नीतीश को क्यों मिली Z+ सिक्योरिटी? जानें कब लेंगे राज्यसभा सदस्य की शपथ
Nitish Kumar Z Plus Security: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सिक्योरिटी को लेकर एक बड़ा फैसला हुआ है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार को Z-प्लस कैटेगरी की सिक्योरिटी मिलेगी. बिहार सरकार के होम डिपार्टमेंट ने इस बारे में एक नोटिफिकेशन जारी किया है. तो चलिए जानते हैं कि Z-प्लस कैटेगरी की Z+ सिक्योरिटी कौन देता है और ये किसे दी जाती है.
नोटिफिकेशन जारी
इस नोटिफिकेशन में नीतीश कुमार के चीफ लेटर में लिखा है, "वे बिहार लेजिस्लेटिव काउंसिल के मेंबर और बिहार के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देंगे और राज्यसभा की मेंबरशिप लेंगे."
कब लेंगे शपथ?
इस बीच न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक मुख्यमंत्री 10 अप्रैल को दिल्ली में राज्यसभा मेंबर के तौर पर शपथ लेंगे और 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं.
बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट 2000 के तहत फैसला
होम डिपार्टमेंट की तरफ से जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक नीतीश कुमार को बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट, 2000 के तहत सिक्योरिटी के लिए एलिजिबल माना गया है. यह कानून खास लोगों को उनकी सेंसिटिविटी के आधार पर सिक्योरिटी कवर देने का अधिकार देता है. डिपार्टमेंट ने कहा कि यह सिक्योरिटी उपाय मुख्यमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल और मौजूदा पॉलिटिकल हालात का रिव्यू करने के बाद लिया गया था.
क्यों लिया गया फैसला?
डिपार्टमेंट ने कहा कि यह सिक्योरिटी उपाय मुख्यमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल और मौजूदा पॉलिटिकल हालात का रिव्यू करने के बाद लिया गया था.
होम डिपार्टमेंट के लेटर में क्या है?
पुलिस डायरेक्टर जनरल को लिखे लेटर में कहा गया है, "नीतीश कुमार को बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट, 2000 के तहत सिक्योरिटी दी जाएगी. नीतीश अभी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं और जल्द ही बिहार लेजिस्लेटिव काउंसिल की मेंबरशिप और मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा में शामिल होंगे."होम डिपार्टमेंट की तरफ से जारी लेटर में कहा गया है कि वह मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा में शामिल होंगे.
Z+ सिक्योरिटी किसे दी जाती है?
देश के सम्मानित लोगों और नेताओं को Z+ सिक्योरिटी तब दी जाती है जब उनकी जान को खतरा होता है. यह सिक्योरिटी मंत्रियों को दी जाने वाली सिक्योरिटी से अलग होती है. पहले सरकार को एक एप्लीकेशन देनी होती है, जिसके बाद सरकार इंटेलिजेंस एजेंसियों के ज़रिए खतरे का अंदाज़ा लगाती है. खतरे की पुष्टि होने के बाद सिक्योरिटी दी जाती है. होम सेक्रेटरी, डायरेक्टर जनरल और चीफ सेक्रेटरी वाली एक कमेटी तय करती है कि संबंधित लोगों को किस कैटेगरी की सिक्योरिटी दी जानी चाहिए.
Z+ सिक्योरिटी कौन देता है?
पुलिस के अलावा, कई एजेंसियां VIP और VVIP को सिक्योरिटी कवर देती हैं. इनमें स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG), NSG, ITBP और CRPF शामिल हैं. वैसे तो NSG आम तौर पर VIPs की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार होता है, लेकिन Z+ सिक्योरिटी पाने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए CISF को भी यह काम सौंपा जा रहा है.
30 मार्च को अपने MLC पद से इस्तीफा
नीतीश कुमार ने सोमवार, 30 मार्च को अपने MLC पद से इस्तीफा दे दिया. 2005 में बिहार में सरकार बनाने के बाद से नीतीश कुमार लगातार लेजिस्लेटिव काउंसिल के मेंबर रहे हैं.