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हिल स्टेशन पर मॉल रोड क्यों होते हैं? जानिए कॉलोनियल विरासत, सोशल डिज़ाइन और सुंदर नजारों का सीक्रेट

Mall Road: किसी भारतीय हिल स्टेशन पर पहुंचना हमेशा जाना-पहचाना लगता है. आप किसी भी पहाड़ी शहर में जाएं, आपको लगभग हमेशा एक चहल-पहल वाला मॉल रोड मिलेगा. यह वह जगह है जहां टूरिस्ट शाम को टहलते हैं, कैफ़े और यादगार चीज़ों की दुकानें भरी रहती हैं. शहर की एनर्जी तब और बढ़ जाती है जब लोग आराम करने और दूसरों को गुज़रते हुए देखने के लिए इकट्ठा होते हैं. यह आम बात अक्सर यात्रियों को यह जानने के लिए उत्सुक करती है कि भारत के लगभग हर हिल स्टेशन का अपना मॉल रोड क्यों है?

Last Updated: February 27, 2026 | 2:08 PM IST
Colonial-Era Tradition - Photo Gallery
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कॉलोनियल-एरा ट्रेडिशन

ज़्यादातर इंडियन हिल स्टेशन ब्रिटिश राज में डेवलप हुए थे. अंग्रेजों ने मैदानी इलाकों की गर्मी से बचने के लिए गर्मियों में शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग और ऊटी जैसे शहर बनाए थे. इन शहरों को छोटे इंग्लिश शहरों जैसा बनाने का प्लान था, जिनमें खुली घूमने की जगहें और सेंट्रल पब्लिक जगहें थीं जहाँ लोग घूम सकें और मिल-जुल सकें.

The Social Heart of Hill Stations - Photo Gallery
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हिल स्टेशनों का सोशल हार्ट

सालों से ये घूमने की जगहें रहने वालों और विज़िटर्स के इकट्ठा होने की मुख्य जगह बन गईं. मॉल रोड आरामदायक वॉक और सुंदर नज़ारों के लिए चौड़ी बनाई गईं और वे खास सरकारी इमारतों और इंस्टीट्यूशन्स को जोड़ती थीं. पास में चर्च, क्लब, लाइब्रेरी और ऑफिस बनाए गए. इससे मॉल रोड रोजमर्रा की जिंदगी का सेंटर बन गया. आजादी के बाद भी यह लेआउट नहीं बदला.

Designed for hilly terrain - Photo Gallery
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पहाड़ी इलाकों के लिए डिज़ाइन किया गया

ज्योग्राफी ने भी एक अहम रोल निभाया. हिल स्टेशनों पर समतल जमीन कम होती है, इसलिए प्लान बनाने वालों ने काफी समतल जमीन पर एक सेंट्रल रोड बनाई. खड़ी पहाड़ियों पर दुकानें और बाज़ार फैलाने के बजाय, सब कुछ एक ही आसान सड़क पर रखा गया. इससे पैदल चलना आसान हो गया और बिज़नेस को एक सेंट्रल एरिया में बढ़ने में मदद मिली.

Tourism made him famous - Photo Gallery
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टूरिज्म ने उन्हें फेमस बनाया

जैसे-जैसे टूरिज्म बढ़ा, मॉल रोड्स एक जीवंत कल्चरल हब बन गए. विज़िटर्स अब उन्हें दुकानों, कैफे और लोकल अट्रैक्शन से भरी जरूर घूमने वाली जगहों के तौर पर देखते हैं. शिमला का रिज, दार्जिलिंग का चौरास्ता और मनाली का मॉल रोड जैसी जगहों का अपना चार्म है लेकिन फिर भी वे उसी पुराने डिज़ाइन को फॉलो करते हैं. कई टूरिस्ट के लिए, मॉल रोड पर टहलने, थोड़ी चाय और शॉपिंग के बिना ट्रिप अधूरी लगती है.

Where history meets modern life - Photo Gallery
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अतीत और वर्तमान का मेल

आज मॉल रोड पुराने और नए का मेल हैं. पुराने जमाने की इमारतें, सुंदर नज़ारे और चर्च इतिहास को दिखाते हैं, जबकि मॉडर्न कैफ़े, बुटीक, एडवेंचर ऑफ़िस और स्ट्रीट फ़ूड स्टॉल आज की लाइफ़स्टाइल दिखाते हैं. वे पहाड़ी शहरों के कल्चरल और कमर्शियल सेंटर बने हुए हैं.

More than just a road - Photo Gallery
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सिर्फ़ एक सड़क से कहीं ज़्यादा

मॉल रोड सिर्फ़ एक सड़क नहीं है बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि इतिहास आज की ज़िंदगी को कैसे आकार देता है. यह कॉन्सेप्ट पहले भी बहुत अच्छा काम करता था और आज भी काम करता है. यह लोगों को एक साथ लाता है. हिल स्टेशन की जिंदगी दिखाता है और एक ही जगह पर पहाड़ों के सुकून भरे माहौल को दिखाता है.

People enjoy here - Photo Gallery
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लोग यहां पर करते हैं एंजॉय

मज़ेदार बात यह है कि मॉल रोड उन जगहों के डेमोक्रेटाइज़ेशन की भी निशानी हैं जो कभी एक्सक्लूसिव थीं. असल में ब्रिटिश अफसरों और उनके परिवारों के लिए डिज़ाइन की गई ये घूमने की जगहें अब सभी के लिए खुली हैं. ये ऐसी जगहें बन गई हैं जहां हर तरह के लोग इकट्ठा हो सकते हैं, जश्न मना सकते हैं और पहाड़ी हवा का मजा ले सकते हैं. इस मायने में, मॉल रोड भारत के पुराने ज़माने से लेकर आज के शानदार समय तक के सफ़र को दिखाती हैं. यह एलीट रास्तों को सबको साथ लेकर चलने वाले कल्चरल हब में बदल रही हैं.

Changes according to the times - Photo Gallery
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वक्त के मुताबिक बदलाव

मॉल रोड्स आज के टूरिज्म के हिसाब से ढल गया है. आपको हैंडीक्राफ्ट स्टोर और ऊनी कपड़ों की दुकानों से लेकर ट्रेंडी कैफे और फास्ट-फूड आउटलेट तक सब कुछ मिल जाएगा. स्ट्रीट वेंडर रोस्टेड कॉर्न और मोमोज बेचते हैं. साथ ही बेकरी प्लम केक और पेस्ट्री बेचती हैं.

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