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Prakash Jha Birthday: झकझोर देंगी प्रकाश झा ये 4 फिल्में, समाज, सिस्टम और क्राइम का दिखाया सच

Prakash Jha Birthday: प्रकाश झा हिंदी सिनेमा के एक उम्दा किस्म के डायरेक्टर में से एक हैं. वह अपने काम को लेकर बेबाक हैं और जब बड़े पर्दे पर असलियत दिखाने की बात आती है तो वह अपनी पूरी कोशिश करते हैं. उनकी बनाई फिल्में अगर बराबरी की नहीं तो, सच्चाई के सबसे करीब होती हैं. आज उनका जन्मदिन है. चलिए जानते हैं उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों के बारे में जिसने बिहार की राजनीति और क्राइम को पर्दे पर लाकर खड़ा किया.

Last Updated: February 27, 2026 | 11:25 AM IST
Prakash Jha birthday - Photo Gallery
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प्रकाश झां का जन्मदिन

मशहूर फिल्ममेकर प्रकाश झा आज एक साल और बड़े हो गए हैं. 27 फरवरी 1952 को बिहार के वेस्ट चंपारण में जन्मे प्रकाश झा मुंबई की चकाचौंध से दूर बड़े हुए. शुरू में दिल्ली यूनिवर्सिटी में फिजिक्स की पढ़ाई की और उनके मन में पेंटर बनने का ख्याल था लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

Filmmaking changed my life - Photo Gallery
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फिल्ममेकिंग से बदल गई जिंदगी

एक फिल्म की शूटिंग के मौके पर उन्हें सिनेमा की तरफ जाने की प्रेरणा मिली. बाद में उन्होंने एडिटिंग की पढ़ाई के लिए FTII पुणे जॉइन किया, जिससे फिल्ममेकिंग से उनका ज़िंदगी भर का जुड़ाव शुरू हो गया. इंडियन सिनेमा अपने सबसे निडर कहानीकारों में से एक प्रकाश झा को याद करता है. पॉलिटिक्स, पावर स्ट्रगल और सोशल रियलिटी को बड़े पर्दे पर लाने के लिए पहचाने जाने वाले झा ने एक ऐसी लेगेसी बनाई जिसकी बराबरी बहुत कम डायरेक्टर कर सकते हैं.

Films made a place in hearts - Photo Gallery
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फिल्मों ने दिलों में बनाई जगह

दामुल और गंगाजल से लेकर राजनीति और सत्याग्रह तक, उनकी फिल्मों ने लगातार ऑडियंस का मनोरंजन करते हुए बातचीत शुरू की है. मेनस्ट्रीम में सफलता से पहले, प्रकाश झा ने दमदार डॉक्यूमेंट्री से अपनी पहचान बनाई. उनके शुरुआती काम, जिसमें 'फेसेज़ आफ्टर द स्टॉर्म' भी शामिल है, ने सेंसिटिव सोशियो-पॉलिटिकल मुद्दों को उठाया और उन्हें बैन भी झेलना पड़ा. हालांकि, इसके बाद उन्हें पहचान मिली जिसमें नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी शामिल है. इन शुरुआती सालों ने उनकी अलग आवाज बनाई.

Crime-political dramas became hits - Photo Gallery
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क्राइम-पॉलिटिकल ड्रामा हुए हिट

प्रकाश झा के क्राइम-पॉलिटिकल ड्रामा अच्छे चल रहे हैं और आज भी इंडियन सिनेमा की कुछ सबसे अच्छी फिल्में हैं. यहां प्रकाश झा की मेरी पसंदीदा फिल्मों की लिस्ट है, जो बिहार के अंधेरे कच्चे, ऊबड़-खाबड़ और असली अतीत को दिखाती है.

