Exercise Actually Work: एक्सरसाइज से नहीं पड़ रहा असर, अपनाएं ये आदत दिखेगा फर्क
How Actually Exercise Works: बहुत से लोगों की शिकायत होती है कि वे एक्सरसाइज तो करते हैं लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ता. ऐसे में सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने बताया कि आपको एक आदत बदलने की जरूरत है, जो एक्सरसाइज को असरदार बना सकती हैं. उनका कहना है कि स्टैमिना शॉर्टकट या बड़े लक्ष्यों से नहीं बल्कि छोटे और रोज़ाना के मूवमेंट से बनता है. एक्सरसाइज करने के लिए छोटी शुरुआत करें, लगातार बने रहें और तरक्की को स्वाभाविक रूप से होने दें क्योंकि लगातार बने रहना ही एक्सरसाइज़ को सच में काम का बनाता है.
स्टैमिना रातों-रात नहीं बनता
सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने कहा कि स्टैमिना सिर्फ़ प्रैक्टिस से बेहतर होता है. एक्सरसाइज शॉर्टकट से नहीं, हैक्स से नहीं बल्कि लगातार मौजूद रहने से असर करता है, भले ही वो छोटा लगे.
बड़े लक्ष्यों का न करें पीछा
बहुत से लोग इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि वे 30 मिनट तक चल या दौड़ नहीं पाते. यह निराशा इसलिए आती है क्योंकि वे शरीर की असल स्थिति को देखे बिना बहुत जल्दी बहुत बड़ा लक्ष्य बना लेते हैं.
बहुत छोटी शुरुआत करें
अगर आप सिर्फ़ एक मिनट एक्सरसाइज़ कर सकते हैं, तो वहीं से शुरू करें. एक मिनट काफी है. इसे एक हफ्ते तक रोज करें. इसके लिए आपको अपनी क्षमता से ज्यादा जोर नहीं लगाना है और बिना जज किए एक्सरसाइज करनी है.
कैसे होगी तरक्की?
जब एक मिनट से शुरू करेंगे, तो आगे दो मिनट और तीन मिनट औऱ फिर लगातार इसे बढ़ाएं. जब आप प्रोसेस का सम्मान करते हैं, तो स्टैमिना बिना जबरदस्ती, निराशा या बर्नआउट के बढ़ता है.
सेहत को दें समय
भले ही तीस मिनट तक पहुंचने में सालों लग जाएं, फिर भी यह मायने रखता है. फ़िटनेस किसी भी सार्थक चीज की तरह सब्र का इनाम देती है, जो जल्दबाजी से नहीं हो सकता.
लंबे समय के लिए बिल्डर की तरह सोचें
जिस तरह से कोई बिज़नेस रातों-रात करोड़ों नहीं कमा सकता, ठीक वैसे ही स्टैमिना रोजाना की कड़ी मेहनत से बनता है. लगातार दोहराए गए छोटे काम बेहतर नतीजे देते हैं.
रोजाना मूवमेंट जरूरी
हर दिन एक्सरसाइज़ करें, भले ही वह दो मिनट के लिए हो. लगातार बने रहना शरीर और दिमाग को कभी-कभी लंबे वर्कआउट से कहीं बेहतर ट्रेन करता है.
वह आदत जो सब कुछ बदल देती है
नंबरों का पीछा न करें, लगातार बने रहने का पीछा करें. जब मूवमेंट रोज़ाना की आदत बन जाता है, तो स्टैमिना चुपचाप बढ़ता है और एक्सरसाइज आखिरकार काम करना शुरू कर देती है.