Kanya Pujan On Ashtami & Navami: अष्टमी और नवमी को इस तरह करें कन्या पूजन, मां दुर्गा की होगी कृपा
Kanya Pujan On Ashtami & Navami: नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा-अर्चना को समर्पित है. इस दौरान भक्त पूरी तरह से भक्ति में लीन हो जाते हैं और अत्यंत श्रद्धा के साथ देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं. यह त्योहार दस दिनों तक चलता है जो अश्विन मास की प्रतिपदा से शुरू होकर दशहरे पर समाप्त होता है और इस दौरान देवी की स्तुति में भजन-कीर्तन किए जाते हैं. इन नौ दिनों में देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है और दसवें दिन दशहरे का पर्व मनाया जाता है. इस अवधि में किए जाने वाले विभिन्न रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों में कन्या पूजन का विशेष महत्व है.
कन्या पूजन करना है शुभ
भक्त नौ छोटी कन्याओं की पूजा करते हैं, जिन्हें देवी के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है. कुछ भक्त इस अनुष्ठान को त्योहार के आठवें दिन संपन्न करते हैं. इस समारोह को देवी दुर्गा के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है. इसे अत्यंत श्रद्धा के साथ संपन्न किया जाता है, ताकि देवी से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और बुरी शक्तियों से सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके.
जरूरी सामानों को कर लें इकट्ठा
कन्या पूजन करने से पहले सभी जरूरी सामान इकट्ठा करना आवश्यक है ताकि रस्म बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके. इनमें कुमकुम या सिंदूर, अक्षत, फूल, लड़कियों के पैर धोने के लिए एक कलश, एक लाल चुनरी, मिठाई, खीर या हलवा, चना और प्रसाद के लिए इसी तरह की चीजें, एक नारियल, बिंदी, चूड़ियां, पायल और अलग-अलग तोहफे शामिल हैं.
जगह को करें साफ
कन्या पूजन के लिए सबसे पहले आपको उस जगह को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए जहां आप पूजा करने वाले हैं. यदि आप चाहें तो आप उस जगह को रंगोली से भी सजा सकते हैं. जिस जगह पर कन्याएं बैठेंगी वहां जमीन पर एक साफ चटाई या कपड़ा बिछा दें. यह सुनिश्चित करें कि पूजा-विधि के लिए जरूरी सभी सामग्री ठीक से व्यवस्थित हो और आसानी से उपलब्ध हो. परंपरा के अनुसार, कन्या पूजन के लिए नौ कन्याओं और एक बालक को आमंत्रित किया जाता है. हालांकि, यदि नौ कन्याएँ उपलब्ध न हों तो आप पांच या सात कन्याओं को भी भोजन करा सकते हैं.
देवी का करें स्वागत
पूजा की शुरुआत अपने घर में कन्याओं को आमंत्रित करें. यह देवी के चरणों के शुद्धिकरण और घर में उनके स्वागत का प्रतीक है.
तिलक कर करें पूजन
प्रत्येक कन्या के माथे पर कुमकुम, हल्दी का तिलक लगाएं. यह सम्मान का प्रतीक है और देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान करता है. तिलक लगाने के बाद कन्याओं के सिर पर अक्षत छिड़कें जो पवित्रता का प्रतीक है. हर एक को लाल चुनरी पहननी चाहिए. चूड़ियां और बिंदी लगानी चाहिए. ये पानी देवी की शक्ति और सुंदरता का प्रतीक हैं.
भोजन कराएं
कन्या पूजन का एक अहम हिस्सा लड़कियों को पारंपरिक भोजन परोसना है, जिसमें पूरी, खीर, चना और हलवा शामिल होता है. उन्हें भोजन परोसते समय यह सुनिश्चित करें कि भोजन पूरे आदर-सम्मान के साथ दिया जाए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस अनुष्ठान के दौरान कन्याओं को साक्षात देवी का ही रूप मानकर पूजा जाता है.
चरण स्पर्श कर लें आशीर्वाद
सभी दुर्गा रूप कन्याओं को भोजन कराने के बाद चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है. इसके बाद उन्हें उपहार तथा दक्षिणा दी जाती है. भोजन के उपरांत दी जाने वाली दक्षिणा को लड़कियों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है.
नियमों का करें पालन
कन्या पूजन करते समय आपको कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए ताकि आपको इस अनुष्ठान का पूरा लाभ मिल सके. यह सुनिश्चित करें कि घर और पूजा के लिए तय की गई जगह दोनों ही अच्छी तरह से साफ-सुथरे हों और जो व्यक्ति पूजा कर रहा है वह भी पूरी तरह से पवित्र अवस्था में हो. कन्या पूजन के दौरान मन को किसी भी तरह के भटकाव से मुक्त रखना चाहिए. पूजा के लिए जिन छोटी कन्याओं को बुलाया गया है. उनके साथ अत्यंत आदर और स्नेह का व्यवहार किया जाना चाहिए क्योंकि वे देवी का ही स्वरूप मानी जाती हैं. इसलिए उनके प्रति किसी भी प्रकार का अनादर इस अनुष्ठान के शुभ प्रभावों को समाप्त कर सकता है. पूजा के समय कन्याओं की सही संख्या का उपस्थित होना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. आपको हमेशा विषम संख्या में कन्याओं को आमंत्रित करना चाहिए और उनके साथ एक छोटे बालक को भी बुलाना चाहिए.
डिस्क्लेमर
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.