Gangajal attracted everyone attention - Photo Gallery
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गंगाजल ने खींचा सबका ध्यान

गंगाजल 2003 की एक फिल्म थी जो भागलपुर-बिहार के बदनाम आंखफोड़वा कांड पर आधारित थी. इसमें 33 कैदियों की आंखों में स्क्रूड्राइवर से वार किया गया था और बाद में पुलिस ने उनकी आंखों में एसिड डालकर उन्हें अंधा कर दिया था. यह फिल्म कमर्शियल और क्रिटिकल, दोनों तरह से सफल रही और इसे नेशनल और इंटरनेशनल अवॉर्ड्स के लिए कई नॉमिनेशन मिले. गंगाजल ने ‘दूसरे सोशल मुद्दों पर बेस्ट फिल्म’ का नेशनल अवॉर्ड जीता और फिल्म के विलेन यशपाल शर्मा को ‘इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी अवॉर्ड्स’ में नॉमिनेट किया गया. अजय देवगन ने SP अमित कुमार का रोल बहुत अच्छे से निभाया. हालांकि, फिल्म का अंत फिक्शनल था. पूरी फिल्म ने दुखद घटना की असलियत दिखाई.

Apaharan is still my favourite film - Photo Gallery
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अपहरण आज भी पसंदीदा फिल्म

अपहरण फिल्म को लोग आज भी काफी पसंद करते हैं. अपहरण आज भी प्रकाश झा की सबसे आइकॉनिक फिल्मों में से एक है और इसे लोगों की काफी सराहना भी मिली है. यह फिल्म शहाबुद्दीन की ज़िंदगी से काफी इंस्पायर्ड थी, जिन्हें बिहार के सिवान का ‘बाहुबली’ कहा जाता था और प्रकाश ने भी इस बात से इनकार नहीं किया है. अपहरण में नाना पाटेकर, अजय देवगन, बिपाशा बसु और यशपाल शर्मा लीड रोल में हैं.

The story of fighting the system in the Mrityudand - Photo Gallery
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मृत्युदंड में सिस्टम से लड़ाई की कहानी

मृत्युदंड 1997 में प्रकाश झा की डायरेक्ट की हुई हिंदी फिल्म थी, जिसमें माधुरी दीक्षित, शबाना आज़मी, अयूब खान और ओम पुरी लीड रोल में थे. इसमें तीन बहादुर महिलाओं की कहानी बताई गई है जो अपनी ज़िंदगी में दबंग मर्दों और उनके द्वारा दिखाए जाने वाले दबाने वाले सिस्टम से लड़ रही हैं. केतकी अपने पति विनय के साथ तिरपत सिंह के गलत इस्तेमाल के बाद लड़ती है. यह फिल्म पहले के समय में समाज में मौजूद मर्दों की सोच और महिलाओं के खिलाफ हिंसा को शानदार ढंग से दिखाती है. मृयुदंड को कई नेशनल और इंटरनेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया और उसने अवॉर्ड जीते. इसमें ऑडियंस अवॉर्ड्स और बैंकॉक फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फीचर फिल्म, स्पेशल जूरी अवॉर्ड, बेस्ट फीचर फिल्म, सिनेमा टाउट इक्रान जिनेवा और भी बहुत कुछ शामिल हैं.

Damul based on bonded labour - Photo Gallery
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बंधुआ मजदूर पर आधारित है 'दामुल'

दामुल मूवी बिहार में बंधुआ मजदूरों और उनकी जिंदगी पर आधारित थी. यह फिल्म माधो की कहानी बताती है, जो एक गांव का मुखिया और अमीर जमींदार है. वह भोले-भाले गांववालों को अपना गुलाम बनाने के लिए मजबूर करता है. उन्हें बहला-फुसलाकर और उनकी समस्याओं का गलत फायदा उठाता है. दामुल को 1984 में बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल फिल्म अवॉर्ड और 1985 में बेस्ट मूवी का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड मिला. प्रकाश झा अभी सुपर-पॉपुलर सीरीज आश्रम का सीजन 3 डायरेक्ट कर रहे हैं, जो जून में रिलीज होने वाली है.

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डिस्क्लेमर

यह लेख सिर्फ मनोरंजन के लिए है. यह कई स्त्रोतों से लिया गया है. इंडिया न्यूज तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है.

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