जल्द ही हो सकता है तीसरा विश्व युद्ध, ये पांच क्षेत्र बन सकते हैं मुख्य केंद्र
More About World Three: अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ डॉ. रॉबर्ट फार्ले ने चेतावनी देते हुए कहा कि साल 2026 वैश्विक शांति के लिए अत्यंत नाजुक हो सकता है और तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत भी हो सकती है. तो वहीं, उनके मुताबिक, दुनिया के पांच प्रमुख भू-राजनीतिक हॉटस्पॉट्स में जारी तनाव किसी भी समय एक बड़े सैन्य टकराव का रूप ले सकते हैं. यूक्रेन और ताइवान जैसे पुराने विवादों के साथ-साथ ग्रीनलैंड और भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ती हलचल इस विनाशकारी आशंका को और ज्यादा पुख्ता कर रही है.
ग्रीनलैंड
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच तेजी से बढ़ता विवाद ट्रांसअटलांटिक संबंधों को खत्म कर सैन्य टकराव पैदा कर सकता है. तो वहीं, पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग और सैन्य बल के इस्तेमाल की ऐतिहासिक धमकियों ने पुराने सहयोगियों के बीच पूरू तरह से दरार भी पैदा कर सकती है.
यूक्रेन
यूक्रेन में रूस की बढ़ती आक्रामकता और यूरोपीय देशों द्वारा सेना भेजने के सुझाव से यह युद्ध व्यापक विनाशकारी रूप ले सकता है. रूस की आर्थिक मंदी पुतिन को और अधिक आक्रामक होने पर मजबूर कर रही है, जिससे युद्ध के और फैलने का डर है. फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों द्वारा यूक्रेन में सैनिक भेजने के सुझाव ने रूस को सीधे तौर पर उकसाया है.
ताइवान
ताइवान पर चीन की सैन्य पकड़ और अमेरिकी रक्षा प्रतिबद्धता में अनिश्चितता पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में बड़े युद्ध की वजह बन सकती है. इसके अलावा चीन का मानना है कि अगर अमेरिका अन्य मोर्चों (जैसे आर्कटिक या यूक्रेन) पर व्यस्त रहता है, तो ताइवान पर कब्जा करने का यह सबसे सही समय होगा.
ईरान
आंतरिक रूप से कमजोर ईरान के खिलाफ अमेरिकी धमकियां और उसमें रूस-चीन का निवेश पूरे मध्य पूर्व को अराजकता में झोंक सकता है. अमेरिकी धमकियों और ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता ने इस क्षेत्र को बारूद के ढेर पर बैठा दिया है. क्योंकि रूस और चीन ने ईरान के शासन को बचाए रखने में भारी निवेश किया है, इसलिए ईरान पर किसी भी बड़े हमले का मतलब होगा कि इन महाशक्तियों को भी इस खेल में सीधे तौर पर उतरना पड़ेगा, जिससे मध्य पूर्व की अराजकता विश्व स्तर पर फैल जाएगी.
भारत और पाकिस्तान
भारत और पाकिस्तान के बीच 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे सैन्य जवाबी हमलों से उपजा तनाव परमाणु युद्ध का खतरा पैदा कर रहा है. दोनों ही देश परमाणु संपन्न हैं और उनके बीच का कोई भी पारंपरिक युद्ध बहुत जल्द परमाणु संघर्ष में बदल सकता है. इस विवाद में चीन और अमेरिका जैसे देशों के परोक्ष रूप से शामिल होने की संभावना इसे दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्ष बिंदुओं में से एक बनाती है.