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Turtuk Village: भारत-पाक की बॉर्डर पर बसा यह गांव, बना टूरिस्ट प्लेस, कैसे पहुंचे?

Turtuk Village: आपने शायद भारत-पाकिस्तान सीमा के बारे में बहुत कुछ सुना होगा. असल में इस पर कई फ़िल्में भी बनी हैं. इसके अलावा वाघा बॉर्डर जो भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे का प्रतीक है, एक मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन है. इसी सिलसिले में आज हम आपको भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे आखिरी गांव के बारे में बताने जा रहे हैं. यह एक ऐसा टूरिस्ट गांव है जो अब भारत का एक अहम हिस्सा है. यहां पर दूर-दराज से लोग घूमने के लिए आते हैं.

Last Updated: March 28, 2026 | 12:43 PM IST
A village that became part of India after the Partition - Photo Gallery
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बंटवारे के बाद भारत में शामिल हुआ गांव

यह बात ध्यान देने लायक है कि 1971 के युद्ध के दौरान जिसमें पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा था, यह गांव उसके हाथ से निकल गया और भारत में शामिल हो गया. हालांकि, इससे पहले, 1947 के बंटवारे के बाद यह गांव पाकिस्तान का हिस्सा था. खास बात यह है कि यह गांव बड़ी संख्या में टूरिस्टों को अपनी ओर खींचता है. आइए जानते हैं कि इस अनोखी जगह पर घूमने के दौरान आप क्या-क्या देख सकते हैं और कहां ठहर सकते हैं.

Turtuk is a famous village - Photo Gallery
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तुरतुक गांव है फेमस

भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे इस आखिरी गांव का नाम तुरतुक है. लद्दाख के लेह जिले में बसा यह गांव बेहद खूबसूरत है. यह गांव खास तौर पर अपने फलों, और उनमें भी खासकर खूबानी (apricots) के लिए मशहूर है. 1971 के युद्ध के बाद भारतीय सेना ने इस गांव पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया. यह गांव असल सीमा से लगभग 8 किलोमीटर पहले बसा हुआ है. इस जगह से आगे 'थांग' नाम की एक जगह है, जो पाकिस्तानी सेना के स्नाइपरों की पहुंच में आता है.

Balti-speaking people - Photo Gallery
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बाल्टी भाषी लोग

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस गांव की आबादी लगभग 2,500 लोगों की है. ऐतिहासिक तौर पर जब यह गांव पाकिस्तान का हिस्सा था, तो इस इलाके को 'बाल्टिस्तान' कहा जाता था. इसी वजह से आज भी यहां के कुछ स्थानीय लोग 'बाल्टी' भाषा बोलते हैं. अपनी कुदरती खूबसूरती के अलावा, यह गांव आने वाले टूरिस्टों को कई ऐतिहासिक जगहों को देखने का मौका भी देता है.

Tourists flock here - Photo Gallery
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खिंचे चले आते हैं टूरिस्ट

इनमें 16वीं सदी की एक मस्जिद और एक मशहूर पोलो ग्राउंड खास तौर पर शामिल हैं. इस गांव में 'बाल्टी हेरिटेज होम', 'बाल्टी म्यूज़ियम' और 'तुरतुक गोम्पा' जैसी जगहें भी हैं जो टूरिस्टों को अपनी ओर खींचती हैं.

Israelis are present - Photo Gallery
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इजरायली लोग हैं मौजूद

तुरतुक में कई गेस्टहाउस हैं और आपको यह इलाका इज़रायलियों से भरा हुआ मिलेगा. यहां तक कि कुछ गेस्टहाउस तो खास तौर पर इज़रायलियों के लिए ही हैं, जो 800 से 1,000 तक की किफायती दरों पर कमरे नाश्ते सहित उपलब्ध कराते हैं. हालांकि, अगर आप मोलभाव करने को तैयार हैं तो हो सकता है कि आपको और भी कम कीमत मिल जाए. इसके अलावा आपके पास अपनी यात्रा के दौरान होमस्टे चुनने का विकल्प भी है.

Homestay and Delicious Food - Photo Gallery
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होमस्टे और स्वादिष्ट भोजन

यहां के स्थानीय लोगों के पास सुंदर ऐतिहासिक घर हैं जहां वे पर्यटकों का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं और उनके लिए स्वादिष्ट भोजन बनाते हैं. होमस्टे में रुकना एक बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि इससे आपको स्थानीय लोगों से बातचीत करने और बाल्टी संस्कृति के बारे में गहरी जानकारी हासिल करने का मौका मिलता है. होमस्टे की दरें प्रति व्यक्ति 350 से शुरू होती हैं, जिसमें दिन का दो बार का भोजन शामिल होता है.

The route to Turtuk - Photo Gallery
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तुरतुक जाने का रास्ता

तुरतुक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले लेह जिला प्रशासन से 'इनर लाइन परमिट' लेना होगा. यह परमिट केवल पांच दिनों के लिए वैध होता है. आप इसे सीधे प्रशासनिक कार्यालय से या लेह में किसी भी ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं. वे आपकी ओर से जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर देंगे.

Beware of fraudsters - Photo Gallery
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धोखेबाजों से रहें सावधान

हालांकि, किसी भी एजेंसी को काम सौंपने से पहले आप उसकी विश्वसनीयता की जांच कर लें. जिससे कि आप किसी धोखाधड़ी का शिकार न बनें. एक ज़रूरी बात जो याद रखनी चाहिए वह यह है कि प्रशासनिक कार्यालय शाम 5:00 बजे बंद हो जाता है. इसलिए, अपने परमिट की व्यवस्था उसी के अनुसार करना सुनिश्चित करें.

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