जब अश्लील वेबसाइट पर खुद की तस्वीर देख चौंकी जान्हवी; आखिर क्या होता है डीपफेक, इससे कैसे बचे?
Janhavi Kapoor Deepfake: आजकल जैसे-जैसे एआई और तकनीकी दुनिया विकसित हो रही है. उससे खतरा भी उतना ही बढ़ता जा रहा है. लोगों के चेहरों को एआई के जरिए आपत्तिजनक कंटेट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो उन्हें बदनाम कर रहा है. बॉलीवुड अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने भी डीपफेक के मामले का जिक्र किया, जब उनके साथ भी हुआ गलत. चलिए जानते हैं पूरा वाकया. साथ ही ये भी कि क्या होता है डीपफेक और कैसे इससे कैसे बचें.
डीपफेक का शिकार हुई जान्हवी
बॉलीवुड अभिनेत्री जान्हवी कपूर हाल ही में राज शामानी के पॉडकास्ट में पहुंची थीं. वहां उन्होंने बताया, 'मुझे नहीं पता कि यह तकनीकी रूप से डीपफेक था या नहीं, लेकिन कुछ ऐसा ही था. मैंने एक अश्लील साइट पर अपनी तस्वीर देखी.'
कब हुआ था यह वाकया?
एक्ट्रेस ने बताया कि यह घटना उनके स्कूल के दौरान की है. उन्होंने बताया, 'हमारे स्कूल में आईटी की क्लास थी और लड़के मजे के लिए उन साइटों पर जाते थे. और मेरी तस्वीरें वहां थीं. यह तब की बात है जब मैं अभी स्कूल में ही थी. यह एक अजीब अनुभव था.'
कम उम्र में हुई इस घटना ने उन्हें परेशान कर दिया
अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि इस घटना ने उन्हें कम उम्र में ही सार्वजनिक जीवन की कड़वी सच्चाइयों का सामना करने के लिए मजबूर कर दिया.
क्या होता है डीपफेक?
डीपफेक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित कृत्रिम मीडिया (वीडियो, ऑडियो आदि) हैं, जिनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को किसी ऐसी बात को कहते या करते हुए दिखाना है जो उसने वास्तव में कभी नहीं की. कई आधुनिक डीपफेक आवाज की नकल, कृत्रिम वीडियो कॉल और एआई द्वारा निर्मित सामग्री जैसी तकनीकों का उपयोग करके व्यक्तियों के संवाद करने के तरीके की नकल करते हैं.
कैसे काम करता है डीपफेक?
डीपफेक किसी व्यक्ति के ऑडियो, वीडियो और/या छवियों के असली नमूने से सीखता है. उस व्यक्ति के दिखने, बोलने या चलने के पैटर्न की पहचान करता है. ऐसी नई सामग्री उत्पन्न करता है जो उन पैटर्न को इतनी सटीकता से दर्शाती है कि देखने वाले को धोखा दे सके.
कैसे पहचाने कि डीपफेक है या नहीं?
डीपफेक वीडियो में पलकें न झपकाना भी एक खामी है. स्वाभाविक मानवीय क्रिया, जैसे कि नियमित रूप से पलकें झपकाना को डीपफेक तकनीक से दोहराना मुश्किल है.
क्या है कानूनी नियम?
अगर आपको किसी डीपफेक स्कैम का शक है, तो इसकी रिपोर्ट नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर करें या नेशनल साइबर हेल्पलाइन (1930) से संपर्क करें. इसके अलावा, आप 'संचार साथी पोर्टल' के ज़रिए साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जहाँ आप अपने केस को ट्रैक भी कर सकते हैं.