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Pongal Festival: क्यों मनाए जाते हैं पोंगल त्योहार, जानें इनके 4 प्रकार और धार्मिक मान्यता?

Pongal Festival: पोंगल का त्योहार वैसे तो भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है लेकिन यह तमिलनाडु का एक अहम पर्व माना जाता है. वहां पर यह चार दिन तक चलता है. इस दौरान पहले दिन घरों की सफाई भोगु पोंगल, दूसरे दिन थाई पोंगल फिर मट्टू पोंगल और फिर कानुम पोंगल मनाया जाता है.

Last Updated: January 13, 2026 | 2:40 PM IST
Pongal is a special festival of Tamil Nadu - Photo Gallery
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तमिलनाडु का खास पर्व है पोंगल

पोंगल जनवरी में मनाया जाने वाला कई दिनों तक चलने वाला दक्षिण भारतीय त्योहार है. पोंगल तमिलनाडु के सबसे महत्वपूर्ण फसल त्योहारों में से एक है, जो भारत के दूसरे हिस्सों में मकर संक्रांति के साथ मनाया जाता है. पोंगल शब्द तमिल क्रिया पोंगु से आया है, जिसका मतलब "उबलना" या "छलकना" है.

Pongal is a symbol of good fortune - Photo Gallery
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अच्छे भाग्य का प्रतीक है पोंगल

पोंगल तमिलनाडु का एक अहम पर्व है. यह समृद्धि और अच्छे भाग्य का प्रतीक है. परंपरा के अनुसार, चावल और दूध को एक सजाए हुए मिट्टी के बर्तन में तब तक पकाया जाता है जब तक वे उबलकर बाहर न आ जाएं, जो विकास और धन का प्रतीक है.

Why is Pongal celebrated - Photo Gallery
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पोंगल क्यों मनाया जाता है?

एक मशहूर कहानी के अनुसार, भगवान शिव के बैल नंदी ने एक बार एक संदेश को गलत समझ लिया था. जिसकी वजह से इंसानों को खेती में उनकी मदद की ज़रूरत पड़ी. इस काम का सम्मान करने के लिए पोंगल त्योहार के दौरान बैलों की पूजा की जाती है. यह खेती में उनके महत्व और इंसानी जीवन में समृद्धि को दर्शाता है.

Special dishes are prepared - Photo Gallery
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खास डिश बनाई जाती है

पोंगल अच्छी फसल के लिए सूर्य देव को धन्यवाद देने का भी त्योहार है. इस उत्सव के हिस्से के तौर पर पोंगल नाम की एक खास डिश चावल, दूध और गुड़ को एक साथ उबालकर बनाई जाती है. फिर इस मीठी, खुशबूदार डिश को कृतज्ञता और समृद्धि के प्रतीक के तौर पर सूर्य देव को चढ़ाया जाता है.

Pongal is incomplete without Jallikattu - Photo Gallery
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जल्लीकट्टू के बिना पोंगल अधूरा है

पोंगल में पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू भी होता है, जो तमिलनाडु में बहुत लोकप्रिय है. इस रोमांचक खेल में बैल के सींगों पर एक सिक्का या टोकन बांधा जाता है, जिसे प्रतिभागी पकड़ने की कोशिश करते हैं. "जल्लीकट्टू" नाम का मतलब है "सिक्के बांधना" और इस त्योहार के दौरान इसे साहस, कौशल और सांस्कृतिक विरासत के प्रदर्शन के रूप में मनाया जाता है.

Disclaimer - Photo Gallery
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डिस्क्लेमर

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के लिए है. यह अन्य भरोसेमंद स्त्रोतों से ली गई है.

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