथन खतरनाक क्यों हैं?

हिमाचल प्रदेश में दिखें इंडियन रॉक पाइथन पर विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों की शुरुआत के साथ ही, ऐसे जंगली जीव अक्सर अपने बिलों से बाहर निकलकर धूप सेंकने या ठंडी जगहों की तलाश में आते हैं, और अक्सर रिहायशी इलाकों के करीब पहुंच जाते हैं. इस घटना की रिपोर्ट मिलने के बाद, वन विभाग ने स्थानीय निवासियों और इस क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों के लिए एक अलर्ट जारी किया है. उन्हें सलाह दी गई है कि जंगल के रास्तों से गुजरते समय वे विशेष सावधानी बरतें. वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे इन जंगली जानवरों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचाएं. यदि किसी को भी कहीं ऐसा कोई जंगली जानवर दिखाई देता है, तो उनसे आग्रह किया जाता है कि वे घबराने या जानवर को उकसाने के बजाय, तुरंत संबंधित वन अधिकारियों को सूचित करें, ताकि मनुष्यों और वन्यजीवों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

More News